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कैलाश सत्यार्थी ने लगातार बढ़ रही बाल यौन हिंसा की घटनाओं को राष्ट्रीय आपातकाल बताया

नॉबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी बोले देश में बाल यौन शोषण की घटना में हुआ बहुत बड़ा इजाफा.

 शिव कुमार मिश्र |  2018-04-17 12:02:29.0  |  दिल्ली

कैलाश सत्यार्थी ने लगातार बढ़ रही बाल यौन हिंसा की घटनाओं को राष्ट्रीय आपातकाल बताया

नई दिल्ली। नोबेल शांति पुरस्कांर विजेता कैलाश सत्यार्थी ने बाल यौन हिंसा की लगातार बढ़रही घटनाओं को राष्ट्रीशय आपातकाल बताया। उन्होंंने कहा, हर पल दो बेटियां बलात्कार की शिकार हो रही हैं और इसमें से कई को मार दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि भारत की आत्मात बलत्कृंत हो रही है और मार दी जा रही है। प्रत्ये्क दिन भारत में 55 बच्चें दुष्कर्म के शिकार हो रहे हैं और हजारों मामलों की रिपोर्टिंग नहीं हो पाती है। उन्होंने कहा,''आधुनिक और स्वंतंत्र भारत बनानेका मकसद तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक कि बच्चे असुरक्षित हैं।" उन्होंंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे की गंभीरता को समझें और दुष्किर्म के शिकार बच्चों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके इसके लिए संसद का कम से कम एक दिन बच्चोंं को समर्पित करें।



नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने ''द चिल्ड्रेेन कैननोट वेट" नामक रिपोर्ट को जारी करते हुए इस बात पर दुख व्यक्त् किया कि भारत में बाल यौन दुर्व्योवहार के जितने भी मुकदमे दर्ज किए जाते हैं लेकिन लचर न्या्यिक व्य वस्थाम के चलते उसको निपटाने में दशकों लग जाते हैं।इसलिए बच्चों को स्वाभाविक रूप से न्यायालय मिल सके इसके लिए उन्होंलने''नेशनल चिल्ड्रेकन्सल ट्रिब्यूकनल" की मांग की। पॉक्सोन के तहत लंबित पड़े मुकदमों के त्वेरित निपटान के ख्या‍ल से उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट की भी मांग की।

बच्चों के साथ बलात्कार और दुर्व्येवहार के आंकड़े जिस तरह सामने आ रहे हैं, और इसके बावजूद न्यातय मिलने में देरी हो रही है उस स्थिति में तो न्याय दूर का सपना लग रहा है। दायित्वेपूर्ण और त्विरित न्यानय मिलने के अभाव में ही कठुवा, उन्नााव, सूरत औरसासाराम में बलात्कानर और दुर्व्य वहार के लगातार मामले सामने आ रहे हैं और बढ़ रहे हैं।

बलात्कार के शिकार हुए बच्चों को तुरंत और प्रभावी न्यासय दिलाने के आलोक में कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन ने इस रिपोर्ट को तैयार किया है और यह रिपोर्ट बाल यौन शोषण के लंबित पड़े मुकदमों की एक राज्यहवार रूपरेखा प्रस्तु त करती है।



फाउंडेशन द्वारा तैयार यह रिपोर्ट वास्तुविकता पर गंभीरता से रोशनी डालती है। अरुणाचल प्रदेश का ही एक उदाहरण यदि हम सामने रखें तो, वहांके एक बच्चे को,जिसके यौन शोषण का मामला रजिर्स्ट ड है,उसे न्याय के लिए 99 साल इंतजार करना होगा। वह भी, तब जबआज से कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाताहै।इसका मतलब यह हुआ कि उसको जिंदगी भर न्याय नहीं मिल पाएगा। गुजरात की स्थिति भी कोई बेहतर नहीं है। और गुजरात में बलात्कार के शिकार बच्चेस को न्याय के लिए 53 साल तक लंबाइंतजार करना पड़ेगा।


बाल यौन शोषण के तहत दर्ज मुकदमों को निपटाने में जिस तरह से लंबा और दुखद इंतजार करना पड़ता है उस स्थिति-परिस्थिति में नोबेल शांति पुरस्काइर विजेता ने सवाल किया कि कि, क्याब आप चाहते हैं कि 15 वर्ष के बच्चेप के साथ आज जो दुर्व्यसवहार हुआ है उसके लिए 70 वर्ष की उम्र तक उसेन्या‍य के लिए इंतजार करना पड़े?

नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कैलाश सत्याार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक शोध संगोष्ठी में ये बातें रखीं। संगोष्ठी''एवरी चाइल्ड मैटर्स :ब्रिजिंग नॉलेज गैप्से फॉर चाइल्डग प्रोटेक्शेन इन इंडिया" पर आयोजित की गई थी। संगोष्ठीज बाल सुरक्षा को सुनिश्चित करने और उसे प्रभावी बनाने के मकसद से आयोजित की गई थी।

ये आंकड़े और शोध बच्चों के खिलाफ अपराधों को समझने में एक और जहां हमारी मदद करेंगे, वहीं दूसरी ओर इसके माध्यम से हम उनके खिलाफ तेजी से बढ़ रहे अपराध के उन्मूंलन की दिशा में भी सक्रिय होंगे।



इस रिपोर्ट के अलावा दो अन्य रिपोर्ट भी इस कार्यक्रम में जारी की गई। एक रिपोर्ट भारत के युवाओं के बीच एक ओर जहां जागरुकता को बढाने और बाल यौन दुर्व्यटवहार को कम करने से संबंधित है, वहीं दूसरी रिपोर्ट बाल यौन दुर्व्यववहार के परिणामस्वेरूप बच्चोंत पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभाव को समझने और उससे निपटने और उसका स्थाड़ई समाधान खोजने से संबंधित है।


इस कार्यक्रम में शिक्षाशास्त्रियों,विश्वविद्यालय और कॉलेज के शोधार्थियों, सिविल सोसाइटी संगठन के प्रतिनिधियों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के प्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों, कानूनी शोधकर्ताओं, न्यायपालिका के प्रतिनिधियों और भारी संख्याक में युवाओं ने भाग लिया।

''दचिल्ड्रेन्स कैननोट वेट" में उल्ले्खित लंबित मामलों के कुछ उदाहरण यहां निम्निलिखित हैं-
1. सबसे कम समय में न्या य देने वाले राज्य पंजाब, नगालैंड और चंडीगढ़ हो सकते हैं,जहां बच्चों को 2018 में न्याय मिल सकता है।
2. हरियाणा, आंध्र प्रदेश, छत्तीेसगढ़ और दादरा और नागर हवेली में बच्चों को 2019 में न्याय मिल सकता है।
3. उत्तर प्रदेश और राजस्था न के बाल यौन शोषण के शिकार बच्चे 2026 में न्यातय की उम्मीरद कर सकते हैं। दिल्ली और बिहार के बच्चों को न्याहय के लिए 2029 तक इंतजार करना पड़ेगा। वहीं, महाराष्ट्र् में इसके लिए बच्चों को 2032 तक इंतजार करना पड़ेगा।
4. केरल के बच्चोंं को 2039 तक, मणिपुर के बच्चों को 2048 तक और अंडमान निकोबार के बच्चों को 2055 तक न्यापय के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
5. गुजरात और अरुणाचल प्रदेश के बच्चों5 को न्यापय के लिए काफी लंबा और दुखद इंतजार करना पड़ेगा। गुजरात में न्या्य के लिए जहां 2071 तक इंतजार करना पड़ेगा, वहीं अरुणाचल प्रदेश में इसके लिए 2117 तक इंतजार करना पड़ेगा।

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शिव कुमार मिश्र

शिव कुमार मिश्र

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