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RBI गवर्नर रघुराम राजन की ताकत कम करने की तैयारी में मोदी सरकार

 Special News Coverage |  21 Oct 2015 7:00 AM GMT

Raghuram Rajan


नई दिल्ली : केंद्र सरकार की और से एक प्रस्ताव को तैयार कर उसे सभी सरकारी विभागों को भेजा है और उनसे उनकी राय भी मांगी है। और इस प्रस्ताव के अनुसार रिजर्व बैंक के गवर्नर को अपनी मौद्रिक नीति तय करने के सम्बंधित मामले में मिले विशेष अधिकारों को कम करने के सुझाव शामिल हैं।

इस प्रस्ताव के दस्तावेज के अनुसार सरकार ने सात सदस्यों की समिति की बात कही है। इसमें भारत सरकार के चार और आरबीआई के तीन सदस्य शामिल होंगे। सरकार के चार में से एक के पास वोटिंग का अधिकार नहीं होगा। आरबीआई के इन्हीं तीन सदस्यों में आरबीआई के गवर्नर भी शामिल होंगे।


नए प्रस्ताव के अनुसार गवर्नर भले ही इस समिति के अध्यक्ष होंगे, लेकिन उनके पास किसी प्रकार की वीटो पावर नहीं रहेगी। हालांकि गवर्नर के पास वोट करने का अधिकार होगा। सरकार के प्रस्ताव के अनुसार आरबीआई गवर्नर के अलावा बैंक दो सदस्यों को इस समिति के लिए नामित कर सकता है। इसमें डिप्टी गवर्नर के अलावा एक और अधिकारी शामिल होगा।

मौद्रिक नीति पर बनने वाली इस समिति का निर्णय आरबीआई पर बाध्य होगा और और यह निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जा सकेगा। और दो विभिन्न मतों में समान विभाजन की स्थिति में ही आरबीआई गवर्नर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। मौद्रिक नीति पर बनने वाली यह समिति आरबीआई की तमाम ब्याज दरों को तय कर सकेगी और महंगाई के टारगेट को भी तय करेगी।

आपको बता दे कि वर्तमान में RBI गवर्नर के पास एक तकनीकी सलाहकार समिति है जो उसे मौद्रिक नीति पर राय देने का कार्य करती है। यह राय स्वीकारना या नकारना गवर्नर पर निर्भर करता है।

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