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बड़ा खुलासा: 'हिंदू राष्‍ट्र' के कथित प्रोजेक्‍ट वाले लोग असल में हिंदू विरोधी हैं!

 अभिषेक श्रीवास्तव जर्न� |  2017-10-22 08:15:45.0  |  दिल्ली

बड़ा खुलासा: हिंदू राष्‍ट्र के कथित प्रोजेक्‍ट वाले लोग असल में हिंदू विरोधी हैं!

मैं जब किसी से कहता हूं कि 'हिंदू राष्‍ट्र' के कथित प्रोजेक्‍ट वाले लोग असल में हिंदू विरोधी हैं, तो इसे समझाने में वक्‍त लगता है। फिर मैं कहता हूं कि राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ ब्राह्मणवादी है, तो यह थोड़ा जल्‍दी समझ में आ जाता है। फिर मैं कहता हूं कि योगी आदित्‍यनाथ जिस परंपरा से आते हैं, वह परंपरा अपने मूल में आरएसएस विरोधी है, तो गड़बड़झाला हो जाता है। अपने गृहजिले यूपी के ग़ाज़ीपुर स्थित करंडा के ब्राह्मणपुर गांव में आज हुई एक संघ ब्‍लॉक कार्यवाह की हत्‍या इस जटिल जाले को साफ़ करती है। राजेश मिश्र पिछले चार-पांच साल की पैदाइश थे वरना बीसों साल से काम कर रहे इलाके के पत्रकारों ने उनका नाम नहीं सुना था। उनके पत्रकार होने का कुल मतलब और मकसद दैनिक जागरण में संघ के आयोजनों से जुड़ी खबरें छपवाना था। इसके लिए पैसे नहीं मिलते हैं। यह धर्मार्थ पत्रकारिता है।



उन्‍हें तड़के मार दिया गया। ब्राह्मणपुर में ब्राह्मण की निर्मम हत्‍या! हत्‍या तो वैसे भी त्रासद और अतिनिंदनीय है ही, हत्‍यारे को कुम्‍भीपाक नरक का योग अलग से बनेगा। योगीराज में रायबरेली में बर्बर तरीके से मारे गए पांच ब्राह्मणों के बाद यह दूसरी ऐसी घटना है जो चौबीस घंटा बीतने से पहले राष्‍ट्रीय हो गई है। संघ के कार्यकर्ताओं ने ग़ाज़ीपुर जिला अस्‍पताल के बाहर जमकर बवाल काटा है। डैमेज कंट्रोल के लिए मनोज सिन्‍हा से लेकर आइजी, डीआइजी सब पहुंच गए। ऐसे कौन से खास शख्‍स थे राजेश मिश्रा? मामला आदमी के वज़न का नहीं है, संघ का है। आप ख़बरें देखिए। लुधियाना और केरल में संघ कार्यकर्ताओं की हत्‍या के साथ इसे जोड़ा जा रहा है। बड़ा नैरेटिव बन रहा है।

यहां दो स्‍तरों पर अंतर्विरोध है। एक संघ के भीतर ब्राह्मण वर्चस्‍व बनाम सरकार के भीतर ठाकुर वर्चस्‍व का। दूसरा, योगी की हिंदू युवा वाहिनी बनाम संघ/बीजेपी का। हो सकता है उतना प्रत्‍यक्ष दिखता न हो, लेकिन भीतर-भीतर खड़बड़ाहट है। यूपी में बीजेपी की इकाइयां संकट में हैं। हिंदू युवा वाहिनी बीजेपी और संघ की कीमत पर मोटाती जा रही है। इसीलिए ग़ाज़ीपुर की एक मामूली (इस लिहाज से कि मामला सामान्‍य रंजिश आदि का होना चाहिए) घटना राजनीतिक रूप से दूर तक जाने की क्षमता रखती है। खींचने वाला मिल गया तो योगी भी कम जडि़यल नहीं हैं। भाजपा को ले डूबेंगे या फिर खुद मठ वापसी हो जाएगी।

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