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अयोध्या फैसले के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने ट्विटर पर क्यों डाला ये बुक कवर?

 Special Coverage News |  9 Nov 2019 8:54 AM GMT  |  दिल्ली

अयोध्या फैसले के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने ट्विटर पर क्यों डाला ये बुक कवर?

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर फ़ैसला दे दिया है. जहां बाबरी मस्जिद के गुंबद थे, वो जगह अब हिंदू पक्ष को मिलेगी. साथ ही सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए पाँच एकड़ ज़मीन उपयुक्त जगह पर दी जाएगी.

दशकों पुराने इस विवाद में हिंसक संघर्ष, विरोध प्रदर्शन और कई बड़े राजनीतिक घटनाक्रम शामिल रहे हैं. लंबे कानूनी सफ़र के बाद सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला सोशल मीडिया पर छाया हुआ है. अभी भारत में गूगल पर अयोध्या, राम जन्मभूमि, सुप्रीम कोर्ट, बाबरी मस्जिद, राम और विश्व हिंदू परिषद जैसे शब्द सबसे ज़्यादा सर्च किए जा रहे हैं.

फ़ैसला आने के डेढ़ घंटे बाद तक ट्विटर पर टॉप 10 ट्रेंड्स अयोध्या विवाद से जुड़े थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा है कि इससे पता चलता है कि क़ानूनी तरीके से कोई भी विवाद सुलझाया जा सकता है और क़ानून की नज़र में सब बराबर होते हैं.


कवि कुमार विश्वास ने मुस्लिम पक्ष के पैरोकार इक़बाल अंसारी की ओर से फ़ैसला मंज़ूर किए जाने की ख़बर को रिट्वीट करते हुए अल्लामा इक़बाल का शेर लिखा है.

एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इस फ़ैसले पर कुछ लिखा नहीं है लेकिन एक किताब का कवर पेज शेयर किया है. ऑक्सफ़ोर्ड इंडिया से छपी इस किताब का नाम है, "सुप्रीम बट नॉट इनफ़ैलिबल." यानी "शीर्ष किंतु अचूक नहीं." इस किताब में सुप्रीम कोर्ट से जुड़े निबंध हैं. किताब के संपादकों में राजीव धवन भी शामिल हैं जो इस मुक़दमे में सुन्नी पक्ष की पैरवी कर रहे थे.


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने जो फ़ैसला दिया है वो ऐतिहासिक है और इसे सहज रूप से सभी को स्वीकारना चाहिए. मैं ये भी मानता हूं कि इससे सर्वधर्म समभाव की भावना मज़बूत होगी. मैं सभी से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील करता हूं."

कांग्रेस नेता राज बब्बर ने इस फ़ैसले को स्वीकार करने और शांति और एकता बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने लिखा, "सभी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च हमें मानवता सिखाते हैं. हमारी अदालतें मानवता के आदर्शों में हमारा भरोसा बनाए रखती हैं. आइए देश में शांति, सुरक्षा और एकता बनाए रखने की भावना के साथ अयोध्या के फ़ैसले को स्वीकार करें."

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