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बातचीत टलना पाकिस्तान को मोदी की दूसरी डोज़!

 Special News Coverage |  14 Jan 2016 2:40 PM GMT

modi


पाकिस्तान से निपटने के लिए "कौरवों" के षड़यंत्र याद रखने होंगे। बातचीत टलना पाकिस्तान को मोदी की दूसरी डोज़ है। बेशक ये कहा जा रहा है कि बातचीत पाकिस्तान के साथ आपसी सहमति से टाली गई है।

मगर सच तो है कि पाकिस्तान मसूद अजहर और उसके भाई को गिरफ्तार करने के बारे में कोई संतोषजनक तथ्य पेश नही कर सका और जिसके चलते मोदी ने पाकिस्तान को बातचीत रोक कर दूसरी डोज़ दे दी। पाकिस्तान को समझना होगा कि अन्ततः बराक ओबामा ने उसे आतंकियों की पनाहगार घोषित कर दिया है और पाकिस्तान को दिए जाने वाले F-16 विमानों की सप्लाई पर भी रोक लगा दी है।



अगर पाकिस्तान को आतंकवादियों को काबू करना है तो उसके लिए अपने ही संगठनों पर लगाम लगानी होगी जिनमे ISI प्रमुख है और सेना भी शामिल है। दूसरी बात पाकिस्तान को ध्यान रखना होगा कि ये आतंकी किसी के सगे नही होते कार्रवाई करके देखो ये आतंकी वो ही करेंगे जो तालिबानी कर रहे हैं। मगर कार्रवाई तो करनी होगी, और अगर नही कर सकते तो भारत की मदद ले लो।


दूसरी तरफ भारत को पाकिस्तान से निपटने के लिए "कौरवो" के षड़यंत्र रखने होंगे। कौरव भी पकडे जाने पर गिड़गिड़ाते थे और पुनः अपने दुष्कर्मों को अंजाम देने में लग जाते थे। यही हाल पाकिस्तान का है। रोज रोज के षडयंत्रो का एक मात्र जवाब था "युद्ध' जो हुआ और पांडवों की विजय हुयी ये विजय भारत की पहले भी हो चुकी है। मगर पाकिस्तान फिर खड़ा हो जाता है।


और लगता है अबकी युद्ध निर्णायक होगा पाकिस्तान की अपनी समस्या में खुद फंसा है और वो समस्या है कि पाकिस्तान में शक्ति के अनेक केंद्र बिंदु हैं। प्रसाशन नवाज़ के पास दूसरा केंद्र IS तीसरा केंद्र सेना और चौथा केंद्र "आतंकी संगठन" इन सभी शक्ति केन्द्रों में निहित शक्तियों की वजह से पाकिस्तान बारूद के ढेर पर बैठा और भारत को ही इसका निवारण करना होगा क्यूंकि ये सभी केंद्र भारत के लिए घातक हैं क्यूंकि उनके मंसूबों को पूरा करने वाले मददगारों की भारत में कमी नही है।
(लेखक सुभाष चन्द्र)

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