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अगर बच्चों को बनाना है सफल तो करें इस तरह से उनकी परवरिश

 alok mishra |  2016-09-08 12:59:11.0  |  New Delhi

अगर बच्चों को बनाना है सफल तो करें इस तरह से उनकी परवरिश

आज के दौर में माँ बाप की सबसे बड़ी चिंता ये है की वो अपने बच्चों की परवरिश कैसे करे .अधिकतर माँ बाप इसी उहापोह में रहते है कि वो आज के दर में अपने बच्चों के अंदर संस्कार कैसे डालें ?जिससे उनका बच्चा संस्कारशील बने .

यदि आप मां या पिता बनने का सुख पा रहे हैं या जल्द ही इस सुख से परिचित होने वाले हैं, तो आज हम आपको ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जो बच्चों को लेकर होने वाली आपकी कई सारी चिंताएं खत्म कर सकती हैं।

दरअसल हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा जीवन में तरक्की पाए। उसकी परवरिश वह इस तरह से करना चाहते हैं ताकि आगे चलकर वह सफल लोगों की श्रेणी में शामिल हो सके।
आज जिस तरह की भागदौड़ भरी जिंदगी हम जी रहे हैं, वहां हर कोई चाहता है कि उनका बच्चा किसी से पीछे ना रह जाए। उनका बच्चा पढ़ाई से लेकर खेल-कूद और हर क्षेत्र में आगे होना चाहिए, यही आजकल के अभिभावकों की तमन्ना है।

हम यह मानते हैं कि जिस तरह से हाथ की पांचों अंगुलियां एक जैसी नहीं होतीं, उसी तरह से हर बच्चा हर क्षेत्र में सफल हो यह भी जरूरी नहीं। लेकिन क्या कभी आपके ज़हन में आया है कि सफल बच्चों के पैरेंट्स कुछ तो ऐसे काम करते होंगे जो उनके बच्चों को दूसरों से श्रेष्ठ बनाते हैं?

वे क्या चीजें हैं जो बच्चों को हर क्षेत्र में सफल बनाती हैं, यही हम यहां बताने जा रहे हैं। सफल बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों की परवरिश जिस तरह से करते हैं, हमारा ये लेख आज आपको कुछ ऐसे ही टिप्स देगा जो आपके बच्चों की परवरिश में काम आएंगे ।

इन टिप्स के इस्तेमाल से आप भी अपने बच्चे को दूसरे बच्चों से आगे ले जा सकते हैं। आपका बच्चा स्कूल ही नहीं आस-पड़ोस में भी एक सफल बच्चा कहलाएगा, लोग उसकी तारीफ करेंगे और अन्य बच्चे उससे प्रेरणा लेंगे।

उन्हें काम सौंपे

बच्चे तो बच्चे हैं, इन्हें बस खेलने दें। अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आपको अपनी सोच थोड़ी बदलनी होगी। धीरे-धीरे जब हम एक पौधे को पानी देते हैं, तभी वह एक बड़ा पेड़ बनता है। इसलिए बच्चे भी उम्र के साथ कुछ सीख लें, तो इसमें बुराई क्या है।
एक शोध के अनुसार यदि रोजाना बच्चों को माता-पिता कुछ काम सौंप दें तो उनमें जिम्मेदारी की भावना आती है। उन्हें रोज कोई नया काम करने को कहें, चाहे घर का या बाहर का। काम केवल उनकी पसंद का ही नहीं, आपकी पसंद का भी हो। तभी वे जिम्मेदारी शब्द को समझ सकेंगे।

कुछ उम्मीदें भी रखें

'अपेक्षा' की कोई सीमा नहीं होती, आप चाहें तो यह बढ़ती चली जाएगी लेकिन यदि इस पर रोक लगाएंगे तो यह कुछ समय के लिए रुक भी जाएगी। एक शोध के अनुसार हमें बहुत तो नहीं, लेकिन अपने बच्चों से थोड़ी-बहुत उम्मीद जरूर करनी चाहिए।

शोध से जानिये रोचक तथ्य

इस शोध में यह पाया गया है कि जिन बच्चों के माता-पिता उनकी पढ़ाई को लेकर ज्यादा अपेक्षाएं रखते हैं, वे बच्चे अधिक शिक्षा प्राप्त करते हैं। इन बच्चों की तुलना जब उन बच्चों से की गई जिनके पैरेंट्स नहीं है या उन पर ध्यान नहीं देते, तो यह पाया गया कि पहले वाले बच्चों के क्लास में नंबर ज्यादा अच्छे आते हैं।

उन्हें भावनाओं पर नियंत्रण रखना सिखाएं

जब हम अपने इमोशंस पर कंट्रोल कर लेते हैं तो कई समस्याओं से बाहर निकल आते हैं। यही यदि बचपन से ही बच्चों को सिखाया जाए तो उनकी सफलता का मार्ग आसानी से खुल जाता है। उन्हें गुस्सा कंट्रोल करना सिखाएं, जब किसी मुद्दे पर वे फंस जाएं तो उससे बाहर आने के लिए हिम्मत कैसे जुटाएं, यह भी सिखाएं।

और हार स्वीकार करना भी सिखाएं

सबसे बड़ी बात जो आपके बच्चे को सफल बनाएगी वह है 'हार स्वीकार करना'। यह सच है कि हार में कोई सफलता नहीं है, यह तो असफलता ही है। लेकिन यदि हार को स्वीकार करके दोबारा जंग लड़नी की हिम्मत जुटा ली जाए, तो इससे बड़ी सफलता और कोई नहीं है।

जरूरी है ये सीख

यह छोटा सा लेकिन एक अहम पाठ आप अपने बच्चे को जरूर पढ़ाएं। यदि उसके क्लास में कम नंबर आए तो उसे डांटें नहीं, वह किसी खेल में हार गया तो अगली बार के लिए कैसे खुद को सक्षम बनाए, यह भी उसे सिखाइए। उसकी हार के लिए कभी उसे शर्मिंदा ना होने दें।

कुछ बातें सिखाएं

अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा जीवन में सफल हो तो उसे लोगों से मिलना-जुलना सिखाएं, बात करना सिखाएं, उसे वह तहज़ीब सिखाएं कि वह समाज में अपनी एक अलग तस्वीर बना सके।

उसके साथ वक्त बिताएं

बच्चे बस अपनी पढ़ाई करें, समय से खाना खाएं और खेल-कूद में भी हिस्सा लें... यह हर माता-पिता की चाहत है। लेकिन इसके अलावा हर अभिभावक को वक्त निकालकर अपने बच्चे के पास बैठना चाहिए, उससे बात करनी चाहिए।

उनसे बात करें

बच्चा चाहे 2 वर्ष की आयु का हो या 15 की, माता-पिता को दिन में एक बार उसके पास बैठकर उससे बात करनी चाहिए। कई बार बच्चे परेशानी में होते हैं लेकिन बातें शेयर नहीं करते, और यही बच्चे उस परेशानी के और बढ़ जाने पर अंदर ही अंदर घुटने लगते हैं।

उनके जीवन के बारे में जानिए

इसलिए यह माता-पिता की जिम्मेदारी है कि समय से अपने बच्चे के जीवन में चल रही हलचल के बारे में जान लें। ताकि आगे चलकर बच्चे को किसी बड़ी मुसीबत का सामना ना करना पड़े। और सबसे जरूरी बात यह है कि हमें बच्चों के 'दोस्त' भी बनना चाहिए.

उन्हें साहसी बनाएं

यह बहुत से पैरेंट्स की शिकायत होती है कि उनके बच्चे खुद आगे बढ़कर किसी काम में हिस्सा नहीं लेते। शायद उनमें वह क्षमता नहीं कि वह कुछ कर सकें, क्या यही बात है?

उनमें परिस्थिति से लड़ने की ताकत आएगी

शायद नहीं... कुछ बच्चों में परिस्थिति से लड़ने की ताकत नहीं होती। वह कई चीजों की ख्वाहिश रखते हैं, लेकिन उसे कैसे पाया जाए यह नहीं जानते। रिसर्च कहती है कि जिन बच्चों के माता-पिता उनके साथ वक्त बिताते हैं, उन्हें परिस्थितियों से लड़ना सिखाते हैं, वे बच्चे आगे चलकर काफी कुशल बनते हैं।

उनमें वह जोश भरिये

ये वे बच्चे होते हैं जो दिमाग से किए जाने वाले कामों में आगे होते हैं। क्योंकि इनका दिमाग हर तरह का प्रेशर झेल लेता है और काफी तेजी से चलता है।

जल्दी ना करें

एक रिसर्च में यह पाया गया है कि उन अभिभावकों की संख्या काफी अधिक है जो अपने बच्चों को लेकर आ रही परेशानियों का जल्द से जल्द समाधान पा लेते हैं। यह अच्छी बात है कि वे प्राब्लम्स को जल्दी सुलझा लेते हैं, लेकिन इसके चलते वे काफी सारी चीजें पीछे छोड़ जाते हैं।

बात की गहराई में जाएं

केवल उस विशेष परिस्थिति को तो वे संभाल लेते हैं, लेकिन उसका भविष्य में उनके बच्चे पर क्या असर होगा यह नहीं जानते। जरा आप भी सोचिये, आपके साथ भी ऐसा कई बार हुआ होगा।

आखिर में याद रखें ये सीख

सभी बच्चे कुछ ना कुछ गलती करते हैं, लेकिन क्या आप उनकी गलती के अनुसार उन्हें सजा देते हैं? कहीं उससे कम या अधिक सजा के भागी तो नहीं बनते आपके बच्चे?

सबसे जरूरी बात

रिसर्च के अनुसार जब हम बच्चों की गलती के अनुसार उन्हें कम सजा देते हैं तो वे माता-पिता को हल्के में लेने लगते हैं। लेकिन यदि गलती से बढ़कर सजा दे दी जाए तो इसका प्रभाव कम सजा दिये जाने से काफी अधिक होता है।

जरूर ध्यान देंं इस बात पर

कड़ी सजा देने पर वे मायूस हो सकते हैं, कुछ बच्चे हठी भी बन सकते हैं और कुछ माता-पिता के विरुद्ध भी हो जाते हैं। इसलिए सजा देने से पहले समझदारी से काम लें और जहां तक संभव हो एक दोस्त की हैसियत से उसे हल करें।

तो आप लोग अब समझ गए होंगे कि हमे अपने बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए जिससे हमारा बच्चा सभी क्षेत्रो में आगे बढ़ सके । और अपने जीवन में आगे बढ़ सके ।


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