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साइरस मिस्त्री की बहाली पर ट्रिब्यूनल के फैसले को टाटा सन्स ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

ट्रिब्यूनल ने कहा था- मिस्त्री फिर से टाटा सन्स के चेयरमैन नियुक्त हों; टाटा सन्स को अपील के लिए 4 हफ्ते का वक्त मिला था

 Arun Mishra |  2 Jan 2020 7:09 AM GMT  |  दिल्ली

साइरस मिस्त्री की बहाली पर ट्रिब्यूनल के फैसले को टाटा सन्स ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
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नई दिल्ली : सायरस मिस्त्री के मामले में टाटा सन्स ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। नौ जनवरी को टाटा ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की बोर्ड बैठक होनी है। ऐसे में 6 जनवरी को जब सुप्रीम कोर्ट खुलेगा तो टाटा सन्स के वकील तुरंत सुनवाई की मांग कर सकते हैं। एनसीएलएटी ने 18 दिसंबर को मिस्त्री के पक्ष में फैसला देते हुए उन्हें फिर से टाटा सन्स के चेयरमैन नियुक्त करने का आदेश दिया था। अपील के लिए टाटा सन्स को 4 हफ्ते का वक्त मिला था।

अपीलेट ट्रिब्यूनल ने टाटा सन्स-मिस्त्री मामले में फैसला देते हुए कहा था कि टाटा सन्स को पब्लिक से प्राइवेट कंपनी में बदलने की मंजूरी देने का फैसला गैर-कानूनी था। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) ने इस पर ऐतराज जताते हुए कहा कि कानून के मुताबिक ही मंजूरी दी गई थी। आरओसी ने अपीलेट ट्रिब्यूनल के फैसले से गैर-कानूनी शब्द हटाने की अपील की है। इस मामले में ट्रिब्यूनल ने सुनवाई शुक्रवार तक टाल दी। ट्रिब्यूनल ने कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री से कंपनीज एक्ट के नियमों के तहत प्राइवेट और पब्लिक कंपनियों की परिभाषा का ब्यौरा मांगा है।

सितंबर 2017 में टाटा सन्स को पब्लिक से प्राइवेट कंपनी बनाने के लिए शेयरधारकों ने मंजूरी दी थी। उसके बाद आरओसी ने टाटा सन्स को प्राइवेट कंपनी के तौर पर दर्ज किया था। सायरस मिस्त्री परिवार इसके खिलाफ था। मिस्त्री परिवार के पास टाटा सन्स के 18.4% शेयर हैं। टाटा सन्स टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है।

टाटा सन्स के बोर्ड ने 24 अक्टूबर 2016 को मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटा दिया था। बोर्ड के सदस्यों का कहना था कि मिस्त्री पर भरोसा नहीं रहा। इसके बाद दिसंबर 2016 में मिस्त्री ने टाटा ग्रुप की कंपनियों के निदेशक पद से भी इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने चेयरमैन के पद से हटाने से फैसले को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में चुनौती दी थी। मिस्त्री ने टाटा सन्स के प्रबंधन में खामियों और अल्प शेयरधारकों को दबाने के आरोप लगाए थे। हालांकि, एनसीएलटी ने पिछले साल जुलाई में टाटा सन्स के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद मिस्त्री अपीलेट ट्रिब्यूनल पहुंचे थे।

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