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आज होगी मां महागौरी की पूजा, मां को ऐसे करें प्रसन्न पढ़ें- पूजा विधि

 Arun Mishra |  2017-04-04 04:03:27.0  |  New Delhi

आज होगी मां महागौरी की पूजा, मां को ऐसे करें प्रसन्न पढ़ें- पूजा विधि

नवरात्र के आठवें दिन आठवीं दुर्गा यानि की महागौरी की पूजा अर्चना और आराधना की जाती है। कहते हैं अपनी कठीन तपस्या से मां ने गौर वर्ण प्राप्त किया था। तभी से इन्हें उज्जवला स्वरूपा महागौरी, धन ऐश्वर्य प्रदायिनी, चैतन्यमयी त्रैलोक्य पूज्य मंगला, शारीरिक मानसिक और सांसारिक ताप का हरण करने वाली माता महागौरी का नाम दिया गया।

श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः । 
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा ।।

देवी दुर्गा के नौ रूपों में महागौरी आठवीं शक्ति स्वरूपा हैं। दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है।महागौरी आदी शक्ति हैं। इनके तेज से संपूर्ण विश्व प्रकाश-मान होता है।इनकी शक्ति अमोघ फलदायिनी है। देवी महागौरी की अराधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और देवी का भक्त जीवन में पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी बनता है। 

माता महागौरी की महिमा
दुर्गा पूजा के अष्टमी तिथि को मां दुर्गा की आठवीं शक्ति यानी कि देवी महागौरी की पूजा का विधान है। श्रीदेवीमहापूराण में विदित है कि माता पार्वती ने शिवजी को पति रूप में पाने हेतु अत्यन्त कठोर तपस्या की थी।जिससे उनका रंग एकदम काला पड़ गया था।उनकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनके ऊपर गंगाजल का छिड़काव किया।जिससे माता का रंग विद्युत प्रभा के समान अत्यन्त कांतिमान गौर हो उठा।तभी से इनका नाम महागौरी पड़ा।वेत वर्णा देवी महागौरी के समस्त वस्त्र एवं आभुषण वेत रंग के हैं।इनकी चार भुजाएं हैं,इनके ऊपर का दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है,और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशुल है।ऊपर वाले बायें हाथ में डमरू और नीचे का बाया हाथ वर मुद्रा में है।माता महागौरी का वाहन वृषभ है।अत्यन्त शांत रहने वाली माता महागौरी की उपासना से भक्तों के सभी पाप संताप और दु:ख स्वयं नष्ट हो जाते हैं।वह सभी प्रकार से अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है।

महागौरी मंत्र 
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। 

दुर्गा सप्तशती में शुंभ निशुंम्भ से पराजित होकर गंगा के तट पर जिस देवी की प्रार्थना देवतागण कर रहे थे वो महागौरी हैं।देवी गौरी के अंश से ही कौशिकी का जन्म हुआ। जिसने शुंम्भ निशुंम्भ के प्रकोप से देवताओं को मुक्त कराया।यह देवी गौरी शिव की पत्नी हैं।यही शिवा और शाम्भवी के नाम से भी पूजी जाती हैं।

महागौरी रूप में देवी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल दिखती हैं।देवी के इस रूप की प्रार्थना करते हुए देव और ऋषिगण कहते हैं-
ॐसर्वमंगल मांगल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते ।। 

माता महागौरी ध्यान मंत्र 

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥

पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥

पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर किंकिणी रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥

प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वाधरां कातं कपोलां त्रैलोक्य मोहनम्।
कमनीया लावण्यां मृणांल चंदनगंधलिप्ताम्॥ 

मनोकामना
महागौरी की आराधना से किसी प्रकार के रूप और मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है और जीवन की अनेक समस्याओं एवं परेशानियों का नाश होता है। मां महागौरी के प्रसन्न होने पर भक्तों को सभी सुख स्वत: ही प्राप्त हो जाते हैं। साथ ही इनकी भक्ति से हमें मन की शांति भी मिलती है।

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