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नाना पाटेकर बोले, देश में बेवजह इनटॉलेरेंस बढऩे का डर दिखाकर लोगों में भय उत्पन्न किया

 Special News Coverage |  10 Dec 2015 5:38 AM GMT

Nana patekar on tolerance
पुणेः देश में बेवजह इनटॉलेरेंस बढऩे का डर दिखाकर लोगों के भीतर घबराहट पैदा करने का काम हो रहा है। मैंने आज तक देश में कभी इसका अनुभव नहीं किया। देश मे पहले भी सहिष्णुता थी, आज भी है और कल भी रहेगी। यह कहना है अभिनेता नाना पाटेकर का। नाना अपनी अपकमिंग मराठी फिल्म नट सम्राट के प्रमोशन के लिए पुणे आए थे।


मराठी के फेमस नाटक नट सम्राट पर बनी फिल्म में नाना ने अप्पासाहब बेलवकर (नट सम्राट) का किरदार निभाया है। इस फिल्म का महेश मांजरेकर ने निर्देशन किया है। फिल्म को लेकर नाना ने कहा मैं 20 साल की उम्र से इस नाटक को देखता आ रहा हूं। तब इस नाटक में मुख्य भूमिका में डॉ. श्रीराम लागू थे। डॉ. लागू अप्पासाहब बेलवलकर का किरदार बखूबी निभाते थे। और तबसे मेरे मन में इच्छा थी कि एक दिन मैं भी यह किरदार निभाऊंगा, लेकिन नाटक की बजाय यह मौका मुझे इस फिल्म में मिला।



फिल्म प्रोमोशन के दौरान निर्देशक महेश मांजरेकर ने कहा कि मैंने यह नाटक देखा नहीं, सिर्फ पढ़ा था। मेरे मन में इसको लेकर फिल्म बनाने का आइडिया आया और मैंने अप्पासाहेब के किरदार के लिए नाना को चुना। मुझे लगता है कि नाना के अलावा कोई अभिनेता यह किरदार निभा नहीं सकता। इस फिल्म में नाना के अलावा मेधा मांजरेकर, विक्रम गोखले, सुनील बर्वे, नेहा पेंडसे अजित परब, मृण्मयी देशपांडे और जयवंत वाडकर ने अभिनय किया है।

बाजीराव मस्तानी फिल्म को लेकर एक सवाल का जबाव देते हुए नाना ने कहा कि फिल्म के द्वारा इतिहास से छेड़छाड़ गलत है। फिल्म बनाने से पहले गहरा अध्यन होना चाहिए। मैं अगर बाजीराव मस्तानी पर फिल्म बनाता तो इससे अलग ही बनाता, ऐसी फिल्म बनाता ही नहीं। बाजीराव एक योद्धा थे और वे एक भी लड़ाई हारे नहीं थे। मैंने फिल्म नहीं देखी लेकिन ट्रेलर से पता चलता है कि बाजीराव का जो रुप दिखाया गया है वह गलत है। हमें इतिहास के साथ छेड़छाड नहीं करनी चाहिए।

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