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भारत की रहस्मयी 'झूलती मीनारों वाली मस्जिद' क्या है इसका रहस्य?

 Special News Coverage |  23 April 2016 12:06 PM GMT

भारत की रहस्मयी 'झूलती मीनारों वाली मस्जिद' क्या है इसका रहस्य?

नई दिल्ली: भारत की इकलौती रहस्मयी झूलती मीनारों वाली मस्जिद, ये मस्जिद ऐसे हिलती हैं जैसे की झूले पर हिलता है इंसान। आखिर क्या है इसका रहस्य? आज भी है ये मस्जिद लोगों के लिए एक अजूबा बना हुआ है। दुनियाभर के इंजीनियर्स और आर्किटेक्ट के लिए अनसुलझा रहस्य बनी हुई है ये झूलती हुई मीनार। क्योंकि किसी एक मीनार को हिलानें पर दूसरी वाली कुछ अंतराल में खुद ही हिलने लगती है। झूलती मीनार जिसे सीदी बशीर मस्जिद

कहते है।

हमारे देश में धार्मिक महत्व के कई प्राचीन स्थल हैं। उनमें कई स्थानों से जुड़ी मान्यताएं जितनी गहरी हैं उनका निर्माण भी उतना ही चर्चित रहा है। गुजरात के अहमदाबाद में स्थित 'सीदी बशीर मस्जिद' को झूलती मीनार के नाम से जाना जाता है। क्योंकि, यहां किसी भी एक मीनार को हिलाने पर दूसरी वाली अपने आप कुछ अंतराल पर हिलने लगती है। इसीलिए मस्जिद की मीनारों को 'झूलती मीनारें' कहा जाता है। लोग दूर-दूर से इन मीनारों को देखने के लिए आते हैं।

आपको जानकार आश्चर्य होगा कि अनेकों बार भूकंप के झटकों से यहां की जमीन हिली, लेकिन ये मीनारें जस की तस खड़ी रहीं। विशेषज्ञ इसे कुछ भी कहें लेकिन लोगों के लिए यह एक अजूबा बना हुआ है। बड़े-बड़े अभी तक इसका रहस्य मालुम नहीं कर पाए है। यह गुजरात राज्य के अहमदाबाद शहर में स्थित है। गुजरात जो धार्मिक और अन्य ऐतिहासिक इमारतों की खुबसूरती के कारण प्रसिद्ध है।

माना जाता है कि इस मस्जिद का निर्माण सारंग ने कराया था, जिसने सारंगपुर की स्थापना की थी। इसका निर्माण सन् 1461-64 के बीच हुआ था। उस समय सीदी बशीर इस प्रोजेक्ट के पर्यवेक्षक थे। जब इनकी मृत्यु हुई उसके बाद इन्हें इसके पास ही दफना दिया गया। जिसके कारण इस मस्जिद का नाम
सीदी बशीर मस्जिद
पड़ा।

इतना ही नहीं, ब्रितानी शासन काल में इस रहस्य को समझने के लिए ब्रिटेन से इंजीनियर्स बुलाए गए थे। मीनारों के आसपास खुदाई भी की गई थी, लेकिन सारी कोशिशें बेकार ही रहीं। यहाँ तक कि मीनार की मजबूती को नापा गया तो मजबूती भी पूरी थी।

क्या है इसका रहस्य?
इन मीनारों के हिलने का रहस्य खोजने की कोशिश की गयी। ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि इन पत्थरों में फेलस्पार की मात्रा ज्यादा है जो कई सालों तक हुई रासायनिक अभिक्रिया का नतीजा है। यह मीनार बलुआ पत्थर से बनी है। इन पत्थरों में ऐसा गुण पैदा हो गया।

एक शोध के द्वारा निकले निष्कर्ष में पाया गया कि ये मीनारें लचकदार पत्थरों के द्वारा बनाई गयी हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार ऐसा पत्थर सबसे पहले राजस्थान में पाया गया था। इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि इस प्रकार के पत्थर कुदरती तौर पर फेलस्पार के घुल जाने से बन जाते हैं। फेलस्पार एक ऐसा पदार्थ हैं, जो हल्के से हल्के एसिड में घुल जाता है। जब रासायनिक प्रक्रिया में कुछ धातुओं का भस्म पानी के संपर्क में आता है तो लवण और एसिड पैदा करते हैं, यही एसिड फेलस्पार को घोलने के लिए पर्याप्त है। इस तरह से बलुआ पत्थरों के कणों के बीच खाली जगह उत्पन्न हो जाती है। इसी कारण बलुआ पत्थर लचकदार हो जाता है।

इसके अलावा इन मीनारों की वास्तुकला भी इसके हिलने में मदद करती है। इन सिलेंडरनुमा मीनारों के अंदर सीढ़ियां सर्पाकार हैं। इसके पायदान पत्थरों को गढ़कर बनाए गए हैं। इनका एक किनारा मीनार की दीवार से जुड़ा है तो दूसरा छोर मीनार के बीचो-बीचों एक पतले स्तंभ की रचना करता है। पत्थरों की इतनी गढ़ाई बेहतरीन है कि आज भी इनके जोड़ खुले नहीं हैं। इससे यह बात साबित होती है कि निर्माण में कोई कमी नहीं है। जब मीनारों पर धक्का लगाया जाता है तो उसका असर दो दिशाओं पर होता है, एक तो ताकत लगाने की दिशा के विपरीत और दूसरा सर्पाकार सीढ़ियों की दिशा में नीचे से ऊपर की ओर। जिसके कारण मीनार आगे-पीछे हिलने लगती हैं।

सीदी बशीर मस्जिद या झूलती मीनारों वाली मस्जिद भारत की इकलौती रहस्मयी मस्जिद है। इसे आप अजूबा भी कह सकते हैं। अगर पानी की कटौरी मीनार पर रखने के बाद मीनार हिलाई जाये तो पानी हिलता हुआ साफ़ देखा जा सकता है।

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