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मोदी सरकार के इस फैसले पर उठने लगे हैं सवाल

 Special Coverage News |  2016-12-18 08:06:14.0  |  New Delhi

मोदी सरकार के इस फैसले पर उठने लगे हैं सवाल

नई दिल्ली: नोटबंदी के बाद सियासी दलों के खातों में चाहे जितनी भी रकम जमा हुई हो, उसकी जांच नहीं की जाएगी। मोदी सरकार के इस फैसले पर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व चीफ इलेक्शन कमिश्नर एसवाई कुरैशी ने कहा- जब सरकार रिक्शेवाले, सब्जीवाले और मजदूर तक से उसकी इनकम का हिसाब मांग रही है तो सियासी दलों से क्यों नहीं? फेसबुक पर पोल कराया गया इसमें 10000 से ज्यादा लोगों ने कमेंट किया। 9000 बोले सरकार का फैसला गलत

हालांकि, अरुण जेटली ने रियायत देने वाली खबरों को नकारा था। राजनीतिक दलों को सिर्फ उस लेन-देन का ब्योरा चुनाव आयोग के समक्ष पेश करना होता है, जो 20 हजार या उससे ज्यादा हो। इसी का लाभ उठाकर तमाम राजनीतिक दलों पर कालेधन को सफेद करने और चुनावों में बेहिसाब कालाधन खर्च करने के आरोप लगते रहे हैं। राजनीतिक दलों को मिलने वाला चंदा इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 13A के तहत आता है और इसके प्रावधानों में किसी तरह का बदलाव नहीं है।

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