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पीएम मोदी हैं प्रधान सेवक तो सीएम योगी कॉमन मेंन - शलभ मणि

 शिव कुमार मिश्र |  2017-04-21 10:55:22.0  |  लखनऊ

पीएम मोदी हैं प्रधान सेवक तो सीएम योगी कॉमन मेंन - शलभ मणि

लखनऊ :भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा है कि वाहनों से लाल नीली बत्तियाँ हटा कर भाजपा सरकार ने आम और खास आदमी का फर्क मिटा दिया है। ये फैसला वीआईपी कल्चर खत्म करने में मील का पत्थर साबित होगा। इस फैसले से देश और प्रदेश में असल समाजवाद कायम होगा और समाज का आखिरी व्यक्ति भी खुद को सशक्त महसूस करेगा। सच्चे मायने में बाबा साहब भीम राव अंबेडकर जी, पंडित दीनदयाल जी और लोहिया जी ने ऐसे ही समाज का सपना देखा था जहाँ कोई गैरबराबरी ना हो और अंत्योदय हो। ये ऐतिहासिक और बेहद साहसिक फैसला है और इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी बधाई के पात्र हैं।


त्रिपाठी ने कहा कि प्रदेश की जनता ने देखा है कि सपा-बसपा की सरकारों में कैसे लाल बत्तियों का दुरुपयोग होता था। लाल बत्ती लगी गाड़ियाँ कानून की धज्जियाँ तो उड़ाती ही थीं, इन गाड़ियों के सहारे आम आदमी पर भी धौंस जमाई जाती थी। सपा-बसपा की सरकारों में लाल बत्ती लगी गाड़ियों के दम पर प्रशासन और पुलिस के ईमानदार अफसरों और कर्मचारियों का मनोबल तोड़ने की भी कई घटनाएं हुईं। ऐसे में प्रधानमंत्री जी ने आम जनता की उस मनोभावना को भी महसूस किया जिसमें लाल बत्ती गाड़ियाँ वीआईपी संस्कृति की पहचान बन गई थी और ऐसी गाड़ियों की वजह से आम और खास आदमी का फर्क महसूस होता था।



प्रदेश प्रवक्ता त्रिपाठी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की हमेशा से कोशिश रही है कि समाज के आखिरी व्यक्ति के लिये काम किया जाए और इसीलिए उन्होंने खुद को हर बार प्रधानमंत्री की बजाए प्रधान सेवक कहलाना पसंद किया। और अब मुख्यमंत्री जी ने भी उनकी राह पर चलते हुए चीफ मिनिस्टर की बजाए कामन मैन होने की बात साबित कर दी है। आम लोगों को यह महसूस कराने के लिये ही कि वो हमारी सरकार में कितने खास हैं, मुख्यमंत्री चौबीस घंटे लगातार काम कर रहे हैं। जिस मुख्यमंत्री सचिवालय में शाम होते ही काम बंद हो जाता था वहाँ अब देर रात जनहित के काम हो रहे हैं और इस दौरान भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों की परवाह किए बगैर मुख्यमंत्री ने अपने स्थलीय दौरे भी शुरू कर दिए हैं। बुंदेलखंड का दौरा इसका सबूत है। आगे भी ऐसे दौरे जारी रहेंगे।

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