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लालू की इस अदा पर भला कौन नही हो फिदा!

जो भी हो संकट के समय में धैर्य रखना और खुद को तनाव मुक्त दिखना लालू की ही अदा हो सकती है.

 अशोक कुमार मिश्र |  2018-01-11 09:27:05.0  |  दिल्ली

लालू की इस अदा पर भला कौन नही हो फिदा!

कल बुधवार को एक पत्रकार मित्र के मां के श्राद्ध कर्म में शामिल होने समस्तीपुर जा रहा था तो रास्ते में गाड़ी में सवार एक आम जन और हमारे प्रवीण बागी सर के बीच राजद सुप्रीमो के संबंध में बात चीत चल रही थी और सफर के अंत तक बातचीत का लब्बोलुआब यह था कि लालू प्रसाद जी के संकट का मुख्य कारण उनका बड़बोला पन है.


लेकिन राजनीति के जानकार लोगों का मानना है कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद का यह बड़बोलापन ही उन्हें सूबे और देश के अन्य राजनेताओं से अलग दिखाता है. मेरे जैसे लोगों का तो मानना है कि लालू प्रसाद बिहार क्या देश के कुछ गिने चुने नेताओं में से हैं जो जनता से सीधा संवाद करना जानते है और उनकी इस अदा पर उनके समर्थकों की कौन कहे उनके विरोधी भी फिदा होते हैं.


उदाहरण के तौर पर बुधवार को रांची की सीबीआई कोर्ट के जज शिवपाल सिंह और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के बीच कोर्ट रूम में हुए संवाद को देख लीजिये. कोर्ट परिसर में पहुंचने के बाद सबसे पहले मीडिया कर्मियों से लालू मजाकिया अंदाज में कहते है कि फोटो लेना है तो ले लो धक्का मुक्की मत करो . फिर शिवपाल सिंह जी से तीन साल से कम सजा देने का आग्रह और उन्हें चूड़ा दही खिलाने का आमंत्रण देने की बात कह कर लालू अदालत के माहौल को भी खुशनूमा बनाने में कोई कसर नही छोड़ना चाहते . वह भी ऐसे वक्त जब लालू को उसी कोर्ट से साढे़ तीन साल की सजा मिली हो और उसी जज के खिलाफ लालू सुप्रीम कोर्ट तक गये ताकि उनका केंस उस कोर्ट से हटाकर दूसरे जज के पास ट्रांसफर कर दिया जाये.


शिवपाल सिंह जी और लालू प्रसाद जी के बीच संवाद में जहां लालू शिवपाल जी को दही चूड़ा का निमंत्रण देते हैं तो जज भी लालू को जेल के अंदर ही इसे उपलब्ध कराने की बात कहते हैं. ओपन जेल मामले पर भी जज साहब का यह कहना कि आपके ओपन जेल में रहने से वहा की स्थिति सुधरेगी.लालू द्वारा सजा कम किये जाने के आग्रह पर जज का यह सांकेतिक शब्द का इस्तेमाल करना कि आप पहले काहे बोल देते हैं साफ है कि जज कही ना कही लालू के इस अदा से प्रभावित है.


खैर जो भी हो संकट के समय में धैर्य रखना और खुद को तनाव मुक्त दिखना लालू की ही अदा हो सकती है. शायद इसी अदा का भी एक प्रभाव है कि एक तरफ लालू के लिये दो समर्थक जेल जाने के लिये भी तैयार तो एक एस डी एम सेवा से बर्खास्त होने को तैयार. और इतना होने के बाद भी लालू का यह कहना कि जेल में उनके पास इतना दही चूड़ा आ गया है कि वे जेल के सभी कैदियों को खिला सकते हैं. ये लालू के बूते की बात है. भला लालू की इस अदा पर कौन ना हो फिदा.

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