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पाक ने भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को राजनयिकों से मिलने से रोका, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति!

1800 सिख तीर्थयात्री बैसाखी का त्योहार मनाने के लिए रावलपिंडी के गुरुद्वारा पंजा साहिब गए थे?

 Arun Mishra |  2018-04-15 12:38:30.0  |  दिल्ली

पाक ने भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को राजनयिकों से मिलने से रोका, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति!

नई दिल्ली : पाकिस्तान ने भारतीय राजनयिकों से सिख तीर्थयात्रियों के मिलने पर रोक लगा दी है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को इस पर अपनी सख्त आपत्ति दर्ज की है। विदेश मंत्रालय की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह जानकारी दी गई। बता दें कि इससे पहले राजनयिकों की पाकिस्तान के क्लब में एंट्री को लेकर भी विवाद हुआ था।

विदेश मंत्रालय ने कहा, 'यह एक सामान्य प्रक्रिया है कि भारतीय राजनयिकों को भारत से आने वाले सिख तीर्थयात्रियों के तीर्थ स्थल पर जाने और उनसे संपर्क की छूट होती है। काउंसलर और प्रोटोकॉल से जुड़े दायित्वों के निर्वाह के लिए भारतीय दूतावास के अधिकारियों को यह छूट दी जाती है। इस छूट का उद्देश्य मेडिकल आपातकाल या ऐसी किसी और मुश्किल की स्थिति में एक-दूसरे की मदद करना है।'
1800 सिख तीर्थयात्री गुरुवार को पाकिस्तान गए थे। तीर्थ यात्री बैसाखी का त्योहार मनाने के लिए रावलपिंडी के गुरुद्वारा पंजा साहिब गए थे, जिसे सिख धर्म में खास स्थान मिला है। भारतीय काउंसलरों को पाकिस्तान में सिख तीर्थयात्रियों से मिलने से रोका गया था और उन्हें जरूरी प्रोटोकॉल ड्यूटी भी निभाने नहीं दी गई। इसे लेकर भारतीय सरकार ने अपनी सख्त आपत्ति दर्ज की थी।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 'भारतीय टीम सिख यात्रियों से वाघा रेलवे स्टेशन पर 12 अप्रैल को पहुंचने के बाद भी नहीं मिल सके। 14 अप्रैल को भारतीय यात्रियों के साथ पाकिस्तान में मौजूद भारतीय राजनयिकों और दूतावास के अधिकारियों की मीटिंग तय की गई थी, लेकिन ऐन वक्त पर पाकिस्तान ने यह मीटिंग भी नहीं होने दी।' विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि भारतीय राजनयिक अजय बिसेरिया की गाड़ी जब गुरुद्वारे की ओर जा रही थी तब उन्हें बीच रास्ते से सुरक्षा कारणों का हवाला देकर वापस लौटा दिया गया।
भारत की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान ने भारतीय राजनयिकों के साथ बेहद खराब व्यवहार किया गया और यह राजदूतों के साथ दुर्व्यवहार की श्रेणी में आता है। पाकिस्तान ने ऐसा करके वियना कन्वेक्शन 1961 का भी उल्लंघन किया है। धार्मिक तीर्थ यात्रियों के लिए द्विपक्षीय प्रोटोकॉल 1974 और हाल ही में द्विपक्षीय संबंधों को लेकर दोनों देशों की सहमति से तैयार समझौते का भी उल्लंघन किया है।

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