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जानिए वो 10 डरावना सच जो मरीज को डॉक्टर कभी नहीं बताते

 Special News Coverage |  2016-03-30 09:28:13.0

जानिए वो 10 डरावना सच जो मरीज को डॉक्टर कभी नहीं बताते

नई दिल्ली: जानिए वो 10 डरावना सच जो मरीज को डॉक्टर कभी नहीं बताते, जी हाँ, कुछ बाते ऐसी होती है जो डॉक्टर आपको कभी नहीं बता पाते। डॉक्टर हमें स्वस्थ रखने में हमारी मदद करते हैं इसीलिए डॉक्टर को समाज में बड़ा रुतबा और इज्जत दी जाती है, लेकिन वर्तमान समय में गौर करें तो आजकल ऐसे भी डॉक्टर्स हैं जो मरीज की सेहत से ज्यादा पैसा कमाने पर ध्यान देते हैं। जैसे आपको ज्यादा आवश्यकता ना होने पर भी तरह-तरह की जांच और दवाइयां लिख दी जाती हैं। खैर चिकित्सक हमारी मदद तो किसी न किसी रूप में करते ही हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी तथ्य हैं जिन्हें डॉक्टर्स मरीज को नहीं बताते हैं। हम आपको 10 ऐसे सच बता रहे हैं जिनको डॉक्टर्स आपसे छुपाते हैं।


1.बिना वजह लगाई जाती है कुछ वैक्सीन
हालांकि वैक्सीन लोगों को किसी बीमारी के इलाज के लिए लगाई जाती है। परन्तु बहुत से डॉक्टर इस बात को नहीं बताते हैं कि वैक्सीन लगाना हर बार जरूरी नहीं होता। कुछ वैक्सीन्स ऎसी हैं तो या तो बेअसर हो चुकी है या फिर वायरस को फैलने में मदद करती है, यह कभी-कभी यह अन्य बीमारियों को आमंत्रित कर देती हैं, जैसे कि फ्लू वायरस की वैक्सीन। बच्चों को दिए जाने वाली वैक्सीन डीटीएपी केवल बी.परट्यूसिस से लड़ने के लिए बनाई गई है जो कि एक मामूली बीमारी है। परन्तु डीटी एपी की वैक्सीन फेफड़ों के इंफेक्शन को आमंत्रित करती है जो दीर्घकाल में व्यक्ति की इम्यूनिटी पॉवर को कमजोर कर देती है।

2.जुकाम सही करने के लिए कोई दवाई नहीं होती
असल में जुकाम सही करने की कोई दवाई होती ही नहीं है, परन्तु आपके डॉक्टर ने शायद ही यह आपको बताया होगा। नाक की अंदरूनी त्वचा में सूजन आ जाने से जुकाम होता है। डॉक्टर जुकाम होने पर एंटीबॉयोटिक्स लेने की सलाह देते हैं परन्तु कई अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि जुकाम 4 से 7 दिनों में अपने आप ही सही हो जाता है। अभी तक मेडिकल साइंस इस बात का कोई कारण नहीं ढूंढ पाया है कि ऎसा क्यों होता है और ना ही इसका कोई कारगर इलाज ढूंढा जा सका है। दवाई से आपके जुकाम पर तो कोई फर्क नहीं पड़ता, पर आपको एंटीबॉयोटिक्स के साइड-इफेक्ट्स का नुकसान जरूर झेलना पड़ता है।

3.एंटीबॉयोटिक्स से लिवर को हानि पहुंचाती है
मेडिकल साइंस की सबसे अद्भुत खोज के रूप में सराही गई दवाएं एंटीबॉयोटिक्स हैं। एंटीबॉयोटिक्स जैसे पैरासिटेमोल ने व्यक्ति की औसत उम्र बढ़ा दी है और स्वास्थ्य लाभ में अनूठा योगदान दिया है, लेकिन यदि कोई भी व्यक्ति लम्बे समेत तक एंटीबॉयोटिक्स दवाओं का सेवन करता है तो उसका लिवर और किडनी बुरी तरह से प्रभावित होती है। जिस कारण कभी-कभी मरीज का ऑपरेशन भी करना पड़ जाता है। इसलिए एंटीबॉयोटिक्स दवाओं का यूज कम ही करें तो बेहतर होगा।

4.एक्स-रे से कैन्सर होता है
जैसा कि आप जानते ही हैं आजकल हर छोटी-छोटी बात पर डॉक्टर एक्स-रे करवाने लग गए हैं। क्या आप जानते हैं कि एक्स-रे करवाने के दौरान निकली घातक रेडियोएक्टिव किरणें कैंसर पैदा करती हैं। सही बात यह भी है की एक बार एक्स-रे करने के बाद मानव शरीर की जितनी हानि होती है उसको पूरा करने में एक वर्ष लग जाता है। ऎसे में यदि किसी को एक से अधिक बार एक्स-रे क रवाना पड़े तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

5.कैंसर पैदा कर सकती हैं दवाइयां
डॉक्टर अच्छे से जानते हैं कि ब्लड प्रेशर या रक्तचाप (बीपी) की दवाइयों से कैंसर का खतरा 3 गुना बढ़ जाता है। ऎसा इसलिए होता है क्योंकि ब्लडप्रेशर की दवाइयां कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स की दर को अधिक कर देती हैं। जिससे शरीर में जीवित कोशिकायें मरने लगती है और प्रतिक्रियास्वरूप कोशिकाएं बेकार होकर उनकी गांठ बनने लगती है।

6.दवाइयों से डायबिटीज बढ़ती है
अक्सर आपके शरीर में डायबिटीज इंसुलिन की कमी होने से पैदा होती है। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि कुछ खास दवाईयों के असर से भी शरीर में डायबिटीज होती है। इन दवाइयों में मुख्यतया एंटी डिप्रेसेंट्स, नींद की दवाईयां, कफ सिरफ तथा बच्चों को एडीएचडी (अतिसक्रियता) के लिए दी जाने वाली दवाईयां शामिल हैं। इन्हें दिए जाने से शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है और व्यक्ति को मधुमेह का इलाज करवाना पड़ता है।

7.कैन्सर हमेशा कैन्सर ही नहीं होता
यूं तो आप जानते है कैन्सर स्त्री-पुरूष दोनों में किसी को भी हो सकता है लेकिन ब्रेस्ट कैन्सर की पहचान करने में अधिकांशतया डॉक्टर गलती कर जाते हैं। सामान्यतया स्तन पर हुई किसी भी गांठ को कैंसर की पहचान मान कर उसका उपचार किया जाता है जो कि बहुत से मामलों में छोटी-मोटी फुंसी ही निकलती है। उदाहरण के तौर पर हॉलीवुड अभिनेत्री एजेलिना जॉली ने मात्र इस संदेह पर अपने ब्रेस्ट ऑपरेशन करके हटवा दिए थे कि उनके शरीर में कैन्सर पैदा करने वाला जीन पाया गया था।

8.एस्पिरीन लेने से शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है

हॉर्ट अटैक तथा ब्लड क्लॉट बनने से रोकने के लिए दी जाने वाली दवाई एस्पिरीन से शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा लगभग 100 गुणा बढ़ जाता है। इससे शरीर के आंतरिक अंग कमजोर होकर उनमें रक्तस्त्राव शुरू हो जाता है। एक सर्वे में पाया गया कि एस्पिरीन डेली लेने वाले मरीज़ में से लगभग 10,000 लोगों को इंटरनल ब्लीडिंग का सामना करना पड़ा।

9.सीने में जलन की दवाई आंतों का अल्सर साथ लाती है
आपको मालुम होगा बहुत बार खान-पान या हवा-पानी में बदलाव होने से व्यक्ति को पेट की बीमारियां हो जाती है और सीने में जलन का होना। जिसके लिए डॉक्टर एंटी-गैस्ट्रिक दवाईयां देते हैं। इन मेडिसीन्स से आंतों का अल्सर होने की संभावना बढ़ जाती है, साथ ही साथ हडि्डयों का क्षरण होना, शरीर में विटामिन बी12 को एब्जॉर्ब करने की क्षमता कम होना आदि बीमारियां व्यक्ति को घेर लेती हैं। सबसे दुखद बात तब होती है जब इनमें से कुछ दवाईयां बीमारी को दूर तो नहीं करती परन्तु साईड इफेक्ट अवश्य लाती हैं।

10.जांच और दवाइयां से डॉक्टर्स कमाते हैं
मोटा कमीशन यह अब छिपी बात नहीं रही कि डॉक्टरों की कमाई का एक मोटा हिस्सा दवाईयों के कमीशन से आता है। यहीं नहीं डॉक्टर किसी खास लेबोरेटरी में ही मेडिकल चैकअप के लिए भेजते हैं जिसमें भी उन्हें अच्छी खासी कमाई होती है। कमीशनखोरी की इस आदत के चलते डॉक्टर अक्सर जरूरत से ज्यादा मेडिसिन दे देते हैं।

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