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10 फरवरी को है माघ पूर्णिमा ,जाने कैसे करे माघ पूर्णिमा को पूजा ?

 Alok Mishra |  2017-02-09 07:08:00.0  |  new delhi

10 फरवरी को है माघ पूर्णिमा ,जाने कैसे करे माघ पूर्णिमा को पूजा ?

माघ पूर्णिमा

हिंदू धर्म में अमावस्या और पूर्णिमा तिथियों का अहम महत्व होता है। चंद्रमा के आधार पर आधारित यह दिन हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए अहम माने गए हैं। साल में 12 पूर्णिमा होती है जिनमें से पहली अहम पूर्णिमा होती है माघ पूर्णिमा। आज हम आपको बताएंगे क्यों होती है माघ पूर्णिमा विशेष और इस दिन किस तरह पूजा करनी चाहिए?

नारद पुराण, मत्स्य पुराण सहित कई धर्म ग्रंथों में माघ पूर्णिमा के महत्व पर जोर दिया गया है। नारदपुराण के अनुसार इस दिन व्रत रखने वाले जातक को भगवान विष्णु जी का आशीष प्राप्त होता है और उस के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं एवम वह मोक्ष को प्राप्त कर लेता है। इस वर्ष माघ पूर्णिमा का व्रत 10 फरवरी को रखा जाएगा।

माघ पूर्णिमा एक और कारण से बेहद अहम होती है और वह कल्पवास की समाप्ति। माघ मास में कई श्रद्धालु तपस्या पर जाते हैं और पूर्णिमा के दिन वापस आते हैं। एक माह तक परिवार से दूर रहने के बाद उनसे मिलन का त्यौहार है माघ पूर्णिमा।

स्नान का महत्व

माघ पूर्णिमा या माघी पूर्णिमा के शुभ दिन संगम या किसी पुण्य स्थान पर स्नान करना चाहिए। अगर संभव ना हो तो घर में भी स्नान किया जा सकता है।

इस बात को समझने के लिए एक श्लोक पर ध्यान देना आवश्यक है: मासपर्यन्त स्नानासम्भवे तु त्रयहमेकाहं वा स्नायात्‌। अर्थात् "जो लोग लंबे समय तक स्वर्गलोक का आनंद लेना चाहते हैं, उन्हें माघ मास में सूर्य के मकर राशि में स्थित होने पर अवश्य तीर्थ स्नान करना चाहिए।"

माघ व्रत कथा

एक कथा के अनुसार "कांतिका" नगर में एक नि: संतान ब्राह्मण रहता था। बहुत उपाय किया लेकिन उसकी पत्नी को संतान प्राप्ति नहीं हुई। तब उसे एक ब्राह्मण ने उपाय बताया कि चंद्रिका देवी की पूजा करने से उसे संतान प्राप्ति हो जाएगी।

चंद्रिका देवी ने ब्राह्मण को संतान प्राप्ति का वर दिया और कहा कि कर्क पूर्णिमा (माघी पूर्णिमा) तक प्रतिदिन आटे से बना दीप जलाओं और उसमें एक-एक दीप की वृद्धि करते रहना।
इस तरह पूर्णिमा तक व्रत करने से ब्राह्मण को संतान प्राप्ति तो हुई लेकिन संतान अल्पायु थी। लेकिन व्रत के प्रभाव से समय आने पर काल भी ब्राह्मण के पुत्र के प्राण ना हर सके।

माघ पूर्णिमा व्रत विधि

नारद पुराण में माघ पूर्णिमा व्रत की पूर्ण विधि बताई गई है जिसके अनुसार इस दिन जातक को व्रत कर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। पूर्णिमा के दिन दान करने से पुण्य प्राप्त होता है। तिल, सूती कपड़े, कम्बल, रत्न, कंचुक, पगड़ी, जूते आदि दान देना पूर्णिमा के दिन सर्वथा शुभ माना गया है। इस दिन सत्यनारायण भगवान की पूजा का भी विधान है।

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