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हंसुआ के बियाह में खुरपी का गीत बज रहा है!

मोदीजी भी कम नहीं हैं। आर्थिक सम्‍मेलन में जलवायु परिवर्तन पर बात करने की क्‍या ज़रूरत थी?

 अभिषेक श्रीवास्तव जर्न� |  2018-01-24 16:11:59.0  |  दिल्ली

हंसुआ के बियाह में खुरपी का गीत बज रहा है!

जाने किसकी नज़र लग गई वसंत को। रात से ही मौसम ऐसा खराब हुआ कि भीगे हुए गली-चौराहों पर फिर से अलाव जलने लगे। उत्‍तरायण के बाद शिमला में मौसम की पहली बर्फबारी हुई है। ऑल इंडिया रेडियो ने ट्विटर पर बर्फबारी का वीडियो जारी किया है। सीलिंग के खिलाफ दिल्‍ली की सडकों पर उतरे व्‍यापारी डबल स्‍वेटर और जैकेट में हलकान दिखे तो शुक्‍लाजी ने मौज ली- केजरीवाल ने कहा है कि इस बेमौसम बारिश के लिए मोदी जिम्‍मेदार है।


मोदीजी भी कम नहीं हैं। आर्थिक सम्‍मेलन में जलवायु परिवर्तन पर बात करने की क्‍या ज़रूरत थी? मौसम का रुख़ भांप कर लगे हाथ ममता दीदी ने एक साथ नेताजी और बाल ठाकरे को श्रद्धांजलि दे दी है। साथ में रमेश सिप्‍पी को हैप्‍पी बर्थडे भी बोल दिया है। शिवसेना अकेले चुनाव लड़ने पर आमादा है। राहुल गांधी पूछ रहे हैं कि एक फीसदी लोगों के पास 73 फीसदी पैसा क्‍यों है। सम्बित पात्रा ने मौलिक जवाब दिया है कि इसके लिए कांग्रेस जिम्‍मेदार है। उधर ऑस्‍कर में ''द शेप ऑफ वाटर'' को सबसे ज्‍यादा तेरह श्रेणियों में नॉमिनेशन मिल गए हैं गोकि अपने यहां बरसों पहले कबीर कह गए कि सारा भेद भांडे का है, पानी सब में एक है।

तर्ज ये कि हंसुआ के बियाह में खुरपी का गीत बज रहा है। अकेले कम्‍युनिस्‍ट पार्टी है जो हंसुए से खफ़ा अपने गीत-अगीत में मस्‍त है। वहां आज भी दो लाइनों का संघर्ष कायम है। सवाल यह नहीं है कि क्रांति होगी या नहीं। सवाल यह है कि भागदौड़ जारी है या नहीं। एक पत्रकार की पत्रिका यूपी में सपा की सरकार जाते ही बंद हो गई थी। उसने लेखकों और पत्रकारों का सारा मेहनताना मार लिया और आज नौ महीने बाद अचानक टिप्‍पणी की है- ''प्रकाश करात वाम जगत के घनघोर दक्षिणपंथी बन रहे हैं।''
इन सबसे अलहदा हमारे सिंह साहब अकेले में मुसलमान बनने की सोच रहे हैं। उन्‍हें लगता है कि हिंदू धर्म में जातियों का असर्शन हिंदुत्‍व को खत्‍म कर रहा है। इससे बेहतर है कि मुसलमान बन जाया जाए। न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। उन्‍हें मैंने दीनदयाल उपाध्‍याय पर सुभाष गाताड़े की किताब गिफ्ट कर दी है। शायद उनका मन बदले। वैसे ही देश में असली हिंदू अल्‍पसंख्‍यक हो गए हैं। जय राजपुताना! जय पद्मावत!
Post-Script: मधु किश्वर वैज्ञानिक बन गयी हैं!

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