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सिर्फ 10 सेकेण्ड में पता लगाएं कैंसर का, है या नहीं

Find out cancer in just 10 seconds, is not it?

 शिव कुमार मिश्र |  2017-09-13 11:17:36.0  |  दिल्ली

सिर्फ 10 सेकेण्ड में पता लगाएं कैंसर का, है या नहीं

नई दिल्ली: किसी भी बीमारी का पता लगाने के लिए आमतौर पर कई तरह के टेस्ट करवाएं जाते हैं और जब बात हो कैंसर की तो बिना टेस्ट के कैंसर की पहचान हो पाना मुश्किल हो जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं अब आपको कैंसर के लिए टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं. जी हां, अब एक डिवाइस पता लगाएगी आपको कैंसर है या नहीं. जानिए, इस डिवाइस के बारे में कुछ और बातें.

कैसे काम करती है ये डिवाइस
ये नई डिवाइस सिर्फ 10 सेकंड में पता लगा सकती है कि कैंसर है या नहीं. टेक्सास यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता ऑस्टिन ने एक ऐसी पॉवरफुल डिवाइस का पता लगाया है जो कैंसर के टिश्यूज का तेजी से और सटीक रूप से पहचान करने की क्षमता रखता है. यह मौजूदा तकनीक से 150 गुना तेजी से काम करता है और रिजल्टस केवल 10 सेकेंड के अंदर देता है. इस डिवाइस को मासस्पेतक पेन (MasSpec Pen) नाम दिया गया है.
क्या कहते हैं शोधकर्ता
इस रिसर्च के शोधकर्ता लिविया एबरलिन का कहना है कि जब भी आप कैंसर पेंशेंट से सर्जरी के बाद बात करते हैं तो वे उम्मीद करते हैं कि डॉक्टर्स कैंसर को पूरी तरह से बाहर निकाल चुके हों. डॉ. लिविया कहते हैं कि टेक्नोलॉजी ने बहुत इंप्रूव किया है. डॉक्टर्स कैंसर को पूरी तरह से नष्ट करने का प्रयास करते हैं. ऐसे में इस तरह की डिवाइस कैंसर के बारे में पता लगाने में बहुत मददगार साबित हो सकती है.
कैसे की गई रिसर्च
शोध से पता चला है कि 253 कैंसर के मरीजों के किए गए कैंसर टिश्यू टेस्ट में मासस्पेक पेन लगभग 10 सेकंड में कैंसर डिटक्ट कर लिया और यह 96% तक सही था. टीम को उम्मीद है कि 2018 में ओंकोलजिक सर्जरी के दौरान इस नई तकनीक का परीक्षण करना शुरू किया जाएगा.
कैसे काम करता है डिवाइस
डॉक्टर्स इस डिस्पोजेबल हैंडहेल्ड डिवाइस को आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए सिर्फ मरीज के टिश्यूज़ को पेन से पकड़ना होता है फिर फूट पेडल का उपयोग करके यह विश्लेषण करता है. हां, इसके सटीक रिजल्‍ट के लिए कुछ सेकेंड इंतजार करना पड़ता है. इसके बाद पेन टिश्यू पर पानी की एक बूंद जारी करता है और इसके बाद छोटे अणु पानी में विस्थापित होते हैं. फिर डिवाइस वाटर सैंपल को मास स्पेक्ट्रोमीटर नामक डिवाइस में चलाता है और इसके बाद यह मॉलीकुलर फिंगरप्रिंट के रूप में हजारों मॉलीकुलर्स का पता लगाता है.

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