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हंगामा है क्यूँ बरपा -क्या कोई आसमान टूट पड़ा है...........

 Special News Coverage |  9 Dec 2015 3:55 PM GMT

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लेखक सुभाषचन्द्रा
अभी चार दिन पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने जोर दे कर कहा था कि न्यायपालिका के स्वतंत्र रहते हुए किसी को डरने की जरूरत नही है --जब न्यायपालिका स्वतंत्र है तो फिर राहुल गांधी किस मुंह से कह रहे हैं कि न्यायपालिका को कौन धमका रहा है --

अब ये बात कह कर संसद में राहुल गांधी कहना चाहते हैं कि उन्हें और सोनिया को समन सरकार के दबाब में दिया गया और हाई कोर्ट ने उनकी अर्जी भी दबाब में खारिज की --क्या वाहियात सोच है जबकि उसे पता है कि इमरजेंसी से उसकी पार्टी committed judiciary की पक्षधर रही है और इसके चलते सभी निर्णय इंदिरा सरकार के पक्ष में होते थे --



राहुल, सोनिया और कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि जब अडवाणी जी को नरसिम्हा सरकार ने जैन हवाला डायरी काण्ड में फंसाया था तब अडवाणी जी ने तुरंत लोक सभा से त्यागपत्र दे दिया था और प्रतिज्ञा की थी कि जब तक आरोपमुक्त नही होता संसद में कदम नही रखूँगा --गडकरी पर भी जब कांग्रेस ने आरोप लगाये थे तो उन्होंने भी पार्टी के अध्यक्ष पद से तुरंत त्यागपत्र दे दिया था --माँ-बेटे में हिम्मत है तो वो अडवाणी जी और गडकरी का अनुसरण
करते हुए लोक सभा और पार्टी पदों से त्यागपत्र दें जिससे कांग्रेस और उनकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी --



मगर ये शोर मचा कर कि 100 प्रतिशत राजनीतिक बदला लिया जा रहा है और संसद ठप्प करके कांग्रेस और माँ-बेटे अपनी प्रतिष्ठा को बट्टा लगा रहे हैं --बदले की कार्रवाई का नारा अब लोगों को नही बेच पाओगे --





राजनीतिक बदला कैसे हुआ इसका भी तो जवाब दो -क्यूंकि जब डॉ स्वामी ने केस दायर किया 2012 में तब वो जनता पार्टी के अध्यक्ष थे --अगस्त 2013 में वो भाजपा में आये और जब कोर्ट ने केस का संज्ञान लिया तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी --निर्णय अदालत का है --राजनीतिक बदला कहा से बीच में आ गया--क्या अब अदालत को भी काम नही करने दोगे -अगर ऐसी मंशा है और अदालत से आपत्ति है तो अदालतों के बाहर जा कर
धरना देने की हिम्मत करो --


मोदी के खिलाफ जब सुप्रीम कोर्ट ने SIT बनाई तो उन्होंने कोई प्रतिकार नही किया और कहा मुझे न्यायपालिका में पूरा भरोसा है और मैं न्यायालय का आभारी हूँ जिसने मुझे अपना पक्ष रखने दिया --मगर कांग्रेस ने तब कहा था --कानून अपना काम कर रहा है --


अगर मोदी के खिलाफ SIT बनाने में कानून अपना काम कर रहा था तो अब क्या कानून अपना काम नही कर रहा --मगर कांग्रेस ने तो आसमान सिर पे ऐसे उठा रखा है कि जैसे समन अदालत ने नही मोदी ने जारी किये हों --और माँ-बेटे को कोर्ट में नही मोदी के सामने पेश होने को कहा गया है --
कांग्रेस अपना आचरण बदले --ये शोर शराबे और भीड़ तंत्र की राजनीती बंद करे --लोगों में थू थू ही हो रही है --माँ-बेटे को कुछ संयम मोदी से ही सीख लेना चाहिए --

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