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संयुक्त राष्ट्र की इमारतों के सामने अब फहरायेगा फ़लस्तीनी झंडा

 Special News Coverage |  2015-09-11 15:54:35.0

Palestine flag


संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र की इमारतों के सामने फ़लस्तीन का झंडा फहराने संबंधी एक प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भारी मतों से पारित कर दिया है।

भारत समेत 119 देशों ने प्रस्ताव का समर्थन किया जबकि इसराइल और अमरीका समेत आठ देशों ने प्रस्ताव के विरोध में वोट दिया और ब्रिटेन समेत कुल 45 देशों ने वोटिंग ही नहीं की। इनमें यूरोपीय संघ के कुछ देश भी शामिल थे।

ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इस्राइल, मार्शल आइलैंड, फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइका्रेनेशिया, पलाउ, तुवालू और अमेरिका ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। करीब 135 देश फ़लस्तीनी राष्ट्र को मान्यता देते हैं।


प्रस्ताव में क्या कहा गया
प्रस्ताव में कहा गया था कि संयुक्त राष्ट्र की इमारतों के बाहर सदस्य देशों की तर्ज पर फ़लस्तीनी प्राधिकरण जैसे 'नॉन मेम्बर ऑब्ज़रवर्स' का झंडा भी फहराना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र में फ़लस्तीनी प्रतिनिधि रियाद मंसूर ने वोटिंग से पहले कहा कि यह फ़लस्तीनियों के लिए राष्ट्र का दर्जा पक्का करने की दिशा में एक और क़दम होगा।

2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने फ़लस्तीनी प्राधिकरण को 'नॉन मेम्बर ऑब्ज़रवर्स' का दर्जा दिया था जिसकी वजह से वह महासभा में होने वाली चर्चाओं में शामिल हो सकता है।

इससे पहले साल 2011 में संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण स्टेट के रूप में फ़लस्तीनी प्राधिकारण को जगह देने का प्रयास किया गया था जो सुरक्षा परिषद में अपर्याप्त समर्थन की वजह से विफल हो गया था।



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हालांकि इसी वर्ष मई में वेटिकन ने ऐसा पहला द्विपक्षीय समझौता किया था जिसमें फ़लस्तीनी राष्ट्र को मान्यता दी गई थी। फलस्तीन 2012 में पर्यवेक्षक देश बना था। वेटिकन 1964 के बाद से गैर सदस्य पर्यवेक्षक है।

संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन के दूत रियाद मंसूर ने ‘ऐतिहासिक वोट’ की सराहना करते हुए तकरीबन सात दशक पहले फलस्तीनी लोगों से किये गए आजादी के वादे की दिशा में एक कदम और आगे बढे है।

हालांकि इसराइल ने इस प्रस्ताव का ज़बर्दस्त विरोध किया था और संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों से प्रस्ताव के विरोध में मतदान करने का आग्रह किया था। संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के प्रतिनिधि रॉन प्रोसोर का कहना है कि ताज़ा प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र को 'अगवा' करने का प्रयास है।

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