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2017 में गोरिल्ला एक्टिविस्ट वॉर करेंगे झूठे दावे कर सत्ता हासिल करने वालो पर

 Special News Coverage |  18 April 2016 2:47 AM GMT

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सामाजिक कार्यकर्ता डॉ निधि पंकज अग्रवाल ने कहा है कि यह सत्य है कि संसद कार्य पालिका एवं विधायपालिका सर्वोपरि है लेकिन जिस जनता ने उसे चुना है यदि वही अपने प्रतिनिधियों से असंतुष्ट है तो उसके असंतोष को 1975 में इमरजेन्सी लगाकर भी नहीं दबाया जा सका तो लोकतंत्र में यह कैसे संभव है?


यह प्रसन्नता की बात है कि आज आम आदमी भी भ्रष्टाचार के विरूद्ध बोलने लगा है। उसे ज्यों ही मौका मिलता है, तो वह भ्रष्टों को मजा चखाने में भी देर नहीं लगाता। जनता के आक्रोश की अभिव्यक्ति पिछले वर्ष हुए सभी आंदोलनों में प्रकट हुई। क्या जनाक्रोश के बिना अन्ना का दिल्ली आंदोलन सफल हो सकता था? क्या स्वामी रामदेव के आह्वान पर जुटी भीड़ देश के जनमानस का प्रकटीकरण नहीं था? आज जरूरत है हमारे नेता दीवार पर लिखे सत्य को पढ़ने की कोशिश करें कि अब उनकी मनमानी ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है। कोई भी दल अथवा नेता ज्यादा समय तक जनता को बेफकूफ नहीं बना सकता। आज नेताओं, अधिकारियों के विरूद्ध ही नहीं, अनेक बाबाओं के विरूद्ध भी लोग मुंह खोलने लगे हैं। जल्द ही एक सामाजिक संगठन लोगो की भलाई के लिए काम करेगा दबे कुचले लोगो की लड़ाई लड़ेगा।



जो नेता जनता से वोट लेकर जनता की नही सुनते उनका उत्पीड़न करते है ऐसे नेताओ के खिलाफ आंदोलन करके उनकी पोल खोलने का काम करेगा।
जो अधिकारी जनता की नही सुनते उनके खिलाफ आंदोलन धरना प्रदर्शन करेगा सभी लोग ऐसे संगठन से जुड़ना चाहेंगे।


क्या एक ऐसा संगठन नही बनना चाहिए जो सरकार जनता की ना सुने उसके खिलाफ सड़को पर उतरे हर धर्म हर जाती के लोगों के लिए लड़े जो लोग पिछड़ गए है। वह किसी भी धर्म और जाती के क्यों न हो उन सभी को साथ लेकर चला जायेगा जिसका रजिस्ट्रेशन प्रकिया लगभग पूरी होने जा रही है॥ जिसका अभी नाम गुप्त रखा गया है। उक्त संग़ठन में रिटायर्ड आईएएस आईपीएस एवं महान अधिवक्ता व कुछ सम्मानित लोग जोड़े गए है। जिसका कार्यभार भारत के प्रसिद्ध आरटीआई एक्टिविस्ट दानिश खान की देख रेख में चल रहा है। इस पर काफी आई टी एक्सपर्ट भी लगे हुए साथ ही आपको बता दे की इसमें कुछ वेज्ञानिको की पत्निया भी शामिल है जो इस पर दिल्ली में रिसर्च कर रही है।

अब लच्छेदार बातों से जनता को ठगने वालों की अब खैर नहीं। यह बात वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार के लिए नही सभी को समझनी चाहिए कि उन्हें प्राप्त श्रद्धा और धन मूलतः जनता का ही है। वे इसे प्राप्त कर इसके निरंकुश स्वामी नहीं बन सकते। उन्हें इसे वापस जनता के कल्याण पर ही खर्च करना होगा। बाबा हो या नेता, उन्हें स्वयं को जनता के प्रतिनिधि समझकर कार्य करना होगा, न कि निधिपति बनकर। कालेधन के मुद्दे पर दिल्ली के रामलीला मैदान में धरना देने से पहले सरकार से समझौता करने के आरोपों के बीच पुलिस ज्यादतियों के बीच महिला के कपड़े पहन कर फरार होने की कोशिश ने बाबा रामदेव की प्रतिष्ठा को भारी आघात पहुँचाया है। इसका उत्तर देने अथवा अपने व्यवहार में किसी सकारात्मक सुधार की जरूरत रामदेव ने अब तक क्यों महसूस नहीं की? गलती गलती है, बाबा की हो या नेता की। दिल्ली से डॉ निधि पकजं अग्रवाल ने बताया यह व्यक्तिगत विचार है मेरे अब गोरिल्ला युद्ध की तरह घटिया राजनीति करने वालो पर शिकंजा कसने की तैयारी है जिसकी शरुआत उत्तर प्रदेश से होगी 2017 में हमारा संग़ठन गोरिला युद्ध की तरह उन पर सीधा वॉर करेगा जो चुनाव के दौरान झुटे घोषड़ा पत्र जारी कर जनता को ठगते रहे हैं।

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