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चंदा कोचर का आया इस घोटाले में नाम, चन्दा कोचर ने इस जुड़े लोन के बारे में आरबीआई को गुमराह किया

देश की तीन सबसे बड़ी कर्जदार कंपनियों में शामिल करता है. रिजर्व बैंक ने 12 ऐसे खातों की पहचान की थी, जिन्हें तत्काल एनसीएलटी के पास भेजे जाने की जरूरत है. एस्सार उसमे सबसे बड़ा कर्जदार था.

 Special Coverage News |  8 May 2019 10:26 AM GMT  |  दिल्ली

चंदा कोचर का आया इस घोटाले में नाम, चन्दा कोचर ने इस जुड़े लोन के बारे में आरबीआई को गुमराह किया
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गिरीश मालवीय

वीडियोकॉन लोन घोटाले में फंसी आईसीआईसीआई बैंक की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ चंदा कोचर अब एस्सार स्टील लोन घोटाले में फँसती हुई नजर आ रही है. ICICI बैंक के रिकॉर्ड्स यह दर्शा रहे हैं कि चन्दा कोचर ने एस्सार से जुड़े लोन के बारे में आरबीआई को गुमराह किया हैं.

ICICI बैंक ने सितंबर 2014 में आरबीआई को यह बताया कि भले ही बैंक ने बैंक एस्सास स्टील मिनिसोटा प्रोजेक्ट को क्षमता बढ़ाने को मंजूरी दे दी हो लेकिन वह किसी भी तरह से अतिरिक्त पैसा नहीं देगी लेकिन बैंक के रिकॉर्ड्स के हिसाब से यह तथ्य सही नहीं पाया गया, जून 2014 में बैंक ने 36.5 करोड़ डॉलर का लोन (करीब 2,540 करोड़ रुपये) मॉरिशस की एस्सार स्टील लिमिटेड को दिया.

रिकॉर्ड्स यह दर्शाते हैं कि कोचर ने इस मामले में आरबीआई को गुमराह किया। चंदा कोचर उस क्रेडिट कमेटी का हिस्सा थीं जिसने मॉरिशस की कंपनी को लोन दिया था, जांचकर्ताओं ने पाया कि चन्दा कोचर ने कंपनी एक्ट 2013 और सेबी लिस्टिंग के नियमों के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया.

आईसीआईसीआई बैंक एस्सार ग्रुप को कर्ज देने वाला सबसे बड़ा बैंक रहा हैं, अप्रैल, 2009 से मार्च, 2018 के बीच इस कंपनी को बैंक की तरफ से 71 लोन दिए गए. सूत्रों के मुताबिक इन कर्जों को लेकर हुई सभी बैठकों में से कम से कम 35 में चंदा कोचर ने हिस्सा लिया था.

सबसे खास बात यह है कि ICICI बैंक को मालूम था कि एस्सार समूह पर विदेशी ऋणदाताओं के पुनर्भुगतान शर्त के मुताबिक भुगतान न करने का रिकॉर्ड है और यह कम्पनी विदेशों में कई मुक़दमों और वसूली कार्रवाई का सामना कर रही है। कंपनी को लेकर कई शिकायतें आ रही थीं. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने एस्सार के लिए नेगेटिव रेटिंग दी थी, इन सबकी अनदेखी की गई और कर्ज देना जारी रखा गया.

दि इकनॉमिक टाइम्‍स की ख़बर के मुताबिक क्रेडिट सुइस का अनुमान है कि एस्‍सार समूह एक लाख करोड़ की कर्जदारी में है जो उसे देश की तीन सबसे बड़ी कर्जदार कंपनियों में शामिल करता है. रिजर्व बैंक ने 12 ऐसे खातों की पहचान की थी, जिन्हें तत्काल एनसीएलटी के पास भेजे जाने की जरूरत है. एस्सार उसमे सबसे बड़ा कर्जदार था.

2016 में ऐक्टिविस्ट और व्हिसल ब्लोअर अरविंद गुप्ता ने आरोप लगाया था कि एस्सार ग्रुप के रुइया ब्रदर्स को ICICI बैंक की ओर से मदद की गई ताकि उनके पति दीपक कोचर के न्यूपावर ग्रुप को 'राउंड ट्रिपिंग' के जरिए इन्वेस्टमेंट हासिल हो सके। पीएमओ को लिखे पत्र में गुप्ता ने आरोप लगाया कि रुइया ब्रदर्स ने कोचर के पति की कंपनी न्यूपावर की फंडिंग की है लेकिन पीएमओ ने उस पर कोई कार्यवाही नही की बल्कि चन्दा कोचर को हर तरह से बचाया गया.

साफ नजर आता है कि इतने बड़े पद पर बैठा व्यक्ति सरकार में बैठे लोगों की जानकारी में आए बिना ऐसा अपराध कर ही नही सकता है. ऐसे आर्थिक अपराधों में शामिल व्यक्तियों को कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए.

लेखक आर्थिक जगत के मामलों के जानकर है

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