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अखिलेश के युवा साथियो का ऐलान ,अखिलेश के एक इशारे पर दे देंगें जान

 आलोक मिश्रा |  2016-10-19 10:41:35.0  |  New delhi

अखिलेश के युवा साथियो का ऐलान ,अखिलेश के एक इशारे पर दे देंगें जान

सपा की यूथ बिग्रेड ने सपा सुप्रीमो और पार्टी को अपने तेवरो की वजह से सकते में दाल दिया है । यूथ बिग्रेड के नेताओं ने खत लिखकर ये बात साफ़ करदी है कि यदि मुख्यंत्री अखिलेश यादव के समर्थन में नारे बाजी करने वाले नेताओं की पार्टी में ससम्मान वापसी नही हुई तो वह रजत जयंती समारोह में भाग नहीं लेंगें । यूथ बिग्रेड के इस कदम से पार्टी को समझ आगया है कि मुख्यमंत्री अखिलेश अब वह नहीं रह गए है कि जिनके लिए कुछ भी कहा जाएगा ,और वह चुपचाप सुन लेंगे । इससे साफ़ जाहिर होता है कि युवा नेताओं के यह तेवर पार्टी के लिए घोर संकट है । प्रदेश में सबसे ज्यादा युवा वोटर है और अखिलेश इन युवाओं के निर्विवाद नेता है ।


युवा नेताओं के ऐसे बयान भी आ रहे है । जिनसे लगता है कि अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में युवाओं के दिल में गहरी पैठ बना ली है ।


मुख्यमंत्री के इशारे पर दे सकते है जान :सुनील साजन


पार्टी से बर्खास्त विधान परिषद् सदस्य सुनील साजन का कहना है कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव हमारे आदर्श है ,मगर हम अपना नेता अखिलेश यादव को ही मानते है । सुनील साजन का कहना है कि हमने पार्टी को सत्ता में लाने के लिए सड़कों पर लाठियां खाई है ,मगर हमको इस बात की ख़ुशी है कि आज देश भर में लोग हमारे मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री पद का योग्य प्रत्याशी मानते है । अखिलेश यादव से बेहतर साफ सुथरी छवि और विकास की बात करने वाला कोई दूसरा नेता नहीं है। हम अपने नेता के एक इशारे पर अपनी जान दे सकते हैं। हमको पार्टी में रखा जाए या न रखा जाए ये फैसला पार्टी के हाईकमान का है। हम सब अपने नेता को दुबारा सीएम बनाने के लिए अपनी पूरी जान लगा देंगे।


सीएम के अधिकारों में कटौती का करते रहेंगे विरोध:उदयवीर


विधान परिषद सदस्य उदयवीर सिंह ने कहा है कि किसी भी कीमत पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अधिकारों में कटौती और उनके सम्मान में कोई कमी होने पर हमारा विरोध हर स्तर पर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि हमने सपा के रजत जयंती कार्यक्रम का बहिष्कार इसीलिए किया क्योंकि बेवजह हमारे ऐसे साथियों को पार्टी से निकाल दिया गया, जिन्होंने अपनी जान खतरे में डाल कर पार्टी को इतनी मजबूत स्थिति में पहुंचाया। उन्होनें कहा कि गांधी से लेकर लोहिया तक सभी कहते थे कि अपना विरोध लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए। हम वही तरीका अपना रहे हैं और कुछ गलत नहीं कर रहे हैं।


दरअसल, लंबे समय से पार्टी में ऐसे फैसले हो रहे हैं, जिससे साफ संदेश जा रहा है कि पार्टी में अखिलेश यादव की हैसियत कम की जा रही है। सपा की यूथ ब्रिगेड को इसी बात का दर्द है कि पूरा चुनाव सिर्फ अखिलेश यादव की छवि पर जीता गया। यह अखिलेश यादव के काम का ही नतीजा है कि कुछ महीने पहले पार्टी सर्वे में नंबर वन की स्थिति में थी।

यूथ ब्रिगेड के लोग इस बात से भी नाराज है कि अखिलेश की साफ सुथरी छवि को मुख्तार अंसारी जैसे माफियाओं और अमनमणि त्रिपाठी जैसे विवादित लोगों को पार्टी में लाकर खराब किया जा रहा है। जाहिर है यह यूथ ब्रिगेड अपने नेता की छवि पर किसी तरह का दाग लगने देने को तैयार नहीं है।


सपा मुखिया ने जब पार्टी की रजत जयन्ती मनाने का ऐलान किया था और उसका संयोजक गायत्री प्रजापति को बनाया था तभी यह बात साबित हो गई कि यह काम अखिलेश यादव को चिढ़ाने के लिए किया गया है। अखिलेश यादव ने भ्रष्टïाचार के आरोप में गायत्री प्रजापति को बर्खास्त किया था। बाद में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने दबाव डालकर गायत्री को फिर मंत्री बनवा दिया था। अखिलेश की टीम इस बात से बेहद आहत है कि जिन युवा नेताओं ने खुलकर अखिलेश यादव के समर्थन में नारेबाजी की तो उनको पार्टी से निकाल दिया गया। इन नेताओं का कहना था कि उन्होंने किसी के विरोध में नारेबाजी नहीं की थी बल्कि अखिलेश यादव के समर्थन में की थी। सीएम के बेहद करीबी विधान परिषद सदस्य सुनील साजन और आनन्द भदौरिया पहले से पार्टी के कुछ लोगों के निशाने पर हैं। इन लोगों को लगता है कि ये नेता पार्टी में सिर्फ अखिलेश यादव को ही मानते हैं। एक बार पहले भी इन नेताओं को पार्टी से बर्खास्त किया गया था। इसके बाद नाराज सीएम सैफई महोत्सव में नहीं गए थे, जिससे हंगामा मच गया था। बाद में इन नेताओं के पार्टी में वापस आने की शर्त मानने के बाद ही सीएम सैफई गए थे।



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