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सोमवार का योग पितरों के साथ देवताओं की कृपा भी प्रदान करता है। इससे आरोग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, वहीं पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्धकर्म से उनका आशीर्वाद मिलेगा।

इस बार पितरों की तृप्ति के लिए दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक योग हैं। दौरान सुबह 11 बजे तक पितरों की पूजा-अर्चना कर ब्राह्मणों को पितरों के निमित्त भोजन भी करवाया जाता है। ऐसा माना जाता है, कि इस दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान करने से वे संतुष्ट होते हैं और उन्हें विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।

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इस दिन महिलाओं को करना चाहिए पीपल वृक्ष की परिक्रमा
महिलाआें में यह भ्रम उत्पन्न हो रहा है कि इस बार पितृमोक्ष अमावस्या के दिन सोमवती अमावस्या पड़ रही है, इसलिए पीपल की पूजा नहीं करना चाहिए। जबकि इस बार भी सोमवती अमास्या पर पीपल का पूजन उतना ही फलदायी होगा, जितना अन्य सोमवती अमावस्या पर होता है। इसलिए मन में संशय न लाते हुए महिलाएं सुख-सौभाग्य की कामना करते हुए देवतुल्य पीपल की विधिवत पूजन कर परिक्रमा लगाएं।

इस दिन पीपल के पूजन में दूध, दही, मीठा, फल, फूल, जल, जनेऊ जोड़ा चढ़ाने और दीप दिखाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। माना जाता है पीपल के मूल में भगवान विष्णु, तने में भगवान शिव जी तथा अग्रभाग में भगवान ब्रह्मा जी का निवास है। इसलिए सोमवती अमावस्या को पीपल के पूजन से अक्षय पुण्य, लाभ तथा सौभाग्य की वृद्धि होती है।

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Home > धर्म-कर्म > सोमवती अमावस्या कल, श्राद्ध का कई गुना मिलेगा फल

सोमवती अमावस्या कल, श्राद्ध का कई गुना मिलेगा फल

 Special News Coverage |  2015-10-11 12:59:29.0

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इस बार श्राद्ध पक्ष के समापन पर सर्वपितृ अमावस्या के साथ सोमवती अमावस्या का भी संयोग बन रहा है। इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी आकाल मृत्यु हुई हो या जिन पूर्वजों की मृत्यु की तिथि‍ ज्ञात न हो। इस वर्ष सर्वपितृ आमावस्या पर सोमवती संयोग बन रहा है।

कल 12 अक्टूबर को यह संयोग बनने से पितरों की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण के साथ देवकार्य किए जाएंगे। एक ओर जहां पुरुष वर्ग पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान करेंगे वहीं दूसरी ओर महिलाएं सोमवती अमावस्या होने के कारण वटवृक्ष की पूजन-अर्चन कर 108 परिक्रमा लगाएंगी।


पंडित त्रियुगीनारायण मणि ने बताया कि आज रविवार की देर रात 2.58 बजे से अमावस्या लगेगी, जो मंगलवार सुबह 5.36 तक रहेगी। जिससे 24 घंटे से अधिक समय तक अमावस्या का लाभ मिलेगा। शास्त्रों के अनुसार सोमवार को जब भी अमावस्या हो और वह शाम को रहे तो वह सहस्र गोदान का पुण्य प्रदान करती है। इसके पहले पितृ पक्ष में 2012 में सर्वपितृ अमावस्या के साथ सोमवती अमावस्या का संयोग बना था। अब आगे यह 13 साल बाद 2028 में आएगा यह संयोग फिर से बनेगा। सूर्य और चंद्र कन्या राशि में हैं। राहु और बुध भी सूर्य व चंद्र की उच्च कन्या राशि के साथ युति कर दो ग्रहण याेग बना रहे हैं। इससे तर्पण, पितृ दोष पूजन, श्राद्ध कर्म ज्यादा पुण्यदायी हो जाएगा।

अमावस्या पितृ कार्य के दिन सूर्य-चंद्र दोनों एक सीध में रहते हैं और श्राद्ध पक्ष में सोमवती अमावस्या का आना विशेष दान-पुण्य का महत्व रखता है। सोमवार का दिन यानि चंद्रमा का दिन होने से सोमवती अमावस्या के दिन मौन रहकर स्नान-ध्यान करने का भी विशेष महत्व है। क्योंकि चंद्रमा मन का कारक है। कहा जाता है कि ऐसा करने से सहस्त्र गायों को दान करने का पुण्य मिलता है। पितरों के साथ भगवान विष्णु और पीपल पूजन भी श्रद्धालुओं को करना चाहिए। इस दिन पीपल में जल चढ़ाकर तिलांजलि दिया जाना विशेष पुण्य का योग है।



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सोमवार का योग पितरों के साथ देवताओं की कृपा भी प्रदान करता है। इससे आरोग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, वहीं पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्धकर्म से उनका आशीर्वाद मिलेगा।

इस बार पितरों की तृप्ति के लिए दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक योग हैं। दौरान सुबह 11 बजे तक पितरों की पूजा-अर्चना कर ब्राह्मणों को पितरों के निमित्त भोजन भी करवाया जाता है। ऐसा माना जाता है, कि इस दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान करने से वे संतुष्ट होते हैं और उन्हें विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।

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इस दिन महिलाओं को करना चाहिए पीपल वृक्ष की परिक्रमा
महिलाआें में यह भ्रम उत्पन्न हो रहा है कि इस बार पितृमोक्ष अमावस्या के दिन सोमवती अमावस्या पड़ रही है, इसलिए पीपल की पूजा नहीं करना चाहिए। जबकि इस बार भी सोमवती अमास्या पर पीपल का पूजन उतना ही फलदायी होगा, जितना अन्य सोमवती अमावस्या पर होता है। इसलिए मन में संशय न लाते हुए महिलाएं सुख-सौभाग्य की कामना करते हुए देवतुल्य पीपल की विधिवत पूजन कर परिक्रमा लगाएं।

इस दिन पीपल के पूजन में दूध, दही, मीठा, फल, फूल, जल, जनेऊ जोड़ा चढ़ाने और दीप दिखाने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। माना जाता है पीपल के मूल में भगवान विष्णु, तने में भगवान शिव जी तथा अग्रभाग में भगवान ब्रह्मा जी का निवास है। इसलिए सोमवती अमावस्या को पीपल के पूजन से अक्षय पुण्य, लाभ तथा सौभाग्य की वृद्धि होती है।

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