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तो यह ही है जनधन खाते की असलियत!

So this is the realization of the funding account

 रवीश कुमार |  2017-08-17 07:13:13.0

तो यह ही है जनधन खाते की असलियत!

आज के इकनोमिक टाइम्स के पेज नंबर 14 पर मदन सबनवीस ने जनधन खाते का विश्लेषण किया है। मैं उसका हिन्दी में सार प्रस्तुत कर रहा हूँ।

दिसंबर 2014 तक जनधन खाता- 10.8 करोड़ था।

दिसंबर 2016 तक 26.2 करोड़ खाता हो गया।

इन खातों में औसत बैलेंस दिसंबर 2016 में सबसे ऊँचे शिखर पर पहुँचा जब नोटबंदी हुई जिसमें लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई जमा की। यह भी आरोप लगा कि काला धन जमा हुआ है। अभी तक जाँच होने की बात कही जा रही है।

इस वक्त जनधन खाते में उतना ही पैसा है जिससे मनरेगा के मज़दूरों को 22 दिनों का भुगतान हो सकता है। नोटबंदी के बाद हर खाते से पाँच रुपया निकल गया।

ज़ीरो बैंलेस खाते में ख़ूब तेज़ी से गिरावट आई मगर अब फिर से इसकी संख्या मामूली ही सही लेकिन बढ़ती हुई देखी जा रही है।

2014 तक ज़ीरो बैंलेस खाता- 73.3%

2016- 24.1% और फ़रवरी 2017 में 24.9% हो गया है।

जनधन से पहले मार्च 2014 तक प्रति खाता औसत जमा राशि 21,156 रुपये थी। मदन कहते हैं कि इसका मतलब यह हुआ की उस वक्त तक लोगों के पास पैसा था, बिजनेस था और बैंक भी अच्छा कर रहे थे।

एक सज्जन ने कमेंट बाक्स में कहा है कि खातों की संख्या में वृद्धि से औसत में कमी आई होगी ।

दिसंबर 2016 तक बैंकों में प्रति खाता औसत जमा राशि घटकर मात्र 3,571 रुपये हो गई है। मई 2017 में गिरकर प्रति खाता 2,231 रुपये हो गया । दिसंबर 2016 से मई 2017 के बीच खातों की संख्या में कितनी वृद्धि हुई , यह नहीं बताया है। अगर खातों की संख्या बढ़ने से औसत कम होता तो दिसंबर 2015 में नॉन ज़ीरो खातों का औसत प्रति खाता 2160 रुपये बढ़कर दिसंबर 2016 में 3,571 रुपये नहीं होता।

मदन कहते हैं कि जनधन खाते को चलाने में बैंकों का लागत बढ़ गया। उन्हें इस कारण भी संकट का सामना करना पड़ रहा है। यह भी देखना होगा कि लोग बैंकिंग की आदत बना पा रहे हैं या नहीं । उससे पहले यह भी देखिये कि लोगों की क्षमता बैंकों में जमा करने ती है भी या नहीं ।

मदन सबनवीस CARE ratings के मुख्य अर्थशास्त्री हैं और अखबार ने इसे उनकी निजी राय कहा है। सबनवीस ने प्रधानमंत्री कार्यालय की साइट पर मौजूद जनधन को आंकडों के आधार पर विश्लेषण करने का दावा किया है।

मैं इस तरह से बिजनेस की खबरों को समझने का प्रयास कर रहा हूँ। एक तरह से अनुवाद ही है। बेहतर होगा आप भी इसमें कुछ जोड़ें। इसी बात पर कमेंट करें वरना अब विषय से अलग कमेंट डिलिट करना शुरू करूँगा और ब्लाक भी। मेरा मकसद सीखना है।

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