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दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, लगातार बढ़ रहा है शिवलिंग का आकार

 Special News Coverage |  2016-04-08 09:40:49.0

दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, लगातार बढ़ रहा है शिवलिंग का आकार

छत्तीसगढ़: भगवान शिव की महिमा को कौन नहीं जानता। भगवान शिव की पूजा तो सभी करते होंगे और बेशक उनके चमत्कारों के क़िस्सों से आप परिचित भी होंगे। अपने देश के शिवालयों में एक ओर जहां शिवलिंग के आकार छोटे होते जाने की खबर आती है, वहीं छत्तीसगढ़ में एक शिवलिंग ऐसा है जहाँ उसका आकार घटता नहीं है, बल्कि हर साल लगातार बढ़ रहा है शिवलिंग का आकार। आख़िर सच क्या है? आपको बता दे यह शिवलिंग प्राकृतिक रूप से निर्मित है।


आज हम यहाँ बात कर रहे हैं शिवलिंग की। जिसकी लम्बाई हर साल बढती जा रही है, आख़िर सच क्या है? आपको बता दे यह शिवलिंग छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मारौदा गाँव में है। जिसे भूतेश्वर नाथ के नाम से जाना जाता है। इस शिवलिंग की खासियत यह है की इस शिवलिंग का आकार लगातार हर साल 6 से 8 इंच बढती ही जा रही है।

हरेक साल सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवार को इस शिवलिंग के दर्शन करने के लिए और जल चढ़ाने सैकड़ों कांवरिये यहां लंबी पैदल यात्रा करके पहुंचते हैं। द्वादश ज्योतिर्लिगों की भांति छत्तीसगढ़ में इसे अर्धनारीश्वर शिवलिंग होने की मान्यता प्राप्त है। संभवत: इसलिए यहां पर हर साल पैदल आने वाले भक्तों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। पुराणो के कथाओं में भी इस शिवलिंग का नाम लिया जाता है और इसे भकुरा महादेव के नाम से भी जाना जाता है।

हर साल बढ़ जाती है शिवलिंग की आकृति

आप लोग यह सोच रहे होंगे की हो सके हो ज़मीन में चेद्कानी या किसी मानवीय गतिविधि से ये बढ़ रहा होगा. लेकिन आपको बता दे की यह शिवलिंग ज़मीन से 18 फूट ऊँचा है और इसकी गोलाई करीब 20 फूट है तो किसी मानवीय गतिविधि की कोई आशंका नहीं है और अगर माना जाए तो ये एक तरह का चमत्कार ही है। इस शिवलिंग का पौराणिक महत्व सन् 1959 में गोरखपुर से प्रकाशित धार्मिक पत्रिका 'कल्याण' के वार्षिक अंक में उल्लेखित है, जिसमें इसे विश्व का एक अनोखा विशाल शिवलिंग बताया गया है।

सबसे पहली बात ध्यान देने लायक ये है कि ये शिवलिंग ज़मीन से क़रीब 18 फ़ीट ऊँचा है और गोलाई में क़रीब 20 फ़ीट है। और अगर हर साल बिना किसी मानवीय गतिविधि के इसकी लम्बाई अपने आप ही बढ़ती जा रही है तो ये किसी चमत्कार से कम नहीं है। आस्था और विश्वास के आगे कोई तर्क नहीं चलता और शायद यही कारण है कि वैज्ञानिक भी अभी तक ये पता नहीं लगा पाये हैं कि क्यों इस शिवलिंग की लम्बाई और गोलाई हर साल लगातार अपने आप ही बढ़ी जा रही है।

इस शिवलिंग के बारे में बताया जाता है कि कई सौ साल पहले शोभा सिंह नाम का जमींदार की यहां पर खेती-बाड़ी थी। वो हर शाम अपने खेत में घूमने जाते थे। फिर एक दिन अचानक उस खेत के पास एक विशेष आकृतिनुमा टीले से सांड के हुंकारने और शेर के दहाड़ने की आवाज आती थी। शोभा सिंह ने यह बात ग्रामवासियों को बताई। फिर ग्रामवासियों ने आसपास ढूँढा परंतु दूर दूर तक कोई जानवर नहीं मिला। एक छोटा सा शिवलिंग ज़रूर मिल गया और देखते ही देखते हर किसी की उसमें आस्था बढ़ने लगी। और जल्द ही वहाँ पूजा-अर्चना का केंद्र बन गया और तब से लेकर हर साल उसका आकार बढ़ रहा है और लोगों का उसमें विश्वास भी। लोग इस टीले को शिवलिंग के रूप में मानने लगे।

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