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श्री गुरू गोबिंद सिंह जी का 350वां प्रकाश पर्व : जानिए क्यों मनाया जाता है गुरु पर्व

 Arun Mishra |  2017-01-05 08:18:47.0  |  नई दिल्ली

श्री गुरू गोबिंद सिंह जी का 350वां प्रकाश पर्व : जानिए क्यों मनाया जाता है गुरु पर्व

नई दिल्ली : देश भर में आज गुरु गोविंद सिंह जी का 350 वां प्रकाश पर्व शहर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सिख समुदाय के दसवें धर्म-गुरु (सतगुरु) गोविंद सिंह जी का जन्म पौष शुदि सप्तमी संवत 1723 (22 दिसंबर, 1666) को पटना शहर में गुरु तेग बहादुर और माता गुजरी के घर हुआ। सिख समुदाय के बीच गुरु गोविंद सिंह के जन्म उत्सव को 'गुरु गोविंद जयंती' या 'गुरु पर्व' के रूप में मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर गुरुद्वारों में भव्य कार्यक्रम सहित गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ किया जाता है। सामूहिक भोज (लंगर) का आयोजन किया जाता है। 5 जनवरी को है। गुरु की जयंती को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है।

खालसा पंथ की स्थापना की थी: हिंदी कलेंडर के हिसाब से गुरु गोविंद सिंह की जयंती इस साल 5 जनवरी को मनाई जा रही है। पटना साहिब (जन्म स्थल), आनंदपुर साहिब (गुरुद्वारा केशगढ़) आदि स्थानों पर गुरु गोविंद सिंह जयंती बेहद धूमधाम से मनाई जाती है। गुरु गोविंद सिंह जी का यह 350 वां प्रकाश पर्व है। इसके तहत गुरुद्वारों में विशेष साज-सज्जा की जाती है। इस दिन सुबह से ही गुरुद्वारों में धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू होकर देर रात तक चलता है। इसके तहत गुरुवाणी का पाठ, शबद कीर्तन किया जाता है। खालसा पंथ के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। गुरु गोविंद सिंह जी को सिख धर्म का सबसे वीर योद्धा और गुरु माना जाता है। गुरुजी ने निर्बलों को अमृतपान करवा कर शस्त्रधारी कर उनमें वीर रस भरा। उन्होंने ही खालसा पंथ में 'सिंह' उपनाम लगाने की शुरुआत की।

बचपन में इन्हें सभी प्यार से 'बाला प्रीतम' कह कर पुकारते थे लेकिन इनके मामा इन्हें गोविन्द की कृपा से प्राप्त मानकर गोविन्द नाम से पुकारते थे। गोविन्द जी का पूरा बचपन बिहार में बीता। जब 1675 में पिता तेगबहादुर जी ने दिल्ली में हिंदू धर्म की रक्षा के लिए लिए अपनी जान की कुरबानी दे दी तो उसके बाद मात्र नौ वर्ष की उम्र में गोविन्द जी ने गुरु की गद्दी धारण की। गुरु गोविन्द सिंह जब पैदा हुए थे उस वक्त उनके पिता तेग बहादुर बंगाल में थे। उन्होंने अपने बेटे का नाम गोविन्द राय रखा था। उसके बाद सन 1699 को बौसाखी वाले दिन गुरुजी पंज प्यारों से अमृत ठक कर गोविन्द राय से गोविन्द सिंह जी बन गए। उनके दरबार में 52 कवियों तथा लेखकों की उपस्थिति रहती थी, इसीलिए उन्हें 'संत सिपाही' भी कहा जाता था।

वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी आज श्री गुरु गोविंद सिंह जी के 350वें प्रकाशोत्सव में भाग लेने पटना पहुँच चुके हैं। पीएम मोदी दोपहर में गांधी मैदान में आयोजित एक रैली को संबोधित भी करेंगे। इसके बाद pm मोदी CM नीतीश कुमार के साथ लंच करेंगे।

बता दें कि 350वें प्रकाशोत्सव के मौके पर बिहार कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की तरफ से राजधानी में बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया है। पीएम मोदी के आगमन को लेकर गांधी मैदान की सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई है। गांधी मैदान को किले में तब्दील कर दिया गया है।


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