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बिहार छात्रसंघ चुनाव: जदयू और ABVP को झटका, पप्पू की जाप ने चटाई धूल

राजनीति के जानकार ये भी बताते हैं कि चुनाव प्रचार के दौरान पटना वीमेंस कॉलेज में छात्र राजद और छात्र जदयू कार्यकर्ताओं के बीच जड़प और मारपीट की घटना ने भी छात्र जदयू की चुनावी रणनीति और गणित को कमजोर कर दिया.

 Special Coverage News |  8 Dec 2019 3:18 AM GMT  |  पटना

बिहार छात्रसंघ चुनाव: जदयू और ABVP को झटका, पप्पू की जाप ने चटाई धूल

पटना. पटना विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी और छात्र जेडीयू को भारी झटका लगा है. शनिवार की देर रात आए चुनाव परिणाम में पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी की छात्र इकाई जनाधिकार छात्र परिषद और छात्र राजद ने क्रमश: पटना विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया. पप्पू यादव ने भी भले ही सीधे तौर छात्र संघ चुनाव में दखलअंदाजी नहीं दी हो लेकिन इस चुनाव को लेकर वो कितने गंभीर थे इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पद पर जैसे ही पार्टी प्रत्याशी की जीत की भनक मिली तो वे देर रात ही मतगणना केंद्र पर पहुंच गए.

किसे मिला कौन सा पद

जन अधिकार पार्टी के स्टूडेंट विंग के कैंडिडेट मनीष कुमार पीयू छात्रसंघ के नए अध्यक्ष चुने गए जबकि उपाध्यक्ष पद पर राजद के निशांत, महासचिव पद पर एबीवीपी की प्रियंका और कोषाध्यक्ष के पद पर आइसा की कोमल और संयुक्त सचिव के पद पर जन अधिकार पार्टी के स्टूडेंट विंग के आमिर राजा ने जीत दर्ज की है. पीयू के सेंट्रल पैनल में पहली बार आइसा की एंट्री हुई है. सेंट्रल पैनल के 5 पदों में जन अधिकार पार्टी को 2, छात्र राजद, एबीवीपी, और आइसा को 1-1 पद पर जीत मिली है.

पप्पू यादव बोले

जीत के उत्साह से लबरेज पप्पू यादव ने तो यहां तक कह डाला कि पीयू छात्र संघ चुनाव का यह परिणाम 2020 के विधानसभा चुनाव की दशा और दिशा भी तय करेगा. पप्पू यादव की पार्टी जनाधिकार छात्र परिषद के उम्मीदवार मनीष कुमार ने 2815 वोट लाकर अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की वहीं जनाधिकार के ही उम्मीदवार आमिर रजा ने भी 3143 वोट लाकर संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल किया. वर्ष 2018 में पीयू छात्र संघ चुनाव में सत्तारूढ जदयू ने अध्यक्ष पद पर बड़ी जीत हासिल की थी वैसे में यह कयास लगाए जा रहे थे कि छात्र जदयू इसबार भी महत्वपूर्ण जीत हासिल करेगा लेकिन कहा जा रहा है कि पिछले चुनाव में पीके के सहारे चुनावी वैतरनी पार करनेवाला जदयू इसबार पीके के बगैर बेसहारा हो गया. छात्र जदयू नेताओं में इसी कारण एक हतासा भरा माहौल रहा.

राजनीति के जानकार ये भी बताते हैं कि चुनाव प्रचार के दौरान पटना वीमेंस कॉलेज में छात्र राजद और छात्र जदयू कार्यकर्ताओं के बीच जड़प और मारपीट की घटना ने भी छात्र जदयू की चुनावी रणनीति और गणित को कमजोर कर दिया. उधर छात्र राजद के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी आयुष की छात्र जदयू कार्यकर्ताओं द्वारा की गई पिटाई ने छात्र राजद के लिए टॉनिक का काम किया और चुनावी परिणाम और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ना केवल पटना वीमेंस कॉलेज में बल्कि कई जगहों पर छात्र राजद प्रत्याशी के पक्ष में बंपर सहानुभूति वोट भी मिला, यही कारण रहा कि ना केवल सेंट्रल पैनल में राजद के उम्मीदवार निशांत ने उपाध्यक्ष पद पर 2910 मत लाकर जीत हासिल की बल्कि अध्यक्ष पद के लिए भी घोषित चुनाव परिणाम में भी प्रत्याशी आयुष 2375 मत पाकर दूसरे नंबर पर रहा.

एबीवीपी को भी मिली मायूसी

2018 तक पीयू छात्र संघ चुनाव में अपना दबदबा कायम रखनेवाला एबीवीपी के कार्यकर्ता भी मायूस नजर आए जबकि सेंट्रल पैनल में महासचिव के पद पर उनकी उम्मीदवार प्रियंका श्रीवास्तव 3731 मत पाकर महासचिव पद पर काबिज हुई और सेंट्रल पैनल के 5 सीटों में एबीवीपी को एक सीट से ही संतोष करना पड़ा. इस चुनाव परिणाम में आइसा जैसा छात्र संगठन भी एकपद अपने दम पर लेने में कामयाब रहा,आइसा की उम्मीदवार कोमल कुमारी ने 2238 मत लाकर कोषाध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर यह संदेश किया पीयू छात्र संघ चुनाव में छात्राओं की भागीदारी महत्वपूर्ण है.

शांतिपूर्ण रहा चुनाव

सेंट्रल पैनल के जीते हुए सभी 5 प्रत्याशियों ने दावे के साथ कहा और भरोसा भी दिलाया कि पीयू के सुनहरे अतीत को फिर से लौटाने का काम करूंगा और केंद्रीय विश्वविद्यालय बनवाने के लिए भी हर संभव प्रयास करूंगा. सबसे बड़ी बात है कि मतदान से लेकर मतगणना तक सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद दिखी नतीजा कहीं भी अप्रिय घटना और वारदात नहीं हुई. वैसे मतदान के दौरान बीएन कॉलेज में छात्रों के 2 गुटों के बीच झड़प और हवाई फायरिंग की खबर आई थी जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने मुश्तैदी दिखाकर हालात पर चुरंत काबू पा लिया. आर्ट कॉलेज में मतगणना के दौरान सिर्फ उम्मीदवारों को ही जीत दर्ज करने के बाद केंद्र पर प्रवेश करने दिया गया जिससे कि मतगणना केंद्र पर किसी तरह का कोई मजमा नहीं लगा.

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