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रेल टिकटों की कालाबाजारी के बड़े रैकेट का खुलासा, जानकर चौंक जाएंगे..विदेशों तक जुड़े हैं तार?

रेलवे प्रटेक्शन फोर्स आरपीएफ ने एक ऐसे ई-टिकटिंग रैकेट का खुलासा किया है, जिसके तार दुबई, पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े हुए हैं।

 Arun Mishra |  22 Jan 2020 3:40 AM GMT  |  दिल्ली

रेल टिकटों की कालाबाजारी के बड़े रैकेट का खुलासा, जानकर चौंक जाएंगे..विदेशों तक जुड़े हैं तार?
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नई दिल्ली : रेलवे प्रटेक्शन फोर्स आरपीएफ (RPF) ने एक ऐसे ई-टिकटिंग (E-Ticket) रैकेट का खुलासा किया है, जिसके तार दुबई, पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े हुए हैं। आरपीएफ डीजी अरुण कुमार ने बताया कि इसके पीछे टेरर फंडिंग का शक है। जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस मामले में गिरफ्तार एक ही शख्स के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के 2,400 ब्रांचों में अकाउंट मिले हैं। इसका सरगना दुबई में बैठा है, जबकि भारत में बंगलूर से इसका संचालन होता है। इस सिलसिले में एजेंसियों ने ई-टिकट बुकिंग साफ्टवेयर बेचने वाले गुलाम मुस्तफा समेत 27 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब आइबी और एनआइए ने भी इसकी जांच शुरू कर दी है।

आरपीएफ के महानिदेशक अरुण कुमार ने बताया कि भुवनेश्वर से गिफ्तार गुलाम मुस्तफा ने अपने धंधे की शुरुआत 2015 में आइआरसीटीसी के एजेंट के रूप में की थी। बाद में भारत से दुबई गए हामिद अशरफ के संपर्क में आकर इसने ई-टिकटों की गैरकानूनी बिक्री का काम शुरू कर दिया। आरपीएफ द्वारा बंगलूर में डाले गए कई छापों में बार बार गुलाम मुस्तफा का नाम सामने आ रहा था। इसलिए ट्रैकिंग कर इसे गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद जब गुलाम मुस्तफा के लैपटॉप की जांच की गई तो उसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश, मीडिल ईस्ट, इंडोनेशिया और नेपाल तक के लिंक का खुलासा हुआ। इसके साथ ही मुस्तफा के पास से इन देशों के कई नम्बर भी मिले हैं। RPF के साथ गुलाम मुस्तफा की जांच IB और NIA भी कर रही है।

जानकारी के मुताबिक गुलाम मुस्तफा झारखंड के गिरिडीह का रहने वाला है। इससे पहले वह बंगलुरू में रेलवे के टिकट ब्लैक में बेचा करता था, बाद में E-Ticket का सॉफ्टवेयर बेचने लगा। हालांकि गुलाम मुस्तफा पढ़ा-लिखा नहीं है, लेकिन कंप्यूटर और हैकिंग करने में एक्सपर्ट है। उसके पास से ANMS सॉफ्टवेयर से IRCTC की 563 आईडी मिली है। बताया जा रहा है कि मुस्तफा एक विदेशी नम्बर का प्रयोग करता है और उसी के जरिए वॉट्स एप चैट पर बात करता है। इसके अलावा उसके पास से कॉड वर्ड मैसेज भी मिले हैं। जांच एजेंसी को हैरानी हुई जब उसे पता चला कि मुस्तफा के 2400 बैंक अकॉउंट स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में, जबकि 600 अकॉउंट रीजनल बैंकों में हैं। अधिकारी ने बताया कि उसके लैपटॉप और मोबाइल की फोरेंसिक जांच जारी है।

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