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शरीर दफन है ताजमहल में, आत्मा कहीं और भटकती है, जानें बेगम की कहानी

 Special News Coverage |  1 April 2016 2:03 PM GMT

शरीर दफन है ताजमहल में, आत्मा कहीं और भटकती है, जानें बेगम की कहानी

आगरा का विश्व प्रसिद्ध ताजमहल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज और अपने प्रेम को बयां करने के लिए बनवाया था, परंतु शायद बहुत कम लोग यह जानते होंगे की ताजमहल बनने तक मुमताज के मृत शरीर को बुरहानपुर के बुलारा महल में दफनाया गया था, ताजमहल बनने से पहले ही मुमताज की मृत्यु हो चुकी थी। और लोगों की मानें तो इन खंडहरों में आज भी मुमताज की आत्मा भटकती है।

मुमताज़ और शाहजहाँ की मौत के सैंकड़ों सालों बाद भी ताजमहल इन दोनों की मोहब्बत की कहानी बयां कर रहा है, ताजमहल शाहजहाँ और मुमताज़ के प्यार की निशानी है, और ताजमहल दुनिया के 7 अजूबों में से एक है।


शाहजहाँ अपनी बेगम मुमताज़ से बेइंतहा प्यार करता था। मुमताज़ के गर्भवती होने पर वो बुरहानपुर के महल में थी। बच्चे को जन्म देते समय ही मुमताज़ की मौत बुलारा महल में हो गयी। तब शाहजहां बुरहानपुर में ही ताजमहल का निर्माण कराने वाले थे, परंतु किसी कारणवश यह संभव न हो सका। मौत के बाद शाहजहाँ ने मुमताज़ के शरीर को बुरहानपुर में ही कब्र बनाकर दफ़न कर दिया। ताजमहल का निर्माण कार्य करीब 20 वर्षों तक चला। जब आगरा में ताजमहल बनकर तैयार हुआ तो वहां मुमताज के मृत शरीर को ताजमहल में एक खूबसूरत मकबरा बनाकर दफना दिया गया।

मुमताज़ की मौत से शाहजहाँ टूट सा गया। यहां के लोगों का मानना है कि ताजमहल में बेगम मुमताज़ का शरीर ही आया। लेकिन आत्मा आज बुरहानपुर में ही है। लोगों की मानें तो मौत के बाद भी मुमताज़ की आत्मा अपने संतान मोह की वजह से बुरहानपुर के महल में ही भटकती है। अक्सर महल से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आती हैं। इन आवाजों का आना यहां के लोगों के लिए आम बात है। हालांकि, आज तक यहां आने वाले किसी भी शख्स को मुमताज की आत्मा ने परेशान नहीं किया और न ही नुकसान पहुंचाया है। मौजूद तथ्यों के आधार पर सन् 1631 में यहां अपनी बेटी को जन्म देने के कुछ दिनों बाद ही मुमताज चल बसी थीं। कहते हैं कि यही वजह है कि उनकी आत्मा इस महल में ही बस गई।

अब इस कहानी में कितनी सच्चाई है और कितनी कल्पना ये तो वहां जाकर ही पता चलेगा। वैसे यदि मुमताज़ की आत्मा आज भी मुमताज़ महल के खंडहरों में भटकती है और किसी को नुक्सान नहीं पहुंचाती तो ये बात अच्छी है। शायद आज भी एक माँ की रूह को अपनी संतान का मोह आज़ाद नहीं होने दे रहा है।

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