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अब लोकसभा चुनाव के साथ हो सकता है इन राज्यों में चुनाव, विपक्ष के उड़े होश

आने वाले लोकसभा चुनावों और उसके बाद छह महीनों में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों को साथ करवाया जा सकता है।

 शिव कुमार मिश्र |  2017-08-14 02:48:12.0

अब लोकसभा चुनाव के साथ हो सकता है इन राज्यों में चुनाव, विपक्ष के उड़े होश

अधिक से अधिक राज्यों में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव करवाए जाने की संभावनाओं पर सरकारी हलकों में चर्चा होनी शुरू हो गई है। इसमें कुछ राज्यों मे विधानसभा चुनावों के साथ ही लोकसभा चुनाव करवाए जाने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इसमें तालमेल बैठाने के लिए अगले लोकसभा चुनाव नवंबर-दिसंबर 2018 में भी करवाए जाने पर विचार किया जा रहा है।

देश में लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव साथ कराए जाने की मांग लगातार की जाती है। नरेंद्र मोदी सरकार भी ऐसा कराए जाने की बात कह चुकी है। अब लगता है कि अगले साल ही ऐसा हो सकता है। अगले साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि लोकसभा चुनाव भी इनके साथ ही करवाए जा सकते हैं।
यह चर्चा एक अनौपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि लोकसभा और राज्य विधानसभा के चुनाव साथ कैसे करवाए जा सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी भी कई बार यह राय जाहिर कर चुके हैं कि लगातार होने वाले विधानसभा चुनावों से न सिर्फ सरकार की कार्यप्रणाली पर असर पड़ता है बल्कि इससे देश पर आर्थिक भार भी पड़ता है।

सूत्रों का कहना है कि इस राजनीतिक परिवर्तन को समझने के लिए लोकसभा के पूर्व सेक्रटरी जनरल सुभाष सी कश्यप और कई सचिवों की राय जानने की कोशिश की जा रही है।
मौजूदा प्रावधान, जिसके अनुसार चुनाव तय समय से छह महीने पहले तक करवाए जा सकते हैं, की जांच की जा चुकी है। इसके अनुसार इसमें बदलाव के लिए संविधान में संशोधन जैसे जटिल रास्तों की जरूरत नहीं पड़ेगी।
संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा, 'आने वाले लोकसभा चुनावों और उसके बाद छह महीनों में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों को साथ करवाया जा सकता है। संविधान में ऐसा प्रावधान है कि तय समय से 6 महीने पहले तक चुनाव करवाए जा सकते हैं। यह काम चुनाव आयोग कर सकता है। इसके लिए किसी संविधान संशोधन की जरूरत नहीं पड़ेगी।'
हालांकि सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक रूप से आम सहमति बनाने की होगी। अगले लोकसभा चुनाव अप्रैल 2019 में होने हैं। इन्हें मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के साथ करवाया जा सकता है। इनमें मिजोरम को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में बीजेपी सत्ता में है। इन सभी राज्यों की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2018 में समाप्त हो रहा है।
इसके अलावा अगर राजनीतिक दलों में सहमति बनती है तो तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में भी विधानसभा चुनाव भी इन चुनावों के साथ करवाए जा सकते हैं। इन राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल भी अप्रैल 2019 तक है।
ओडिशा में बीजेडी के लिए लोकसभा चुनावों के साथ राज्य विधानसभा चुनाव होना फायदेमंद रहा है। आंध्र प्रदेश में 2014 में राज्य और लोकसभा चुनाव एक साथ हुए। मोदी लहर का फायदा यहां टीडीपी को मिला। वहीं तेलंगाना में अगर टीआरएस के साथ राजनीतिक गठबंधन हो जाता है तो संभव है कि वह भी समय से पहले चुनाव करवाने को राजी हो जाए।
प्रधानमंत्री कई मौकों पर दोनों चुनावों को साथ करवाने की बात कह चुके हैं। उनका कहना है कि इसके लिए बीजेपी और विपक्ष दोनों को कुछ त्याग करे होंगे। मोदी कह चुके हैं कि इसे संभव बनाने के लिए एक से अधिक पार्टियों को इसके लिए साथ आना होगा।
कश्यप का मानना है कि यह एक बार में संभव होना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि सभी राज्य सरकारों को इसके लिए राजी करना संभव नहीं है। पार्टियां अपने हिस्से का कार्यकाल छोड़ने पर इतनी आसानी से राजी नहीं होंगी। उन्होंने कहा, 'अगर कुछ राज्यों में एक साल के भीतर चुनाव होने हैं, और अगर राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार है तो राज्य सरकार विधानसभा भंग करके जल्द चुनाव करवा सकती हैं।' अगर इस प्रक्रिया को अगले लोकसभा चुनावों से लागू कर दिया जाए तो 10 साल में ज्यादातर राज्यों में विधानसभा चुनाव लोकसभा के साथ ही होंगे।

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