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हाल के दिनों में अमेरिकी नेतृत्व वाली इंटनेशनल कम्युनिटी ने पाकिस्तान में तेजी से बढ़ते न्यूक्लियर वेपन्स के जखीरे पर चिंता जताई है। ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन के सीनियर ऑफिसर ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ ऐसी डील में काफी वक्त लगेगा। उसे पहले अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को छोड़ना होगा। बता दें कि पाकिस्तान से न्यूक्लियर तकनीक दूसरे देशों में गैरकानूनी ढंग से पहुंचने के मामले सामने आने के बाद पूरी दुनिया में उसकी छवि खराब हो चुकी है।

वॉशिंगटन पोस्ट के एक रिपोर्टर ने खुलासा किया है कि बीते महीने पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ की अमेरिका यात्रा के बाद से ही दोनों देशों के बीच इस पर बातचीत जारी है। ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन ने पाकिस्तानी गवर्नमेंट को लगातार संपर्क में रहने को कहा है। अब 22 अक्टूबर को पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ की अमेरिका यात्रा पर सारी बातें साफ होंगी।

पाक के लिए ये शर्तें मानना मुश्किल
इस तरह की शर्तें मानना पाकिस्तान के लिए बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि वह भारत को सबसे बड़ा खतरा मानता है । सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान तयशुदा रेंज से बाहर हमला करने वाले मिसाइलों को तैनात नहीं करने की शर्त मान सकता है। इससे भारत-अमेरिकी डील को सपोर्ट करने वाले 48 देशों से बना न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप पाकिस्तान को सपोर्ट कर सकता है।


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न्यूक्लियर डील के लिए क्या अमेरिकी की शर्त मानेगा पाक

 Special News Coverage |  2015-10-08 13:02:25.0

nawaz and obama

इस्लामाबाद : भारत की तरह पाकिस्तान भी काफी वक्त से अमेरिका के साथ सिविल न्यूक्लियर डील करना चाहता है। लेकिन न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर पाकिस्तान के खराब रिकॉर्ड को देखते हुए अमेरिका ने डील से पहले ये कड़ी शर्तें रखीं हैं।

हालांकि, यह अभी तक साफ नहीं है कि पाकिस्तान इन शर्तों को मानने के लिए तैयार है या नहीं। बता दें कि 2008 में अमेरिकी प्रेसिडेंट बुश के कार्यकाल में अमेरिका ने भारत के साथ सिविल न्यूक्लियर डील की थी। इसके तहत, भारत न्यूक्लियर रिएक्टर्स से बिजली पैदा कर सकता है। भारत के लिए अन्य देशों से यूरेनियम खरीदने का रास्ता भी साफ हो गया।


अमेरिका के शर्त के मुताबिक न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बंदिश लगाए। उतने ही न्यूक्लियर हथियार डेवलप करे जो उसकी सिक्युरिटी के मद्देनजर जरूरी हों। एक निश्चित रेंज के बाहर निशाना लगाने में सक्षम मिसाइलें तैनात न करे।

डील करने के कारण हैं
पाकिस्तान बीते कई सालों से बिजली की कटौती से परेशान है। कराची और लाहौर जैसे मेट्रो सिटीज में घंटों तक लाइट नहीं रहती। बिजली की समस्या को दूर करने के लिए न्यूक्लियर एनर्जी का सहारा लेना चाहता है। पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी समस्या रिएक्टर में इस्तेमाल होने वाले यूरेनियम हासिल करना है। उसका पुराना रिकॉर्ड देखते हुए न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप उसे यूरेनियम देना नहीं चाहता। इस डील के बाद उसका यूरेनियम हासिल करना आसान हो जाएगा।




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हाल के दिनों में अमेरिकी नेतृत्व वाली इंटनेशनल कम्युनिटी ने पाकिस्तान में तेजी से बढ़ते न्यूक्लियर वेपन्स के जखीरे पर चिंता जताई है। ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन के सीनियर ऑफिसर ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ ऐसी डील में काफी वक्त लगेगा। उसे पहले अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को छोड़ना होगा। बता दें कि पाकिस्तान से न्यूक्लियर तकनीक दूसरे देशों में गैरकानूनी ढंग से पहुंचने के मामले सामने आने के बाद पूरी दुनिया में उसकी छवि खराब हो चुकी है।

वॉशिंगटन पोस्ट के एक रिपोर्टर ने खुलासा किया है कि बीते महीने पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ की अमेरिका यात्रा के बाद से ही दोनों देशों के बीच इस पर बातचीत जारी है। ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन ने पाकिस्तानी गवर्नमेंट को लगातार संपर्क में रहने को कहा है। अब 22 अक्टूबर को पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ की अमेरिका यात्रा पर सारी बातें साफ होंगी।

पाक के लिए ये शर्तें मानना मुश्किल
इस तरह की शर्तें मानना पाकिस्तान के लिए बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि वह भारत को सबसे बड़ा खतरा मानता है । सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान तयशुदा रेंज से बाहर हमला करने वाले मिसाइलों को तैनात नहीं करने की शर्त मान सकता है। इससे भारत-अमेरिकी डील को सपोर्ट करने वाले 48 देशों से बना न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप पाकिस्तान को सपोर्ट कर सकता है।


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