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मीडिया तेरी गजब की माया!

मीडिया तेरी गजब की माया!

आज मोदी कैबिनेट का एक बार फिर विस्तार हुआ. इस विस्तार ने अधिकारी से राजनेता बने आर के सिंह जैसै कड़क और ईमानदार अधिकारी को नयी उर्जा ही नही दी बल्कि अंधेरे से बिहार को उबारने और देश को रौशन करने का जिम्मा उन्हें सौंपा.अपने नाम के अनुरूप देवताओं की सेहत का जिम्मा रखने वाले अश्विनी चौबे जी को अब जनता की सेहत दुरूस्त रखने का जिम्मा दिया गया है जिसे वेबिहार जैसे बीमारू राज्य में पहले ही अपनी सेवा देकर बिहार को निरोग बना चुके हैं. कहते हैं कि औरत अबला होती है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेवारी पुरूष की होती है. लेकिन मोदी जी ने देश के एक अरब से ज्यादा की आबादी जिसमें आधे से अधिक पुरूष है उनकी सुरक्षा यानि पूरे देश की सुरक्षा एक मजबूत महिला के हाथों सौप दी है.


वे अब अपनी कौन कहे पूरे देश की सुरक्षा करेगी. ये अलग बात है कि उनके नाम की सीता राम राज्य हो या रावण राज्य हर समय वनवास ही भोगती रही है. खैर अगर पूरे मंत्रिमंडल के हरेक मंत्रियों के बारे में बखान करूं तो शायद काफी वक्त लगेगा और उसकी जरूरत नही . मूल बात पर मै लौटना चाहता हूं जो आपने शीर्षक के रूप में देखा है. पिछले एक सप्ताह और कम से कम तीन दिनों से मीडिया की सुर्खियों में इस कैबिनेट विस्तार की खबरे ब्रेंकिग में और लाइव के मूड में इलेक्ट्रानिक मीडिया में तो बड़े - बड़े हेडलाइन के साथ अखबारों की सुर्खियो में भी दिखाई दे रही थी. अमुक नेता बनेगें मंत्री . अमुक दल भी होगा मंत्रिमंडल में शामिल .


कुछ पत्रकार मित्रों ने मंत्रियो के विभाग भी बांट दिये थे जैसे की मोदी और अमित शाह के वे बेहद करीबी हो जो मोदी तीन वर्षो के कार्यकाल में एक बार प्रेस कांफ्रेस सही तरीके से नही बुलायी. परिणाम जब कैबिेनेट का विस्तार हुआ तो अधिकांश भविष्यवाणियां फेल और मीडिया और सोशल मीडिया में मत्री बनने वाले तथाकथित नेताओं के कपड़े सिले रह गये और उनके समर्थकों की मिठाईया और माला धड़े रह गये. अब फिर खबरों में पिट चुके ये तथा कथित पत्रकार खुद बता रहे हैं कि अगर जद यू सरकार में शामिल होती तो टूट जाती . वाह क्या तर्क है. नेता राजनीति करे तो कोई और बात है. उसका तो काम ही है अपने विरोधियो पर निशाना साधना . लेकिन क्या पत्रकारो का भी अब यही काम रह गया है. पिछले एक महीने में शायद यह पहली नही बिहार के संदर्भ में कहें तो तीसरी घटना है.


दूसरी घटना के लिये कुछ और पीछे चले. पी एम का बिहार दौरा . 26 अगस्त के बिहार दौरे पर मीडिया ने बजाप्ता पी एम के कार्यक्रम का विस्तृत विवरण भी ब्रेक कर दिया. एक घंटे हवा में तीन घंटे पटना में . सीएम हाउस में भोज का आयोजन भी करा दिया . गुजराती भोजन का आर्डर भी दिलवा दिया. मुझे अच्छी तरह से याद है कि जब ये खबरे चली तो सचिवालय के एक बड़े अधिकारी और राज्य भाजपा के एक बड़े नेता ने हाथ जोड़कर कहा प्रभु आपलोग धन्य है. पीएमओ से मुख्यमंत्री सचिवालय को कोई खबर नही और आप लोग तो पूरा कार्यक्रम चला देते हैं. एक दिन के बाद जब पीएम ओ से सूचना आयी तो सब बेकार . पीएम पूर्णियां आये और वही से चले भी गय.


इस खबर पर विरोधी दल के नेता आखिर सच्चाई जानने की कोशिश क्यो करें उन्होने तो इसी बहाने साधा निशाना की मोदी ने नीतीश के भोज का किया वहिष्कार. अब कोई कैसे समझाये कि भला बाढ या आपदा के समय डीनर पोलिटिक्स होता है क्या. इतना ही नही दर्जनो ऐसे उदाहरण है जो कभी प्रिंट मीडिया में गप शप या कानोकान कालम का हिस्सा होता था जिसका सच्चाई से कम चटखारे से ज्यादा संबंध था आजकल वह ब्रेकिंग का रूप लेता जा रहा है. एक छोटी सी घटना की चर्चा कर मैं इसका अंत करना चाहूंगा . बिहाऱ विधान सभा के मानसून सत्र के दो दिन पहले टी वी न्यूज चैनलों पर राजद विधायक दल की बैठक दिन में 2 बजे से होने की खबर चली .


बाद में पता चला कि आज तो वह बैठक नही है उसे तो कल होना . फिर उसमें सुधार हुआ कि बैठक अब कल होगी. यानि अपनी खबर को सच साबित करने के लिये बैठक को टालने की खबर चली . मुझे पूरी तरह से याद है जब दूसरे दिन बैठक के बाद प्रेस ब्रीफिंग के लिये राजद के मुख्य सचेतक आये तो उन्होनें सामने वाले एक अधिकारी से पूछा कि मैं मुख्य सचेतक हूं मैने बैठक आज रखी थी तो एक दिन पहले खबर कैसे चल गयी. इस पर सामने वाले अधिकारी ने भी आश्चर्य व्यक्त किया .



भला उन्हें कौन बताये कि मीडिया की माया क्या होती है.खैर कैबिनेट का विस्तार हो गया है अब उम्मीद की जा रही है कि मीडिया सूत्रो से खबर चलायेगी कि आखिर नीतीश जी सरकार में शामिल क्यो नही हुए , उनकी शर्त को कैसे मोदी ने ठुकरा दिया .. एन डी ए में खट पट शुरू . फिर 2019 की भविष्यवाणी अभी ही शुरू होगी. जद यू को कैबिनेट में लिया जाता तो कुशवाहा भाग जाते . नकली जद यू को भला मोदी क्यो लेगें कैबिनेट में . कल से इस पर पैनल डिस्कशन होगा और पक्ष और विपक्ष के नेता अपना तर्क रखेगें. वाह रे मीडिया तेरी अजब कहानी तू जो कहे वही हो सबकी जुवानी.लेकिन अंत में इस कैबिनेट विस्तार से जहां एक मंत्री पद बिहार को ज्यादा मिला वही पेट्रोलियम . कृषि , उर्जा , स्वास्थ्य , ग्रमीण विकास , लघु उद्योग जैसे महत्वपूर्ण विभाग बिहार के हिस्से में आया है इसके लिये प्रधान मंत्री और नये मंत्रियो को बधाई.

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