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रिपोर्ट: भारत पहली बार FDI के मामले में चीन और अमेरिका से आगे निकला

 Special News Coverage |  2016-04-22 12:22:11.0

रिपोर्ट: भारत पहली बार FDI के मामले में चीन और अमेरिका से आगे निकला

नई दिल्ली: भारत ने फॉरन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) आकर्षित करने के मामले में चीन को पीछे छो़ड़ दिया है। यह पहला मौका है जब इस मामले में भारत चीन से आगे निकला है। द फाइनेंशल टाइम्स के एफ.डी.आई. इंटेलीजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, 40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ौतरी के साथ वर्ष 2015 में भारत में 63 अरब डॉलर की एफ.डी.आई. परियोजनाओं की घोषणा की गई। इसमें फॉक्सकॉन ने पांच अरब डॉलर तथा सनएडिसन ने चार अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की। भारत में निवेश में सबसे ज्यादा तेजी कोयला, तेल एवं प्राकृतिक गैस तथा हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देखी गई।


रिपोर्ट में कहा गया है,‘ पूंजी निवेश के हिसाब से एफडीआई के लिए शीर्ष गंतव्य के रूप में भारत ने चीन की जगह ले ली है।’ वर्ष 2015 में फॉक्सकान व सनएडिसन सहित अनेक कंपनियों ने भारत में निवेश की घोषणा की।

भारत के बाद दूसरे नंबर पर अमेरिका रहा जो गत वर्ष 59.6 अरब डॉलर का एफ.डी.आई. आकर्षित करने में कामयाब रहा। वहीं, वर्ष 2014 में पहले स्थान पर रहने वाला चीन खिसककर तीसरे स्थान पर चला गया है। वहां 56.6 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की गई। हालांकि, परियोजनाओं की संख्या के आधार पर अमेरिका पहले स्थान पर है जहां पिछले साल कुल 1517 एफ.डी.आई. परियोजनाओं की घोषणा की गई।

केंद्रिय वित्‍त राज्‍यमंत्री जयंत सिन्‍हा ने ट्वीट कर कहा एफडीआई आकर्षित करने के मामाले में इंडिया टॉप पर पहुंच गया है। दावा किया गया है कि 2015 में एफडीआई आकर्षित करने वाले टॉप 10 राज्‍यों में पांच भारतीय राज्‍य हैं।

दुनिया भर में वर्ष 2015 में कुल 11930 परियोजनाओं में 713 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेशों की घोषणा हुई। इसमें कोयला, तेल तथा प्राकृतिक गैस में सबसे ज्यादा निवेश आया। इससे रोजगार के 18 लाख 91 हजार 576 नए अवसर मिलेंगे। एफ.डी.आई. का सबसे बड़ा स्रोत अमेरिका रहा।

एफ.डी.आई. आकर्षित करने वाले स्थानों में गुजरात शीर्ष पर है। गुजरात समेत पांच भारतीय राज्य इस मामले में शीर्ष 10 में जगह बनाने में कामयाब रहे हैं। गुजरात में 2015 में 12.36 अरब डॉलर का निवेश आया। कुल 8.28 अरब डॉलर के साथ महाराष्ट्र सूची में चौथे, 6.10 अरब डॉलर के साथ आंध्र प्रदेश पांचवें, 4.98 अरब डॉलर के साथ कर्नाटक छठे तथा 3.20 अरब डॉलर के साथ झारखंड 10वें स्थान पर रहा। शीर्ष 10 में अन्य पांच स्थान चीन के हैं।

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