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कंडोम-सेनेटरी पैड के साथ अब मिलेगा डिस्पोजल पाउच

 Special News Coverage |  6 April 2016 1:22 PM GMT

कंडोम-सेनेटरी पैड के साथ अब मिलेगा डिस्पोजल पाउच

दिल्ली: कॉन्डम, डायपर, सैनिटरी पैड/नैपकिन और कॉटन पैड्स जैसे प्रॉडक्ट बनाने वाली कंपनियों को अब अपने उत्पाद के साथ ऐसे पाउच या रैपर देने होंगे जिनमें उसे इस्तेमाल के बाद ठीक तरह से निपटाया जा सकेगा। पर्यावरण मंत्रालय ने मंगलवार को ठोस कचरे के प्रबंध की सरकारी नीति के तहत इस प्रावधान को अनिवार्य कर दिया। डायपर्स, कॉन्डमस्, और सैनिटरी पैड्स अगर रैपर में ठीक से पैक न हों तो कचरा बीनने वाले उन्हें चुनने से हिचकते हैं और इसी के मद्देनजर सरकार ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।


नए नियम के तहत कंपनियों, ब्रैंड के मालिकों और मार्केटिंग कंपनियों से इन प्रॉडक्ट्स के निपटारे के तौर तरीकों के बारे में आम लोगों को शिक्षित करने की उम्मीद भी की गई है। कंपनी की जिम्मेदारी के कॉन्सेप्ट के तहत सैनिटरी वेस्ट के निपटारे के लिए पाउच या रैपर मुहैया कराने के आर्थिक पहलू और इसकी प्रक्रिया के बारे में विचार किया जाएगा। सैनिटरी वेस्ट' की कैटिगरी में 'डायपर्स, सैनिटरी टॉवेल या नैपकिन, कॉटन पैड्स, कॉन्डम्स और इसी तरह के दूसरे कचरों' को शामिल किया गया है।

नए नियम पूरे देश में स्थानीय निकायों द्वारा लागू किए जाएंगे। स्थानीय निकायों को बड़े पैमाने पर इस तरह का कचरा जेनरेट करने वालों से 'यूजर फी' चार्ज करने और इसे इधर-उधर फैलाने पर जुर्माना लगाने का अधिकार भी दिया गया है। इन नियमों को मंगलवार से ही लागू कर दिया गया है लेकिन स्थानीय निकायों को ठोस कचरे के प्रबंधन के लिए छह महीने की मोहलत दी गई है। 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों को दो साल के भीतर ठोस कचरे के प्रोसेसिंग संयंत्र भी स्थापित करना होगा।

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