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जानिए वजह, क्यों इस मंदिर में जाने से डरते हैं लोग! बाहर से ही कर लेते हैं प्रणाम

 Vikas Kumar |  2017-01-18 09:20:14.0  |  New Delhi

जानिए वजह, क्यों इस मंदिर में जाने से डरते हैं लोग! बाहर से ही कर लेते हैं प्रणाम

नई दिल्ली : भारत में अनेकों प्राचीन मंदिर है और हरेक मंदिर से जुडी कोई न कोई मान्यता जरूर है। खासकर मंदिरों को लेकर देश में लोग आस्था पर बहुत विश्वास करते और लोगों के मन में बड़ी श्रद्धा रहती है। वैसे तो आपने बहुत से मंदिरों के बारे में सुना होगा। लेकिन क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है जहां मंदिर में जाने से डरते हैं लोग।

जी हां, आज आपको एक ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में बात रहे है जो एक घर की तरह नजर आता है। लेकिन इस मंदिर के पास पहुंच कर भी बहुत से लोग मंदिर के अंदर प्रवेश करने का साहस नहीं जुटा पाते है। आज हम आपको बताते है संसार का ऐसा इकलौता मंदिर है जो धर्मराज यानी यमराज को समर्पित है। ये मंदिर हिमाचल के चम्बा जिले में भरमौर नामक स्थान में स्थित है। इस मंदिर में एक खाली कमरा है जिसे चित्रगुप्त का कमरा माना जाता है। चित्रगुप्त यमराज के सचिव हैं जो जीवात्मा के कर्मो का लेखा-जोखा रखते हैं।



क्या है मान्यताएं

ये मंदिर राजधानी दिल्ली से करीब 500 किलोमीटर दूर हिमाचल के चम्बा जिले में स्थित है। इस मंदिर कि मान्यता है कि जब किसी प्राणी की मृत्यु होती है तब यमराज के दूत उस व्यक्ति की आत्मा को पकड़कर सबसे पहले इस मंदिर में चित्रगुप्त के सामने प्रस्तुत करते हैं। चित्रगुप्त जीवात्मा को उनके कर्मो का पूरा ब्योरा देते हैं इसके बाद चित्रगुप्त के सामने के कक्ष में आत्मा को ले जाया जाता है। इस कमरे को यमराज की कचहरी कहा जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर के चार अदृश्य द्वार भी हैं जो स्वर्ण, रजत, तांबा और लोहे के बने हैं। कहा जाता है कि यहां पर यमराज कर्मों के अनुसार आत्मा को अपना फैसला सुनाते हैं। बता दें गरूड़ पुराण में भी यमराज के दरबार के इन चार द्वारों का उल्लेख किया गया है। यमराज का फैसला आने के बाद यमदूत आत्मा को कर्मों के अनुसार इन्हीं द्वारों से स्वर्ग या नर्क में ले जाते हैं।

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