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मकर संक्रांति पर अति दुर्लभ निराला संयोग, स्नान, दान का विशेष महत्व

 Special Coverage News |  2017-01-13 12:34:09.0  |  new delhi

मकर संक्रांति पर अति दुर्लभ निराला संयोग, स्नान, दान का विशेष महत्व

नई दिल्ली : ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। इस दिन सूर्य, शनि की राशि मकर में प्रवेश करके दो माह तक शनि की दो राशियों मकर व कुंभ में रहते हैं। मकर राशि में आने पर इसे मकर संक्रांति कहते हैं। सूर्य के उत्तरी गोलार्ध की ओर आने के परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर माना जाता है।

इसी दिन से धनुमास व दक्षिणायन समाप्त होता है तथा शुभ माह उत्तरायण के प्रारंभ होने के कारण इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि का विशेष महत्व है। शनिवार 14.01.17 को मकर संक्रांति पुण्यकाल मुहूर्त प्रातः 07:50 से प्रारंभ होकर सांय 17:41 तक रहेगा। संक्रांति लाल वस्त्र धारण करके आएगी। लगभग 3 दशकों बाद मकर संक्रांति पर अति दुर्लभ निराला संयोग गज-करण होने से "हाथी" पर चढ़कर आएगी व वणिज-करण रहने से बैल पर बैठकर विदाई लेगी।

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