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सौम्या रेप-मर्डर केस: दोषी गोविन्दाचामी की फांसी की सजा निरस्त

 Vikas Kumar |  2016-09-15 08:53:34.0  |  Kerala

सौम्या रेप-मर्डर केस: दोषी गोविन्दाचामी की फांसी की सजा निरस्त

नई दिल्ली: गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सौम्या रेप-मर्डर केस के दोषी गोविन्दाचामी को हत्या के अपराध से दोषमुक्त करते हुए उसकी फांसी की सजा को निरस्त कर दिया। लेकिन न्यायालय ने उसे बलात्कार का दोषी करार करते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति पी सी पंत और न्यायमूर्ति यू यू ललित की पीठ ने केरल उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ गोविन्दाचामी की अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए उसके विरुद्ध हत्या का अपराध समाप्त कर दिया। इसके साथ ही न्यायालय ने हत्या के लिए उसे दी गई फांसी की सजा भी निरस्त कर दी।

पीठ ने एक फरवरी 2011 की इस घटना में अपीलकर्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत बलात्कार का दोषी जरूर ठहराया और इसके लिए उसे सात साल की सश्रम कारावास की सजा भी सुनाई।

जानें क्या है मामला
यह घटना उस वक्त घटी थी जब सौम्या एमजी एर्नाकुलम-शोरनुर सवारी गाड़ी से कोच्चि से शोरनुर लौट रही थी। सौम्या को महिला डिब्बे में अकेली देख बलात्कार एवं लूटपाट के इरादे से गोविंदाचामी उसमें घुस गया था। गोविंदाचामी की बदनीयत कोशिश का सौम्या ने पुरजोर विरोध किया था और इसी धक्कामुक्की में वह ट्रेन से गिर भी गयी थी। अपराधी भी ट्रेन से कूद गया और लौटकर वहां पहुंच गया जहां सौम्या बेहोश पड़ी थी। वह पीड़िता को लेकर सूनसान स्थान पर गया और उसके साथ दुष्कर्म किया तथा उसका मोबाइल भी लूट लिया। बाद में सौम्या को बेहोशी की हालत में त्रिशूर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, जहां पांच दिन बाद छह फरवरी 2011 को उसकी मौत हो गयी।


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