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कन्हैया का एक बार फिर से शक्ति प्रदर्शन ,पैदल मार्च में उमड़ा जनसैलाब

 Special Coverage News |  27 April 2019 2:10 AM GMT  |  बेगुसराय

कन्हैया का एक बार फिर से शक्ति प्रदर्शन ,पैदल मार्च में  उमड़ा जनसैलाब

शिवानन्द गिरि

बेगुसराय - सीपीआई के उम्मीदवार कन्हैया कुमार ने आज बेगूसराय में एक बार फिर शक्ति प्रदर्शन करते हुए कैंडल मार्च निकाला ।।कन्हैया के इस कैंडल मार्च में भारी संख्या में उनके समर्थकों की भागीदारी से बेगूसराय शहर का ट्रैफिक व्यवस्था काफी देर तक जाम हो गया ।शहर के ट्रैफिक शॉप से शुरू हुई पैदल मार्च को है विभिन्न शहर शहर के विभिन्न मार्गों होते हुए हर -हर महादेव चौक के पास समाप्त हुई जहांआयोजित एक सभा को सीपीआई के केंद्रीय कमेटी राज्य कमेटी , विभिन्न संगठनों तथा छात्र नेता आदि ने संबोधित करते हुए कहा कि आज पदल मर मे जुटी अपार भीड़ यह साबित करती है कि कन्हैया कुमार बेगूसराय जिला में कितना लोकप्रिय है और यहां की जनता इस बार उसे लोकसभा चुनाव में वोट देकर दिल्ली भेजने का मूड बना ली है ।मोबाइल की रोशनी के साथ निकाली गई इस पैदल मार्च में बच्चे ,नौजवान, महिलाएं, छात्राएं किसान ,मजदूर ,कलाकार साहित्यकार समित भारी संख्या में विभिन्न संगठनों के लोगों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।




इससे पुर्व कन्हैया कुमार ने बेगूसराय के शाम्हो में आयोजित चुनावी सभा में भाजपा प्रत्याशी गिरिराज सिंह पर जमकर हमला किया । गिरिरज सिंह को आड़े हाथों लेते हुए कन्हैया ने कहां के भाजपा प्रत्याशी को चुनाव लड़ने से पहले बेगूसराय के गांव में घूम लेना चाहिए । यहां के लोगों की समस्याओं को जान लेना चाहिए था ।।जो नेता आज बेगूसराय को 'अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि' बता रहे हैं उन्हें मंत्री पद पर बैठकर चुनाव से पहले बेगूसराय के गांवों में झांकने की भी फुर्सत नहीं मिली।




कन्हैया ने कहा कि शाम्हो के निवासियों की लंबे समय से यह मांग रही है कि गंगा नदी पर पुल बनाकर इस क्षेत्र को बेगूसराय के दूसरे इलाकों से जोड़ा जाए। उन्हें अपने ही शहर के दूसरे इलाकों में आने-जाने के लिए नाव पर चढ़कर यात्रा करनी पड़ती है। यहां सड़क की हालत इतनी खराब है कि स्थानीय निवासियों ने 'रोड नहीं तो वोट नहीं' के नारों के साथ कई बार विरोध प्रदर्शन किए हैं। अगर किसी को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की तथाकथित सफलता की असलियत जाननी हो, तो उसे बेगूसराय के शाम्हो की सड़कों पर नजर दौड़ानी चाहिए। बारिश में यहां की सड़कें कीचड़ से भर जाती हैं। चाहे बच्चों को स्कूल भेजना हो या काम-धंधों के लिए बाजार जाना, ऐसी बदहाल सड़कों के कारण तमाम कामों में ग्रामीणों को मुश्किल का साम करना पड़ता है।




कन्हैया ने कहा कि किसी भी देश के विकास को उसकी राजधानी या बड़े शहरों की चमचमाती इमारतों से नहीं, बल्कि उसके गाँव-कस्बों की सड़कों या स्कूल-अस्पतालों की हालत से आँका जाना चाहिए। आज जनता की गाढ़ी मेहनत की कमाई से मिलने वाले टैक्स का इस्तेमाल बड़ी कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए किया जा रहा है। क्या आज बेगूसराय या दूसरे शहरों में विश्वविद्यालयों या अस्पतालों पर पैसा खर्च करना सरकार की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए? एक तरफ तो सरकार अरबों रुपये का कर्ज डुबोने वाली कंपनियों के मालिकों का नाम तक बताने को तैयार नहीं है तो दूसरी तरफ गरीब किसान कर्ज नहीं चुका पाने के कारण आत्महत्या कर रहे हैं।

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