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बीजेपी-जदयू समझौते से गरमाई बिहार की राजनीति, गड़बड़ा सकता है एनडीए का गणित

 Special Coverage News |  2018-10-30 07:34:10.0  |  पटना

बीजेपी-जदयू समझौते से गरमाई बिहार की राजनीति, गड़बड़ा सकता है एनडीए का गणित

यूसुफ अंसारी

बिहार में लोकसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और जेडीयू के बीच हुए फिफ्टी- फिफ्टी के समझौते के बाद बिहार की राजनीति काफी गरमा गई है. इस समझौते से एनडीए में काफी बेचैनी है बीजेपी के सहयोगी दल जेडीयू और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी दोनों ही परेशान हैं। दबी जुबान में दोनों ने ही बीजेपी और जेडीयू क बीच हुए इस समझौते को अपने साथ नाइंसाफी बता रहे हैं। इनके तेवरों से लगता है कि अगर इन्हें और ज्यादा सीटें नहीं दी गई तो बिहार में एनडीए का गणित गड़बड़ा सकता है।

बीजेपी और जदयू के बीच हुए सीटों के समझौते को लेकर बीजेपी के अंदर भी काफी नाराजगी है। पहले जहां बीजेपी नीतीश कुमार को उनकी औकात के हिसाब से 4 या 5 सीट देने की बात कर रही थी वहींं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने नीतीश कुमार के सामने घुटने टेकते हुए आधी आधी सीटों पर समझौता कर लिया। इसे लेकर अंदरूनी तौर पर बीजेपी में काफी नाराजगी है। यह नाराजगी कभी भी बगावत बनकर उभर सकती है इससे बीजेपी को बिहार में काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

नीतीश कुमार ने कर्नाटक चुनाव के बाद बीजेपी की पतली हालत देखकर उन पर ज्यादा सीटें देने का दबाव बना दिया था। नीतीश कुमार ने शुरुआत ही 25 की मांग से की थी। नीतीश कुमार बीजेपी को यह एहसास कराने में कामयाब रहे हैं कि उनके बगैर बीजेपी का बिहार में जीतना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने नीतीश कुमार के सामने घुटने टेकना बताता है कि बीजेपी नीतीश कुमार की इस बात से सहमत हैं कि उनके बगैर बीजेपी की दाल नहीं गल सकती।

बीजेपी और जेडीयू के बीच हुए समझौते के फौरन बाद ही एनडीए में दरार दिखने लगी थी। दिल्ली में अमित शाह और नीतीश कुमार ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस समझौते की जानकारी दी। इसके थोड़ी ही देर बाद बीजेपी की सहयोगी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष और केंद्र में राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा आरजेडी नेता तेजस्वी यादव से मिलने पहुंच गए। तेजस्वी यादव से मुलाकात कर के उपेंद्र कुशवाहा ने साफ संकेत दिया कि उनके पास दूसरी तरफ जाने के विकल्प पर भी खुले हैं वहीं रामविलास पासवान भी इस समझौते से खुश नहीं हैं। उन्होंने भी संकेत दिए हैं कि आखिरी वक्त में वह भी पाला बदल सकते हैं। अगर रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा बीजेपी का साथ छोड़कर कांग्रेस के पाले में जाते हैं कांग्रेस को फायदा होगा और बीजेपी को अच्छा खासा नुकसान हो सकता है।गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत से जीत हासिल करने के बाद बीजेपी का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। उत्तर प्रदेश में बीजेपी को 403 में से 325 विधानसभा सीटें मिली थी। उसके बाद हुए गुजरात चुनाव में जहां बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह 182 में से 150 सीटें जीतने का दावा कर रहे थे वहां उन्हें 100 सीटें हासिल करने में पसीने छूट गए थे। इस साल हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी बहुमत से पहले ही अटक गई। वहां सरकार बनने के बावजूद बीजेपी बहुमत नहीं जुटा पाई। कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बना ली।

कर्नाटक चुनाव में मिली हार के बाद से बीजेपी लगातार दबाव में है। इधर राजस्थान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी की हालत ठीक नहीं दिखती है। यहां कांग्रेस उसे कड़ी टक्कर दे रही है। अगर इन चुनाव में बीजेपी अपनी सत्ता गंवा देती है तो लोकसभा चुनाव में उसके लिए बहुत मुश्किल होगी। बीजेपी अपने सहयोगियों को खोना नहीं चाहती। इसी दबाव में बीजेपी सहयोगियों के साथ झुक कर समझौता करने पर मजबूर है। बिहार इसका बेहतरीन उदाहरण है। पिछले लोकसभा चुनाव में सिर्फ 2 सीटें जीतने वाले नीतीश कुमार बीजेपी से 16 सीटें झटकने में कामयाब हुए हैं तो यह नीतीश की कामयाबी और बीजेपी की हार है।

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद देश में लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो जाएंगी। इन चुनाव में अगर बीजेपी को नुकसान होता है तो उसके सहयोगियों को उससे किनारा करने का मौका मिल जाएगा। कांग्रेस का मनोबल बढ़ेगा तो बीजेपी के सहयोगी कांग्रेस के पाले में जा सकते हैं। इन हालात में बिहार में बीजेपी और एनडीए का गणित गड़बड़ा सकता है। अगर कांग्रेस के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनता दल, लोकजनशक्ति पार्टी और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी पार्टियों का गठबंधन एकजुट होकर चुनाव लड़ता है तो यह गठबंधन बीजेपी और जदयू पर भारी पड़ सकता है।

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