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इरोम, सोनी सोरी, दयामनी और मेधा पाटेकर समाज के हितैषी चुनाव क्यों हारी?

 शिव कुमार मिश्र |  2017-03-14 02:50:54.0  |  नई दिल्ली

इरोम, सोनी सोरी, दयामनी और मेधा पाटेकर समाज के हितैषी चुनाव क्यों हारी?

इरोम शर्मिला, मेधा पाटेकर , सोनी सोरी , दयामनी बारला जैसी समाज के हित के लिए अपने जीवन का सर्वश्व जन हित में समर्पित करने के बाद जनता ने चुनाव में नकार दिया आखिर क्यों? इस बारे में एक पुरानी कहानी है उसे उसे आप पढ़ लें उत्तर आपको मिल जायेगा. इरोम शर्मिला को मात्र 90 वोट मिलना क्या माना जाय.


ईरोम शर्मिला चुनाव हार गई,

सोनी सोरी चुनाव हार गई,

दयामनी बारला चुनाव हार गईं,

मेधा पाटकर चुनाव हार गईं,


खलील जिब्रान की एक कहानी में उन्होंने लिखा है कि मैंने जंगल में रहने वाले एक फ़कीर से पूछा कि आप इस बीमार मानवता का इलाज क्यों नहीं करते . तो उस फ़कीर ने कहा कि तुम्हारी यह मानव सभ्यता उस बीमार की तरह है जो चादर ओढ़ कर दर्द से कराहने का अभिनय तो करता है. पर जब कोई आकर इसका इलाज करने के लिये इसकी नब्ज देखता है तो यह चादर के नीचे से दूसरा हाथ निकाल कर अपना इलाज करने वाले की गर्दन मरोड़ कर अपने वैद्य को मार डालता है और फिर से चादर ओढ़ कर कराहने का अभिनय करने लगता है .


धार्मिक, जातीय घृणा, रंगभेद और नस्लभेद से बीमार इस मानवता का इलाज करने की कोशिश करने वालों को पहले तो हम मार डालते हैं . उनके मरने के बाद हम उन्हें पूजने का नाटक करने लगते हैं .

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