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निर्भया गैंगरेप केस में दोषी विनय ने राष्‍ट्रपति के पास दाखिल दया याचिका वापस ली- सूत्र

 Special Coverage News |  13 Dec 2019 5:25 AM GMT  |  दिल्ली

निर्भया गैंगरेप केस में दोषी विनय ने राष्‍ट्रपति के पास दाखिल दया याचिका वापस ली- सूत्र

नई दिल्‍ली : देश की राजधानी दिल्ली में दिसंबर 2012 में हुए निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी विनय कुमार ने राष्‍ट्रपति के यहां दाखिल अपनी दया याचिका वापस ले ली है. गृह मंत्रालय के उच्‍च पदस्‍थ सूत्रों के हवाले से यह जानकारी मिली है. इस तरह गृह मंत्रालय और राष्‍ट्रपति भवन के पास अब कोई भी दया याचिका लंबित नहीं है.

उल्‍लेखनीय है कि इस मामले में बीते मंगलवार को नया मोड़ आ गया था. फांसी की सजा का सामना कर रहे मामले के चार दोषियों में से एक विनय कुमार ने राष्ट्रपति के यहां दया याचिका दाखिल की थी. गिरफ्तारी के बाद से ही विनय कुमार शर्मा दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है. हालांकि बाद में विनय की तरफ से कहा गया था कि उनकी तरफ से राष्‍ट्रपति के पास कोई दया याचिका दायर नहीं की गई है.

वहीं, निर्भया रेप मामले (Nirbhaya rape case) में सभी चारों दोषियों को आज (13 दिसंबर) पटियाला हाउस कोर्ट (Patiala House Court) में उपस्थित न कर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उनको पेश किया जा सकता है. पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दोषियों को निर्भया (Nirbhaya) के माता-पिता की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी किया था. निर्भया के माता-पिता ने अदालत में दोषियों को फांसी देने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए याचिका दायर की है, जिसपर सुनवाई हो रही है. इसी के साथ जेल अधिकारियों द्वारा कोर्ट में एक स्टेट्स रिपोर्ट भी दायर की गई है जिसमें चारों दोषियों द्वारा उपयोग में लाए गए कानूनी उपायों पर चर्चा की गई है.

गौरतलब है कि 16 दिसंबर, 2012 को दक्षिणी दिल्ली के मुनीरका में एक प्राइवेट बस में अपने एक दोस्त के साथ चढ़ी 23 साल की पैरा मेडिकल छात्रा के साथ एक नाबालिग सहित छह लोगों ने चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म और लोहे के रॉड से क्रूरतम आघात किया गया था. इसके बाद गंभीर रूप से घायल पीड़िता और उसके पुरुष साथी को चलती बस से महिपालपुर में बस से नीचे फेंक दिया गया था. गंभीर अंदरूनी जख्मों के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था, जहां कुछ दिनों बाद उसने दम तोड़ दिया था. इस मामले में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से पांच को अदालत ने दोषी ठहराया और मृत्युदंड सुनाया. इसमें से दोषी राम सिंह ने बाद में जेल में आत्महत्या कर ली थी. छठा आरोपी नाबालिग था, जिसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया था.

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