Top
Begin typing your search...

देश में आर्थिक सुस्ती की मार, अब 8 कोर सेक्टर की ग्रोथ का हुआ बंटाधार, ताली पीट पीट कर खुश हो रही सरकार

उन्होंने कहा कि घरेलू एवं वैश्विक कारकों की वजह से जीडीपी वृद्धि की रफ्तार में सुस्ती आई है और सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अनेक कदम उठा रही है.

देश में आर्थिक सुस्ती की मार, अब 8 कोर सेक्टर की ग्रोथ का हुआ बंटाधार, ताली पीट पीट कर खुश हो रही सरकार
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

देश के अहम उद्योगों की वृद्धि दर (8 Core Sector Growth) में भी भारी गिरावट आई है. देश के आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि की रफ्तार जुलाई में घटकर महज 2.1 फीसदी रह गई है. यह गिरावट कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस तथा रिफाइनरी उत्पादों का उत्पादन घटने की वजह से आई है. आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली है. केंद्र सरकार (Govt. of India) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, कोयला (Coal) , कच्चा तेल (Crude Oil), प्राकृतिक गैस (natural gas) तथा रिफाइनरी उत्पादों की वृद्धि दर जुलाई में नेगेटिव रही है. अप्रैल-जुलाई की अवधि में आठों अहम उद्योग की वृद्धि दर तीन फीसदी रही थी, जो पिछले साल की समान अवधि में 5.9 फीसदी की दर से आगे बढ़ी थी.

इस्पात क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर 6.6 फीसदी रह गई, जो जुलाई, 2018 में 6.9 प्रतिशत थी. इसी तरह सीमेंट क्षेत्र की वृद्धि दर 11.2 फीसदी से घटकर 7.9 फीसदी रह गई. बिजली क्षेत्र की वृद्धि दर जुलाई में 4.2 फीसदी रही. पिछले साल समान महीने में यह 6.7 फीसदी थी. हालांकि, समीक्षाधीन महीने में उर्वरक का उत्पादन 1.5 फीसदी बढ़ा. पिछले साल समान महीने में उर्वरक क्षेत्र की वृद्धि दर 1.3 फीसदी रही थी.

तीन फीसदी रह गई है बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर

चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-जुलाई की चार माह की अवधि के दौरान बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर घटकर आधी यानी तीन फीसदी रह गई है. इससे पिछले वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर 5.9 फीसदी रही थी. इस साल अप्रैल से लगातार बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर नीचे आ रही है. अप्रैल में बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर 5.2 फीसदी रही थी, जो अप्रैल, 2018 में 5.8 फीसदी थी. मई में यह घटकर 4.3 फीसदी और जून में 0.7 फीसदी पर आ गई

सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का तमगा छिना

इससे पहले, पिछले दिनों जून तिमाही के आर्थिक विकास दर के आंकड़े जारी किए गए हैं, जो छह साल का निचला स्तर दर्शाता है. अप्रैल-जून तिमाही में विकास दर घटकर 5 फीसदी पर पहुंच गई है. इससे पहले बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में आर्थिक विकास दर 5.8 फीसदी रही थी. आर्थिक विकास दर में गिरावट के बाद भारत से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का तमगा छिन गया है. पहली तिमाही में देश की वृद्धि दर चीन से भी नीचे रही है. अप्रैल-जून तिमाही में चीन की आर्थिक वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत रही जो उसके 27 साल के इतिहास में सबसे कम रही है.

'विकास दर का पांच फीसदी पर रहना कोई कम नहीं'

आर्थिक विकास दर के आंकड़े सामने आने के बाद प्रतिक्रिया जताते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने कहा था कि जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में सुस्ती है, ऐसे में भारत की आर्थिक विकास दर का पांच फीसदी पर रहना कोई कम नहीं है. उन्होंने कहा कि घरेलू एवं वैश्विक कारकों की वजह से जीडीपी वृद्धि की रफ्तार में सुस्ती आई है और सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अनेक कदम उठा रही है.

देश की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ घटकर अगस्त महीने में गिरकर 15 महीने के निचले स्तर पर आ गई है. देश का जीएसटी संग्रह अगस्त में एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े से नीचे आकर लगभग 98 हजार करोड़ पर रुक गया है. देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया की बिक्री अगस्त महीने में 32.7 फीसद घट गयी है. लेकिन हमारी वित्तमंत्री कह रही कोई मंदी नही है. हम भी मान ही लेते है देश में कोई मंदी नहीं है.

Special Coverage News
Next Story
Share it