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क्या अाप जानते है प्रथम विश्व युद्ध किन दो देशों के कारण हुआ था?

 Special News Coverage |  2016-04-01 12:59:52.0

क्या अाप जानते है प्रथम विश्व युद्ध किन दो देशों के कारण हुआ था?

नई दिल्ली: अगर आपसे पूछा जाए कि प्रथम विश्व युद्ध कब हुआ था, क्यों हुआ था, किन देशो के कारण हुआ था तब आप यही बोलेंगे कि संसार के कुछ देश अपने अहम को सिद्ध करना चाह रहे थे। वह खुद की ताकत के दम पर विश्व पर राज करना चाह रहे थे। दरअशल में यह बात पूरी तरह से सही नहीं है, आज हम आपको बताने वाले हैं कि प्रथम विश्व युद्ध के असली मायने में क्या कारण थे, प्रथम विश्व युद्ध किन दो देशों के कारण हुआ था।

आपको बता दे की प्रथम विश्व युद्ध बीसवीं सदी के प्रारंभ में लड़ा गया था। प्रथम विश्वयुद्ध की शुरुआत 28 जुलाई 1914 ई में हुई थी। यह युद्ध 4 वर्ष तक चला था, इस युद्ध में 37 देशों ने भाग लिया था। अगर आप कारणों को खोजना शुरू करें तो ना जाने कितने कारणों वाली लिस्ट आपके सामने आ सकती है। प्रथम विश्व युद्ध किन दो देशों के कारण हुआ था, युद्ध से पहले फ्रांस एक दम अकेला देश था, जर्मनी के साथ रूस, आस्ट्रिया, हंगरी और इटली जैसे देश भी थे। तो इस लिहाज से जर्मनी का खेमा बहुत ही ताकतवर था लेकिन तभी जर्मनी के साथ न इंग्लैंड रहा और ना ही रूस, इसको अनहोनी के लिहाज से भी देखा जा सकता है, लेकिन फ्रांस का खेमा अब मजबूत हो चुका था।


प्रथम विश्व युद्ध का एक कारण यह भी रहा था कि तब विश्व की कुछ ऐसी संस्थायें भी थीं जो अपने हथियार बेचना चाह रही थीं। सभी को पता था कि अगर युद्ध हो गया तो इससे इनको बहुत अधिक मुनाफा होगा। प्रथम विश्व युद्ध किन दो देशों के कारण हुआ था, प्रथम विश्व युद्ध से पहले तक कोई भी राष्ट्र और राष्ट्रीयता को नहीं जानता था, परन्तु आपको बता दे की सबसे पहले फ्रांस ने इस शब्द का प्रयोग किया, अपने को एक राष्ट्र बनाने की शुरुआत हुई और इस शुरुआत के अन्दर ही दूसरे देशों को भी अपने देशों में मिलाया गया तब जर्मनी को राष्ट्रीयता से खतरा लगा और वह युद्ध जैसी चीज पर आ गया। इस लिहाज से भी मीडिया को खरीदकर यह सब प्लान बनाया गया था।

उस समय के समाचार पत्रों को प्रथम विश्व युद्ध का सबसे बड़ा कारण माना जाता है, जिस तरह की ख़बरें उन्होंने चलाई थी और राष्ट्र की भावना के साथ लोगों को बहकाया था तो उस लिहाज से मीडिया को इस युद्ध का बड़ा कारण माना जा सकता है। अगर आप उदाहरण स्वरुप देखें तो अभी भी भारत के अन्दर मीडिया हिन्दू-मुसलमान मुद्दों पर कुछ यही करता हुआ नजर आ रहा है।

आपको बता दे की दो छोटे से देश जिनका वजूद भी तब कुछ नहीं था, उन देशों का साथ देने और उन पर कब्ज़ा करने की होड़ के चलते इस युद्ध को लड़ा गया। जी हाँ
आस्ट्रिया और सर्बिया इन दो देशों के कारण युद्ध हुआ था।
क्यों की सर्बिया में वहां के युवराज फर्डिनेंड की हत्या की गयी थी। बोस्निया की राजधानी सेराजेवो में राजकुमार की हत्या हुई थी। सर्बिया सरकार को इसकी जानकारी थी किन्तु किसी ने भी इस हत्या को रोकने का प्रयास नहीं किया था। वहीँ दूसरी तरफ जनता में इस बात से रोष था और आस्ट्रिया इस बवाल में आकर, सर्बिया से लड़ाई चालू कर देता है।

आस्ट्रिया और रूस दोनों की बाल्कन प्रायद्वीप पर कब्जा करना चाहते थे लेकिन यहाँ के अधिकतर लोग आस्ट्रिया के थे किन्तु रूस ने सबसे पहले अपन सेना को युद्ध के लिए तैयार होने के निर्देश दिए थे। बताया जाता है रूस ने जैसे ही प्रायद्वीप पर कब्ज़ा करना चालू किया तभी यह युद्ध शुरू हुआ। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान जर्मनी ने रूस पर 1 अगस्त 1914 ई को आक्रमण किया था।

आपको बता दे की जर्मनी के यू बोट द्वारा इंगलैंड लूसीतानिया नामक जहाज को डुबोने के बाद अमेरिका प्रथम विश्वयुद्ध में शामिल हुआ था। क्योंकि लूसीतानिया जहाज पर मरने वाले 1153 लोगों में 128 व्यक्ति अमेरिकी थे, तो देखा जाए तो तो इस युद्ध की कोई बड़ी वजह नहीं थी। किन्तु राष्ट्र और राष्ट्रीयता के कारण ही लाखों लोगों को मारा गया था। अगर वर्तमान में इस तरह के कुछ दृश्य देखने हों तो भारत के अन्दर भी यही कुछ विषय जन्म लेते आपको दिख जायेंगे।

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