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दिल्ली में आप के चुनावी धमाल से एनआरआई समूह इस बार गायब

डॉ.रायज़ादा ने बीते हफ्ते वेब सिरीज़ के ट्रेलर के साथ दो गाने, 'बोल रे दिल्ली बोल' और "कितना चंदा जेब में आया" भी रिलीज़ किया।

 Shiv Kumar Mishra |  22 Jan 2020 12:49 PM GMT  |  दिल्ली

दिल्ली में आप के चुनावी धमाल से एनआरआई समूह इस बार गायब

दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर दिल्ली में चुनावी सरगर्मियाँ तेज़ हो गयीं हैं। दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी प्रचार खूब ज़ोर-शोर से कर रहे हैं, लेकिन एक हैरानी की बात है इस बार!

वह है कि उनके चुनावी धमाल से एन.आर.आई. समूह इस बार गायब हैं। पिछली बार 2013 और 2015 के विधानसभा चुनाव में तो बाक़ायदा बड़ी संख्या में एन.आर.आई. समर्थक महीने भर पहले से ही अरविंद के पक्ष में माहौल बनाने में जी-जान से लग गए थे।

आखिर इस बार उनका अरविंद से मोह क्यों भंग हो गया है?

आम आदमी पार्टी के पूर्व एन.आर.आई. सह-संयोजक डॉ मुनीश रायज़ादा शिकागो से ही अपना एक वक्तव्य जारी कर इस राज़ पर से पर्दा हटाते हुए बताते हैं कि, अरविंद ने उस समूह को नज़रअंदाज़ किया जिसने उनको तन-मन और धन से साथ दिया था।

विदेशों में रह रहे अप्रवासी भारतीय लोगों ने अपनी अच्छी-खासी नौकरियों को और पेशे को दरकिनार करते हुए देश के बदलते राजनीतिक माहौल में अरविंद को कंधे से कंधा मिलाकर हर तरह से मदद की। लेकिन इसके बदले में उन्हें मिला क्या? यह समूह निस्वार्थ भावना से व्यवस्था परिवर्तन की उम्मीद से जुटा था, अरविन्द के साथ। परन्तु अरविन्द ने आम आदमी पार्टी के सारे मूलभूत सिद्धांतों को दरकिनार कर दिया।

चुनाव जीतने के बाद जब उन्हें लगा कि अब एन.आर.आई.का उनके लिए उपयोगिता समाप्त हो गयी है तो उन्होंने इस विंग को ही भंग कर दिया।

रायज़ादा ने शिकागो से ही प्रेस स्टेटमेंट जारी कर सूचित किया है कि वह अगले सप्ताह 51 एन.आर.आई. लोगों के जत्थे के साथ दिल्ली पहुंच रहे हैं। उनके साथ वो लोग शामिल होंगे जो आम आदमी पार्टी के अपने मूल विचारधारा से यू-टर्न लेने से नाराज़ हैं।

रायज़ादा बताते हैं कि आम आदमी पार्टी का गठन वित्तीय पारदर्शिता, आतंरिक लोकतंत्र और राइट टू रिजेक्ट व राइट टू रिकॉल के सिद्धांतों पर हुआ था। साथ ही आंतरिक जांच सिस्टम भी लागू हुआ था। ये पार्टी के मजबूत स्तम्भ की तरह थे लेकिन गत पांच वर्षों के दौरान अरविंद केजरीवाल ने इन सबको तिलांजलि दे दी है।

वह अब ऐसी राजनीति में लिप्त हो गए, जिसे समाप्त करने के लिए ही पार्टी का गठन किया गया था। उन्होंने पार्टी को एक तरह से अपनी जागीर समझ लिया है। ऐसा माहौल बना दिया कि उनके बराबर कोई दूसरा खड़ा न हो सके। वह अपने समानांतर कोई दूसरे नेता को बनने ही नहीं दे रहे हैं। चुनाव में उनके पसंद के लोगों को ही टिकट दिया जाता है।

रायज़ादा बताते हैं कि जब उन्होंने पार्टी के नेताओं से पार्टी के सिद्धांतों के बारे में पूछा तो उनसे कहा गया कि हम केवल दिल्ली में होने वाले काम पर ध्यान दें।

गवर्नेंस की आड़ में वह लोगों को असल मुद्दों से भटका रहे हैं। वह इस सच्चाई को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते हैं कि बिना मूल सिद्धांतों के किसी संस्थान का आस्तित्व लंबे समय तक नहीं रह सकता है।

जिस पार्टी को हजारों लोगों नें अपने खून-पसीने से सींचा था। आज वह किसी एक व्यक्ति की जागीर बन गयी है है। केजरीवाल इस तरह बेशर्मों की तरह कैसे किसी पार्टी का अपहरण कर सकते हैं? दिल्ली वालों को केजरीवाल की कुत्सित मानसिकता को समझना चाहिए और इस बार चुनाव में उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।

रायज़ादा कहते हैं कि एन.आर.आई. जत्था दिल्ली आकर कैंपेन करेगा और लोगों के घरों तक जाकर उनसे केजरीवाल को चंदा नहीं देने की अपील करेगा। क्योंकि उन्होंने अपने पार्टी के वेबसाइट से चंदे का विवरण हटा दिया है।

बता दें की डॉक्टर रायज़ादा ने अन्ना आंदोलन और आम आदमी पार्टी पर एक छः एपिसोड की वेब सिरीज़ भी बनाई है। " ट्रांसपेरेंसी: पारदर्शिता " नामक यह वेब सिरीज़ जल्द ही ओ.टी.टी प्लेटफार्म पर रिलीज़ होगी। डॉ.रायज़ादा ने बीते हफ्ते वेब सिरीज़ के ट्रेलर के साथ दो गाने, 'बोल रे दिल्ली बोल' और "कितना चंदा जेब में आया" भी रिलीज़ किया।

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