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भारत ने दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' का किया सफल परीक्षण

भारत में निर्मित दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' का गुरुवार को राजस्थान के पोखरण परीक्षण रेंज से एक बार फिर सफल परीक्षण किया गया है।

 Vikas Kumar |  2018-03-22 07:46:06.0  |  नई दिल्ली

भारत ने दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का किया सफल परीक्षण

नई दिल्ली : भारत में निर्मित दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' का गुरुवार को राजस्थान के पोखरण परीक्षण रेंज से एक बार फिर सफल परीक्षण किया गया है। इस दौरान वहां सेना और डीआरडीओ के अधिकारी भी मौजूद रहे।

ताकतवर सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का राजस्थान के पोखरण टेस्ट रेंज में 8:42 बजे सुबह सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया गया। इस मिसाइल की गति ध्वनि की गति से 2.8 गुना ज़्यादा (Mach 2.8) है, और इसकी रेंज 290 किलोमीटर है। ये 300 किलोग्राम भारी युद्धक सामग्री अपने साथ ले जा सकती है।

बताया जाता है मिसाइल ने सफलतापूर्वक सही निशाने पर वार किया। भारतीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस बात की जानकारी दी गई। हाल में आई खबरों के मुताबिक ब्रह्मोस जैसी क्षमता वाली मिसाइल अभी तक चीन और पाकिस्‍तान ने विकसित नहीं की है।

भारत-रूस द्वारा मिलकर बनाई गई ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज को अब 400 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है, क्योंकि वर्ष 2016 में भारत के मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) का पूर्ण सदस्य बन जाने के चलते उस पर लागू होने वाली कुछ तकनीकी पाबंदियां हट गई है।

बता दें ब्रह्मोस का निशाना अचूक है। इसलिए इसे 'दागो और भूल जाओ' मिसाइल भी कहा जाता है। दुनिया की कोई भी मिसाइल तेज गति से हमले के मामले में इसकी बराबरी नहीं कर सकती। यहां तक कि अमेरिका की टॉम हॉक मिसाइल भी इसके मुकाबले नहीं ठहरती।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों को 40 सुखोई युद्धक विमानों में जोड़ने का काम जारी है, और माना जा रहा है कि क्षेत्र में नए उभरते सुरक्षा परिदृश्य में इस कदम से भारतीय वायुसेना की ज़रूरतें पूरी हो जाएंगी।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल वर्ष 2006 से ही भारतीय नौसेना तथा थलसेना का हिस्सा बनी हुई हैं, लेकिन यह संस्करण ज़्यादा कारगर है, क्योंकि धीमी गति से चलने वाले युद्धक पोतों के स्थान पर इसे तेज़ गति से उड़ने वाले सुखोई से दागा जा सकता है, जो लक्ष्य की ओर 1,500 किलोमीटर तक उड़ने के बाद मिसाइल दाग सकता है, और फिर लक्ष्य तक बकाया 400 किलोमीटर मिसाइल खुद तय करती है।

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