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पाकिस्तान में 300 साल पुराना गुरुद्वारा फिर खुला, सिखों ने मनाया जश्न

 Special News Coverage |  2016-03-31 12:02:53.0

पाकिस्तान में 300 साल पुराना गुरुद्वारा फिर खुला, सिखों ने मनाया जश्न

पेशावर: देश की आजादी के छह दशक बाद पाकिस्तान में 300 साल पुराना भाई बीबा सिंह गुरुद्वारा 64 साल बाद बुधवार को फिर से खोल दिया गया है। पाकिस्तान का यह मशहूर गुरुद्वारा 300 साल पुराना है। इसे बंटवारे के बाद से बंद कर दिया गया था। यह गुरुद्वारा पेशावर के जोगीवाड़ा इलाके में स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इसे सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह के भाई बीबा सिंह ने बनवाया था।

पाकिस्तान के पेशावर में बना यह गुरुद्वारा सिखों के 10वें धर्म गुरु, गुरु गोविंद सिंह के जमाने की बेहतरीन इमारतों में से एक है। अंग्रेजों से देश की आजादी के दौरान जब भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो यहां रहने वाले सिख समुदाय के लोग पलायन कर गए थे। पिछले 66 सालों से यह गुरुद्वारा उपेक्षा का श‌िकार बना हुअा था।


बुधवार को एक प्रोग्राम के दौरान इवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) ने गुरुद्वारे को आधिकारिक तौर पर सिख कम्युनिटी को सौंप दिया। पिछली तीन सदियों से सिख कम्युनिटी जोगीवाड़ा के गुरुद्वारे में जाती रही है। मगर साल 1947 में देश विभाजन के बाद ज्यादातर परिवार भारत के अलावा रावलपिंडी, हसन अब्दल और खैबर जैसे इलाकों में चले गए थे। बाद में लोगों ने यहां आना बंद कर दिया। रिलिजियस डिपार्टमेंट ने इसे अपनी कस्टडी में लेकर बंद कर दिया। गुरुवारे को दोबारा खोले जाने के बाद इस पर साढ़े आठ लाख रुपए खर्च कर रेनोवेशन किया गया। यह काम साल 2013 से चल रहा है।

आपको बता दे की पेशावर में 1200 सिख समुदाय रहते हैं, इससे पहले शहर में दो गुरुद्वारे थे। इसमें से एक पर आर्मी ने बेस कैंप बना लिया। जिससे 1200 सिखों के लिए एक गुरुद्वारे में जाना काफी मुश्किल था। पाकिस्तान में सिख समुदाय में गुरुद्वारे को दोबारा खोले जाने पर बेहद खुशी का मौहल है।

वहीं माइनॉरिटी अफेयर्स मिनिस्टर सरदार सोरन सिंह ने राज्य सरकार की तरफ से तीन रुपए का फंड भी दिया। सिंह ने कहा कि गुरुद्वारे का दोबारा खोले जाने का फैसला पाकिस्तान में इकबाल और मोहम्मद अली जिन्ना के सपने को दिखाता है।

लेकिन दूसरी तरफ यह भी माना जाता है कि इस गुरुद्वारे को सिख सम्राज्य के संस्‍थापक महाराजा रंजीत सिंह ने बनवाया था। उन्होंने पंजाब पर 1780 से 1839 तक हुकूमत की थी।

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