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संतान प्राप्ति के लिए अपनाएं ये कुछ ख़ास तरीके

 Special News Coverage |  2015-10-08 05:42:26.0

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गर्भाधान एक प्रकार का यज्ञ है। इसलिए इस समय सतत यज्ञ की भावना रखनी चाहिए। विलास की दृष्टि नहीं रखनी चाहिए। दम्पत्ति अपनी चित्तवृत्तियों को परमात्मा में स्थिर करके उत्तम आत्माओं का आवाहन करते हुए प्रार्थना करेः 'हे ब्रह्माण्ड में विचरण कर रही सूक्ष्म रूपधारी पवित्र आत्माओ ! हम दोनों आपको प्रार्थना कर रहे हैं कि हमारे घर, जीवन व देश को पवित्र तथा उन्नत करने के लिए आप हमारे यहाँ जन्म धारण करके हमें कृतार्थ करें। हम दोनों अपने शरीर, मन, प्राण व बुद्धि को आपके योग्य बनायेंगे। पुरुष दायें पैर से स्त्री से पहले शय्या पर आरोहण करे और स्त्री बायें पैर से पति के दाहिने शय्या पर चढ़े।


*आप चित लेटी रहें और अपने दोनों पैर फैला दें। आपके पति आपकी जंघाओं पर बैठ कर शिश्‍न को योनि में प्रवेश कराएं। इस आसन में भी पुरुष के घुटने का सारा भार बिस्‍तर पर होता है, जिससे आपकी जंघाओं पर भी उनके भार का दबाव कम पड़ेगा।

* दूसरी विधि यह है कि संभोग के लिए आप नीचे चित लेट जाएं। पति को ऊपर लेटने को कहें, लेकिन याद रखें उन्‍हें अपना सारा भार आपके शरीर पर नहीं, बल्कि अपने दोनों बाजू पर रखना है। दोनों का शारीरिक समागत केवल लिंग-योनि और कुछ हद तक जंघाओं पर ही होगा, जिससे आप भार रहित संभोग को संपन्‍न कर सकती हैं।

* तीसरी अवस्‍था में आप चित लेट कर अपने दोनों पैर हवा में उठा कर पति के कंधों पर रख दें और वह सामने से आपके अंदर प्रवेश करें। इसमें मामूली भार भी आपके शरीर पर नहीं पड़ेगा। यह संभोग में नयापन तो लाएगा ही, इसमें लिंग भी बहुत गहरे प्रवेश करता है। इससे वीर्य का स्राव काफी अंदर होता है और उसे योनि के अंदर यात्रा भी कम करनी पड़ेगी।

* चौथी अवस्‍था को तीसरी अवस्‍था में थोड़ा परिवर्तन कर हासिल किया जा सकता है। इसमें आप अपने दोनों पैरों को पति के कंधों पर रखने की जगह, घुटने से मोड़ लें और उसे थोड़ा खोल लें (फैला लें)। इसमें भी पति सामने से प्रवेश करेंगे और इस आसन में भी भार आपके शरीर पर नहीं पड़ेगा।

* पांचवीं और सरल अवस्‍था वो है, जिसमें आपके पति तो खड़े हों और आप बिस्‍तर पर लेटी अवस्‍था में हों। आप बिस्‍तर के आखिरी छोर पर चित लेट जाएं और पति से कहें कि वो बिस्‍तर के बाहर खड़े होकर आपकी दोनों जंघाओं को अपने हाथों से पकड़ लें। अब वो अपना पेनिस आपकी वेजाइना में प्रवेश कराएं। इससे उन्‍हें धक्‍का लगाने में आसानी होगी और लिंग भी योनि में गहरे प्रवेश करेगा। शरीर पर आपके पति का भार भी नहीं होगा।

* आप दोनों करवट लेट कर भी संभोग कर सकती हैं, लेकिन इसमें आसानी तब होगी जब अंदर से आपकी इच्‍छा भी सेक्‍स करने की हो ताकि योनि पथ गीला हो जाए, जिससे पुरुष शिश्‍न का प्रवेश आसानी से और गहरे हो।

* हां, सबसे महत्‍वपूर्ण बात यह कि माहवारी के शुरू होने के 14 वें दिन स्‍त्री के अंदर अंडाणु बनने की प्रक्रिय चरम पर होती है। इसलिए पीरियड शुरू होने के दिन से गिने और 12 वें से 16 वें दिन तक प्रत्‍येक रात संभोग करें ताकि गर्भ ठहरने की पूरी संभावना होगी। 11वें और 13 वें रात संभोग वर्जित है।

कुछ सावधानियां
सबसे बड़ी बात यह है कि जब आप गर्भ धारण के उद़देश्‍य से संभोग कर रही हों तो दिन में सम्भोग ना करें क्योकि दिन शुक्राणु प्रबल नहीं होते है। सम्भोग के दौरान आपको और आपके पति को यह ध्‍यान रखना होगा कि आपकी योनि में वीर्य स्राव के बाद न तो वो तत्‍काल अपना लिंग आपकी योनि से निकालें और न ही आप ही उठने की कोशिश करें। वीर्य स्राव के बाद भी दोनों उसी अवस्‍था में लेटी रहें ताकि वीर्य को गर्भाशय ग्रीवा तक पहुंचने में आसानी हो। वीर्य स्राव के बाद स्‍त्री और पुरुष के तत्‍काल अलग होने से वीर्य के बाहर निकलने का खतरा रहता है।

जब तक आप एक दूसरे से लिपटे रहे उस दौरान कुछ देर तक एक-दूसरे की आंखों में देखना, बालों में ऊंगलियां फिराना, होंठ, माथे, गाल और स्‍तनों पर चुंबन लेना पति-पत्‍नी को एक नई ऊर्जा से भर देता है। फिर वह संबंध महज सेक्‍स न होकर प्‍यार में तब्‍दील हो जाता है। याद रखिए, प्‍यार के पल में शुक्राणु व अंडाणु के निषेचन और उससे उत्‍पन्‍न होने वाली संतान एक संवेदनशील और प्‍यारे इंसान के रूप में धरती पर कदम रखेगा। केवल सेक्‍स से उत्‍पन्‍न संतानों का हाल देख लीजिए, अराजक, हिंसक और भ्रष्‍ट व्‍यक्ति में वो आपको हर ओर दिख जाएगा।


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