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भ्रष्टाचार को लेकर सरकार सख्त ,फिर भी हो रही है गाज़ियाबाद में अवैध वसूली

 Alok Mishra |  2017-04-27 12:00:54.0  |  new delhi

भ्रष्टाचार को लेकर सरकार सख्त ,फिर भी हो रही है गाज़ियाबाद में अवैध वसूली

ग़ाज़ियाबाद : यूपी में सरकार बदली है , मगर हालात नहीं .जी हाँ आज हम एक ऐसी अवैध वसूली के बारे में बताने जा रहे है .जोकि कई सालों से चलती आ रही है ,
सरकारें बदली कई अधिकारियों का तबादला हुआ लेकिन अवैध वसूली जस के तस रही .इनपे कोई कार्यवाही क्यों नहीं होती ?
जी हाँ हम बात कर रहे है ,ग़ाज़ियाबाद के इंद्रापुरम, वसुंधरा और वैशाली में लगने वाली साप्ताहिक बाजार की .इन सभी बाजारों में लाखों लाखों की अवैध उगाही जारी है ,किसी दुकानदार से 120 तो किसी से 100 और किसी से 80 रुपया लिए जाते है .

इंद्रापुरम में लगने वाली सबसे बड़ी साप्ताहिक बाजार जो मंगल बाजार है .इसमें दुकानों की संख्या बताये तो लगभग 1000 से 1500 तक होगी .
आप खुद ही अंदाजा लगा सकते है कि इस बाजार में कितनी उगाही हो रही है .दुसरी बात आपको बता दें इंद्रापुरम में ही लगने वाली शनि बाजार जोकि मकनपुर चौराहे से आगे तक लगती है .इसमें भी लगभग हजार दुकाने है .और इंद्रापुरम में ही लगने वाली सोम बाजार इसमें भी लगभग दुकानों की संख्या 500 होगी ,आगे बताते चले कि इंद्रापुरम के पास ही वसुंधरा है ,वहां भी साप्ताहिक बाजार लगती है .जैसे सबसे बड़ी बाजार इतवार बाजार है ,उसमे लगभग दुकानों की संख्या एक हजार से अधिक है . वहीं सोम बाजार और बुध बाजार ,बीर बाजार की बात करे तो सभी बाजारों में दुकानों की संख्या लगभग 500 से 1000 के बीच है .इन सभी बाजारों में खुली अवैध उगाही जारी है .

ना किसी का डर ना ही किसी से खतरा ,दुकानदारों से डरा धमका कर लिए जाते है पैसे ,जब हमारी स्पेशल कवरेज न्यूज की टीम जायजा लेने पहुंची मंगल बाजार .जहां दुकानदारों से पूछताछ करने पर दुकानदारों ने बताया कि अभी भी उगाही के पैसे वसूल रहे है .

हमने उनसे पूछा कि पैसे क्यों वसूल रहे है ?तो उन्होंने जवाब दिया कि ऊपर तक पैसा जाता है ,अगर नहीं दोगे तो आगे से दूकान नहीं लगाने देंगे . हमने जब पता किया तो हमे पता लगा कि इन सभी बाजारों का एक ही ठेकेदार है ,जिसका नाम अमित त्यागी बताते है . और उसके नीचे पांच छह लड़के उगाही का काम करते है ,एक का नाम सैंकी है .
हालांकि ये खेल गाज़ियाबाद प्रशासन की जानकारी में खेला जा रहा है . दुकानदारों से निगम और सफाई के नाम से पैसे वसूले जा रहे है .




रिपोर्ट : रामअवध भगत





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