दिल्ली

UP में 1586 थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए टॉयलेट की सुविधा, 2001 में राजनाथ सिंह ने जारी किया था बजट

Smriti Nigam
13 Aug 2023 12:16 PM IST
UP में 1586 थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए टॉयलेट की सुविधा, 2001 में राजनाथ सिंह ने जारी किया था बजट
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह टॉयलेट बनाए जा रहे हैं। सरकार ने 22 फरवरी 2023 के बजट सत्र में महिला कल्याण के तहत 1050 करोड़ का बजट जारी किया था।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह टॉयलेट बनाए जा रहे हैं। सरकार ने 22 फरवरी 2023 के बजट सत्र में महिला कल्याण के तहत 1050 करोड़ का बजट जारी किया था। इस बजट से ही यूपी पुलिस महिला कर्मियों के लिए यह टॉयलेट बनाए जा रहे है।यूपी के 1586 थानों में पहली बार महिला पुलिसकर्मियों के लिए टॉयलेट बनाया जा रहा है। इस टॉयलेट में इंडियन/वेस्टर्न दोनों तरह के रहेंगे। इसके अलावा वाश बेशन,समरसेविल पम्प की सुविधा रहेगी।

फर्स्ट फेज में 800 टॉयलेट बन जाएंगे

42 थाने ऐसे जो पुलिस विभाग का न होने पर प्री टॉयलेट बनाया जाएगा। करीब 1200 टॉयलेट होंगे जो कि डबल फेज में बनेंगे। इसमें सोलर लाइट, समरसेविल पम्प, वॉशबेशन की सुविधा रहेगी।पुलिस आवास निगम लिमिटेड को महिला टॉयलेट बनाने की प्रक्रिया की जिम्मेदारी मिली है।

पहली बार जारी हुआ था महिला टॉयलेट के लिए बजट

सरकारी विभाग ने अब हाईकोर्ट में यह हलफनामा दिया है कि 20 साल पहले मंजूर हुए अलग शौचालयों में से 51 का निर्माण कार्य प्रगति पर है।20 साल पहले साल 2001 में तत्कालीन राजनाथ सिंह सरकार ने 394 थानों में महिलाओं के लिए अलग शौचालय बनाए जाने के लिए बजट की मंजूरी दी थी।

हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, 17 जुलाई तक मांगा था स्टेटस रिपोर्ट

लगातार हाइटेक हो यूपी पुलिसिंग और पुलिस फोर्स में महिलाओं की बढ़ती संख्या के बावजूद थानों में महिलाओं के लिए अलग शौचालय नहीं होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से इस बारे में फौरन जरूरी कदम उठाने को कहा है।

हाईकोर्ट इस मामले को लेकर इतना सख्त है कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उसने सरकार से न सिर्फ जल्द से जल्द काम शुरू कराने को कहा है, बल्कि 17 जुलाई को होने वाली सुनवाई में उस एजेंसी का नाम बताने को भी कहा है, जिसे निर्माण का काम सौंपा जाना है।

12 छात्राओं ने समस्या को लेकर किया था पीआईएल

दरअसल, देश की अलग-अलग यूनिवर्सिटी और लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई कर रही 12 छात्राओं की टीम ने अपना प्रोजेक्ट वर्क तैयार करते हुए इस समस्या को उठाया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट कमल कृष्ण राय के निर्देश पर इंटर्नशिप करते हुए इन छात्राओं ने प्रयागराज शहर के 17 पुलिस थानों का मुआयना किया था। छात्राओं ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि 17 में से सिर्फ पांच थानों में ही महिलाओं के लिए अलग शौचालय हैं। बाकी थानों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती है। लेकिन उनके लिए अलग शौचालय का कोई इंतजाम नहीं है। वह या तो कॉमन टॉयलेट का इस्तेमाल करती हैं या फिर कहीं दूसरी जगह फ्रेश होती हैं।

सीनियर वकील और ह्यूमन राइट्स लीगल नेटवर्क के अध्यक्ष कमल कृष्ण राय की सलाह पर इन छात्राओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका यानी PIL दाखिल की थी। प्रयागराज हाई कोर्ट के डबल बेंच के जटिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस गजेंद्र कुमार की पीठ ने लॉ स्टूडेंट दीक्षा, कुमारी प्रिया, शाल्वी तिवारी, समीक्षा सिंह, विजय कुमार और देवांश सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया था।

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